क्यों होता है गणपति विसर्जन: Ganpati Visarjan
Ganpati Visarjan

Ganpati Visarjan: गणेश प्रतिमा के विसर्जन का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों में बताया गया है। ग्रंथों के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान श्री गणेश को महाभारत की कथा सुनानी प्रारंभ की थी। लगातार दस दिन तक वेदव्यास जी श्री गणेश को कथा सुनाते रहे और गणेश जी कथा लिखते रहे।

जब कथा पूर्ण होने के बाद महर्षि वेदव्यास ने आंखें खोली तो देखा कि अत्याधिक मेहनत करने के कारण गणेश जी का तापमान बढ़ा हुआ है। गणेश जी के शरीर का तापमान कम करने के लिए वेदव्यास जी पास के सरोवर में गणेश जी को ले जाते हैं और स्नान कराते हैं। अनंत चर्तुदशी के दिन गणेश जी के तेज को शांत करने के लिए सरोवर में स्नान कराया गया था, इसलिए इस दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने का चलन शुरू हुआ।
दूसरा कारण है पृथ्वी के प्रमुख पांच तत्त्वों में गणपति को जल का अधिपति माना गया है, इस कारण भी लोग गणपति को जल प्रवाहित करते हैं।

Also read: आखिर क्यूं किया जाता है गणेश प्रतिमा का विसर्जन Reason Behind Ganesh Visarjan

1. प्रभु का विसर्जन करने से उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद भगवान को विशेष प्रसाद का भोग लगाएं और अब श्री गणेश का स्वस्तिवाचन करें।
2. एक साफ चौकी लें और उसे गंगाजल या गौमूत्र से साफ करके उस पर स्वास्तिक बनाएं। अब उस पर अक्षत रख के साफ पीला, गुलाबी या लाल कपड़ा बिछाएं।
3. चौकी की चारों ओर सुपारी रखें और कपड़े के ऊपर फूलों की पत्तियां भी डाल दें।
4. अब श्री गणेश को उनके जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और तैयार चौकी पर विराजित करें। पाटे पर विराजित करने के बाद उनके साथ फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा और 5 मोदक भी रख दें।
5. नदी, तालाब या पोखर के किनारे विसर्जन से पूर्व कपूर की आरती करें और श्री गणेश से खुशी-खुशी विदाई की कामना करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि के साथ मनचाहे आशीर्वाद मांगे। 10 दिन-अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थना भी कर लें।
6. श्री गणेश प्रतिमा को फेंकें नहीं उन्हें पूरे आदर और सम्मान के साथ वस्त्र और समस्त सामग्री के साथ धीरे-धीरे बहाएं।
7. श्री गणेश प्रतिमा इको फ्रेंडली हैं तो उन्हें घर में विसर्जित कर अपने गमले में यह पानी डाल कर हमेशा लिए अपने पास रख सकते हंै। साथ ही पर्यावरण को सुरक्षित करने की भी एक पहल कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक केवल गणेश-विसर्जन ही नहीं बल्कि हर मूर्ति-विसर्जन का अधिकार पुरुषों को दिया गया है​, फिर​ वो चाहे गणपति की मूर्ति हो या फिर मां दुर्गा की। ​आइये जाने इसके पीछे के कारण –
1. दरअसल मूर्ति-विसर्जन का संबंध अंतिम संस्कार से होता है और हिंदू रिवाजों के मुताबिक अंतिम संस्कार का हक केवल पुरुषों को ही होता है इसलिए मूर्ति-विसर्जन का काम महिलाओं से नहीं कराया जाता है।
2. मूर्ति-विसर्जन के वक्त का माहौल काफी मार्मिक और गमगीन हो जाता है इसलिए वहां ऐसे लोगों की उपस्थिति होनी चाहिए जो कि थोड़े कठोर दिल के हों इसलिए महिलाओं को विसर्जन के काम से दूर रखा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि महिलाएं कोमल हृदय की होती हैं और उनसे किसी की विदाई नहीं देखी जा सकती है।
3. कई पुराने लोगों का कहना है जब विसर्जन होता है तो अक्सर लोग वहां भांग या मदिरा पान भी कर लेते हैं और प्रभु की भक्ति में सुध-बुध खोकर नाचते हैं, ऐसे में सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महिलाओं और लड़कियों को वहां नहीं होना चाहिए।
4. दूसरा अहम कारण ये भी है कि ऐसे स्थानों पर लोग अक्सर जादू-टोने के शिकार होते हैं, महिलाएं या लड़कियां जल्दी ही इन चीजों का निशाना बन जाती हैं इसलिए भी बड़े-बुजुर्ग उन्हें वहां जाने से रोकते हैं।
हालांकि आज वक्त बदल चुका है, लोगों की सोच बदल रही है इसलिए प्रथाएं भी बदल रही हैं लेकिन जो लोग धर्म-पुराणों को मानते हैं वो जरूर विसर्जन के काम से लड़कियों और महिलाओं को दूर रखने की कोशिश करते हैं, इसके पीछे कोई जाति विशेष से प्रेम या उपेक्षा कारण नहीं है।