Kalki Devta: धर्मशास्त्रों में अब तक धरती पर चार युगों के होने की बात कही गई है। इन युगों में से तीन युग सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग बीत चुके हैं और चौथा युग कलियुग चल रहा है। इन सभी युगों में से कलियुग को सबसे अधिक विनाशकारी बताया गया है। कलियुग में धरती पर हर जगह दुराचार, पाप, अधर्म, पाखंड आदि का बोलबाला होगा। श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि जब जब धरती पर पाप बढ़ेगा तब तब मैं धरती पर धर्म की स्थापना के लिए जन्म लूंगा। वेदों पुराणों में भी यह उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। इसलिए कलियुग में जब पाप और अधर्म अपनी चरम सीमा पर होंगे, तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार में जन्म लेंगे और धरती पर बढ़ते पापों का अंत करेंगे। श्रीमद्भगवद गीता में बताया गया है कि कल्कि अवतार भगवान विष्णु का 10वां अवतार होगा। तो चलिए जानते हैं भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़ी रोचक जानकारी।
भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का जन्म

पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि श्रीमद्भागवद गीता के 12वें स्कंद के 24वें श्लोक में वर्णन है कि भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का जन्म विशेष और शुभ ग्रह नक्षत्रों की स्थिति में होगा। श्रीमद्भागवद गीता के अनुसार, सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को जब सूर्य, चंद्रमा और गुरु ग्रह एक साथ पुष्य नक्षत्र में आयेंगे तब भगवान कल्कि का जन्म होगा। इसी कारण सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को कल्कि जयंती के रूप में मनाया जाता है। सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में अब तक भगवान विष्णु मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन, परशुराम, श्रीराम और श्रीकृष्ण रूप में जन्म ले चुके हैं और कलियुग में अपने काल रूप कल्कि में जन्म लेंगे।
भगवान कल्कि के पिता वेदों पुराणों के ज्ञाता विष्णुयश और माता सुमति होंगे। भगवान कल्कि के परिवार में उनके तीन बड़े भाई सुमंत, प्राज्ञ और कवि होंगे। भगवान कल्कि के गुरु परशुराम होंगे और परशुराम के आशीर्वाद से ही कल्कि भगवान शिव की कठोर तपस्या कर दिव्य शक्तियों को प्राप्त करेंगे। भगवान कल्कि की दो पत्नियां होंगी जिनके नाम पद्मा और रमा होगा। भगवान कल्कि के जय, विजय, मेघवाल और बलाहक नाम के चार पुत्र होंगे। भगवान कल्कि का वाहन सफेद घोड़ा होगा।
कल्कि अवतार के जन्म का उद्देश्य

शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु के कल्कि अवतार के साथ ही कलियुग का अंत समय शुरू हो जाएगा और सतयुग की पुनर्स्थापना होगी। श्रीमद्भगवद गीता के अनुसार, कलियुग में अधर्म के कारण लोगों का एक दूसरे से विश्वाश उठ जाएगा और मन में एक दूसरे के प्रति द्वेष और हीन भावना बढ़ जाएगी। ऐसे में भगवान कल्कि के जन्म का मुख्य उद्देश्य होगा लोगों के मन में धर्म के प्रति आस्था बढ़ाना। भगवान कल्कि अपने उपदेश और ज्ञान से लोगों को आपस में सहयोग और प्रेम से रहना सिखाएंगे। धरती पर बढ़ रहे दुराचार और महिलाओं के प्रति अत्याचार को खत्म कर कल्कि अवतार लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे। कल्कि अवतार, धरती पर बढ़ रहे पाप को खत्म कर धरती पर संतुलन बनाकर लोगों के मन में भक्ति भाव बढ़ाएंगे।
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