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Study Pressure:  सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्‍चा पढ़ाई के साथ स्‍कूल और कॉलेज की सभी गतिविधियों में अच्‍छा प्रदर्शन करे। इसलिए पेरेंट्स अक्‍सर बच्‍चों को आगे बढ़ने और अच्‍छा परफॉर्म करने के लिए प्रोत्‍साहित करते रहते हैं। लेकिन कई बार पेरेंट्स बच्‍चों को दूसरों से आगे निकलने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेशराइज करते हैं यानी दबाव डालने लगते हैं। ऐसा करना न केवल बच्‍चे के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रभाव डालता है बल्कि शारीरिक रूप से भी उन्‍हें कमजोर बनाता है। इस स्थिति में बच्‍चा ठीक से परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाता, परिणामस्‍वरूप उसका रिजल्‍ट भी प्रभावित होने लगता है। हालांकि पेरेंट्स बच्‍चों पर जानबूझकर अपनी अपेक्षाओं का दबाव नहीं डालते, लेकिन अनजाने में ही सही बच्‍चे इस बात को गंभीरता से लेने लगते हैं और मनमुताबिक परिणाम न मिल पाने पर गलत कदम उठा लेते हैं। 

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बच्‍चों पर दबाव डालने से क्‍या होता है

Study Pressure
Study Pressure of Children

जब किसी चीज पर अतिरिक्‍त दबाव डाला जाएगा तो कभी न कभी वह कमजोर होकर टूट सकता है। ऐसा ही मनोदशा बच्‍चों की होती है। बच्‍चों का दिल, दिमाग और मन काफी कमजोर होता है, जिस पर दबाव डालने से वह चोटिल हो सकता है। पेरेंट्स द्वारा बच्‍चे को बार-बार याद दिलाना कि उन्‍हें अच्‍छा स्‍कोर करना है, दूसरों से आगे र‍हना है या फर्स्‍ट आना है, जैसे वाक्‍य मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रभाव डाल सकते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि आप बच्‍चे को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्‍साहित न करें बल्कि समझाइश देते वक्‍त बेहद सावधानियां बरतें। किसी भी प्रकार के गलत शब्‍दों का चयन न करें। जहां तक हो सके बच्‍चे को प्‍यार से समझाएं।   

क्‍या है बच्‍चे को प्रोत्‍साहित करने का सही तरीका

encourage a child
What is the right way to encourage a child

अच्‍छा स्‍कोर प्राप्‍त करने के लिए जरूरी नहीं है कि बच्‍चे पर दबाव डाला जाए। बच्‍चे को प्‍यार और उदाहरण देकर भी समझाया जा सकता है।

– सिर्फ स्‍कूल में बेहतर अंक प्राप्‍त करना ही पर्याप्‍त नहीं है। माता-पिता को स्‍कूली शिक्षा देने के साथ बच्‍चे के ओवरऑल विकास पर भी ध्‍यान देना चाहिए। बच्‍चों को बेहतर इंसान बनने के लिए भी प्रोत्‍साहित करना चाहिए। यदि पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्‍चा हर फील्‍ड में सफलता हासिल करे तो उन्‍हें प्‍यार से हैंडिल करें न कि गुस्‍से से।

– पेरेंट्स की तरह बच्‍चे को भी अच्‍छा स्कोर करना और रैंक प्राप्‍त करना अच्‍छा लगता है। लेकिन इसके लिए बच्‍चे पर दबाव डालना ठीक नहीं है। बच्‍चे को केवल ट्रॉफी प्राप्‍त करने के लिए प्रोत्‍साहित न करें बल्कि क्षमता के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए आगे बढ़ाएं।

– स्‍कूली शिक्षा के साथ बच्‍चों को नैतिक शिक्षा और मूल्‍यों के बारे में भी बताएं। पेरेंट्स अपने बच्‍चे में अच्‍छे संस्‍कार डालने का प्रयास करें। उन्‍हें सम्‍मान दिखाने, अच्‍छे व्‍यवहार करने और चीटिंग न करने की प्रेरणा दें। बच्‍चों को यदि बचपन से ही अच्‍छी शिक्षा और संस्‍कार दिए जाएं तो वह पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। 

– जीतना, हारना, अच्‍छे अंक न लाना या फेल हो जाना एक सामान्‍य प्रक्रिया है, जिसका सामना हर किसी को करना पड़ता है। लेकिन अच्‍छा स्‍कोर न करने के लिए बच्‍चे की आलोचना करना ठीक नहीं है। इससे बच्‍चे के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। पेरेंट्स को इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि बच्‍चे की आलोचना करना उसे सफलता के रास्‍ते पर नहीं बल्कि डिप्रेशन की राह पर ढकेल सकता है।