Kalachi Jayanti: हिंदू धर्म शास्त्रों में भगवान विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख मिलता है। नौ अवतार पहले ही हो चुके हैं, और दसवें अवतार के रूप में भगवान कल्कि का जन्म बाकी है। कल्कि जयंती, भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार कल्कि जन्म का उत्सव है। यह हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।
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कब मनाते हैं?
कल्कि जयंती पांचवें महीने सावन की षष्ठी तिथि को हर साल मनाते हैं यह तिथि कलियुग के अंत का प्रतीक है। 2024 में, यह 10 अगस्त को मनाई गई थी।
सफेद घोड़े पर सवार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कल्कि कलयुग के अंत में सफेद घोड़े पर सवार होकर दुष्टों का संहार करेंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे।
इस दिन होगा जन्म
पौराणिक ग्रंथों, विशेष रूप से कल्कि पुराण के अनुसार, भगवान कल्कि का जन्म सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को संभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक एक ब्राह्मण परिवार में होगा।
कलयुग और सतयुग
पुराण के अनुसार, जब कलियुग अपने चरम पर होगा, पापाचार की सीमा पार हो जाएगी, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेंगे। यह कलयुग और सतयुग के बीच का संधिकाल होगा।
कलयुग का प्रथम चरण
कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व में माना जाता है, और वर्तमान में इसका प्रथम चरण चल रहा है। मान्यता है कि कलियुग की कुल अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष होगी। अभी तक 5126 वर्ष बीत चुके हैं, और 426875 वर्ष बाकी हैं। इस हिसाब से, भगवान विष्णु का कल्कि अवतार लेने में अभी करीब 426875 वर्ष बाकी हैं। यह दीर्घकाल है, लेकिन हिंदू धर्म में कल्कि अवतार की आस्था सदैव बनी रहेगी।
ये घटनाएं मिलेंगी देखने
संस्कारों में गिरावट, गुरु-शिष्य परंपरा का पतन, हिंसा और लूटपाट में वृद्धि, तथा धार्मिक मूल्यों का हास जैसी घटनाएं देखने को मिलेंगी। तब भगवान कल्कि अधर्म का नाश करने के लिए और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होंगे।
