सलोनी मल्होत्रा
(एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट पेटीएम और देसी क्रू की बोर्ड मेम्बर) पहला ग्रामीण बीपीओ – दिल्ली की सलोनी मल्होत्रा का यह प्रयास एक मिसाल बन गया। सलोनी ने तमिलनाडू के एक गांव में ‘देसी क्रू नाम से एक बीपीओ खोला जो कुछ वर्षों में ही कामयाब हो गया।
देसी क्रू का मकसद – प्रमुख मकसद था युवाओं का गांव से पलायन रोकना।
‘देसी क्रू के जरिए सलोनी ने युवाओं को उनके इलाके में ही रोजगार दिया। अब गांवों में काम करने का मतलब सिर्फ एग्रीकल्चर या केवल हैंडीक्राफ्ट में काम करना बिल्कुल नहीं है बल्कि सलोनी की सोच है कि गांवों के पढ़े लिखे लोग बहुत कुछ कर सकते हैं।
मुश्किलों से नहीं मानी हार – गांव में काम करना मुश्किल था, लेकिन इसे सलोनी ने एक टास्क समझकर बखूबी कर दिखाया।उन्होंने साउथ इंडिया के ऐसे गांव के बारे में कल्पना की जहां 18 घंटे बिजली हो, इंटरनेट हो, पढ़ी लिखी पापुलेशन हो। आईआईटी मद्रास, विलिग्रो और एक अन्य निवेशक ने ‘देसी क्रू को खड़ा करने में उनकी मदद की और 300 लोगों को रोजगार दिया। ‘देसी क्रू के तमिलनाडु में अब 5 सेंटर हैं।
समस्याओं का सामना – शुरूआती दिनों में क्लाइंट्स को समझने-समझाने में
मुश्किल आई, वजह थी ग्रामीण इलाकों में उपयुक्त इंफ्रास्टक्चर का न होना। भाषाई समस्या से भी दो चार होना पड़ा क्योंकि ज्यादातर ग्रामीणों को लोकल भाषा आती थी। क्लाइंट्स का भरोसा देर से हासिल हुआ लेकिन अंतत: सलोनी को कामयाबी मिली।
सफलता के मंत्र –
1. सलाह लेना छोड़ खुद पर विश्वास करें
2. अपनी कीमत समझें, हर चीज के लिए नेगोसिएशन जरूरी नहीं
3. सफल होने के लिए सीखने की चाह जरूरी
4. अपनी ताकत सही दिशा में लगाएं।
