Starting of Festival: यूं तो भारत त्योहारों का देश है। शायद ही कोई दिन ऐसा होगा जिस दिन कोई छोटा या बड़ा व्रत या त्योहार न होता हो परंतु भादो माह के बीतते ही पूजा-पाठ की, व्रत-त्योहारों की जैसे एक झड़ी सी लग जाती है।
भले ही हम श्राद्ध के दिनों में कोई नया कपड़ा या सामान नहीं खरीदते। न घर-आंगन को सजाते हैं, भले ही मन में वो उल्लास और उमंग नहीं होती पर अपने पितरों एवं पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व धन्यवाद तो होता है। हमारे जीवन में जिस तरह बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूरी है ऐसे ही अपने पूर्वजों की कृपा भी जरूरी है। त्योहारों से पूर्व अपने रूठे पूर्वजों को यदि मना लिया जाए तो केवल पूरे वर्ष को ही नहीं पूरे जीवन को सुंदर बनाया जा सकता है। यही कारण है कि आज श्राद्ध भी त्योहार का रूप ले चुका है। लोग हर वर्ष इन दिनों का अन्य त्योहारों की तरह बड़े ही श्रद्धा भाव से इंतजार करते हैं।
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श्राद्ध के बीतते ही मौसम आ जाता है नवरात्रों का, दुर्गा पूजा के पंडालों का, रामलीलाओं के मंचों का। दशहरा-दुर्गा विसर्जन, करवाचौथ और फिर पर्वों के महापर्व दीपावली अपने पांच पर्वों के साथ हमें गले लगाने को बेकरार रहता है।
सच तो यह है कि यह तो बस शुरुआत भर है इस माह के आते ही त्योहारों के ही नहीं शादियों के भी मौसम आ जाते हैं यानी यह समय विवाह संस्कार के लिए भी अनुकूल होता है और भारत में तो विवाह भी किसी महोत्सव से कम नहीं होता। लोग इन महीनों का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
यदि इस समय को ‘उत्सव द्वार’ कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा, क्योंकि त्योहारों एवं उत्सवों की इसी श्रंृखला में छठ, क्रिसमस, ईद, नव-वर्ष, लोहड़ी, पोंगल, होली आदि कई अनेक छोटे-बड़े पर्व-व्रत और त्योहार भी आते हैं जो हमारे जीवन में नई रोशनी एवं रंग भर देते हैं।
इन त्योहारों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है यदि यह तीज-त्योहार जीवन में न हों तो जीवन नीरस हो जाएगा। लोग अपने काम और जिम्मेदारियों में ही बंटकर रह जाएंगे। हमारी कला-संस्कृति, परंपरा एवं रीति-रिवाज आदि इन्हीं त्योहारों के कारण जीवित है। यह त्योहार हमें स्वार्थ एवं घर की दहलीज से बाहर लाकर नि:स्वार्थी एवं सामाजिक बनाते हैं।
इतना ही नहीं इस समय से मौसम में भी परिवर्तन आने लगता है दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं। हवाओं में नमी और ठंड महसूस होने लगती है। तन को गर्मी एवं पसीने से निजात मिलती है जिसके कारण मन स्वत: ही हल्का और खुशनुमा होने लगता है, फिर खान-पान हो या आहार-विहार सभी कुछ जीवन में नई उमंग भर देता है।
इन त्योहारों के चलते घर में रंग-रोगन भी होना शुरू हो जाता है। अपना ही घर हमें नया एवं सजा हुआ लगता है। त्योहार के बहाने नए कपड़ों की खरीदारी भी हो जाती है। तरह-तरह के पकवान एवं मिठाइयां खाने का मौका मिलता है। भूले-बिछड़े दोस्तों से बात करने व उनके यहां आने-जाने का तथा अपनों के साथ आपसी रंजिश एवं मनमुटाव आदि को दूर करने का भी मौका मिलता है।
त्योहार हैं तो जीवन में उमंग है, उत्सव है तो कुछ नयापन है। त्योहार कई मौके, कई अवसर लेकर आते हैं। हमारे जीवन में खुशियां लाने के, इसलिए हमें त्योहारों को मन से, मस्ती से मनाना चाहिए और त्योहारों के इस मौसम का जी खोलकर स्वागत करना चाहिए।
