शालिग्राम जी की पूजा करने से होगी भक्तों की मुराद पूरी
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, श्रीहरि का आशीर्वाद पाने के लिए शालिग्राम जी की पूजा करते समय हमेशा तुलसी पत्ते का उपयोग करना चाहिए।
Shaligram Importance: हिंदू धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि सृष्टि के आरंभ में त्रिदेव निराकार रूप में पूजनीय थे। ब्रह्मा जी का शंख रूप, भोलेनाथ का शिवलिंग रूप और श्रीहरि का शालिग्राम रूप त्रिदेवों का विग्रह रूप है। जिसका अर्थ है बिना शरीर के निराकार रूप में रहना। सनातन धर्म में भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर के रूप में बहुत पूजनीय है। देवी तुलसी का विवाह विष्णु रूप शालिग्राम जी के साथ ही हुआ, इसी कारण सनातन धर्म को मानने वाले सभी घरों में शालिग्राम जी की पूजा भी की जाती है। सच्ची भक्ति और विश्वास के साथ शालिग्राम जी की पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फलों के साथ सुख समृद्धि की प्राप्ती होती है। आज इस लेख में हम विष्णु रूप शालिग्राम जी से जुड़े कुछ रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य जानेंगे।
तुलसी देवी के श्राप से श्रीहरि बने शालिग्राम

पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि पद्मपुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, श्रीहरि ने जालंधर नाम के असुर से सृष्टि को बचाने के लिए जालंधर की धर्मपत्नी तुलसी देवी के पतिव्रता धर्म को नष्ट कर दिया। क्योंकि तुलसी देवी का पतिव्रता धर्म ही जालंधर का रक्षा कवच था। अपने साथ हुए छल और पति की मृत्यु के दुःख के कारण तुलसी देवी ने विष्णु जी को बिना हृदय वाले पत्थर में बदलने का श्राप दे दिया। लेकिन देवी लक्ष्मी जी के प्रार्थना करने पर तुलसी देवी ने विष्णु जी को श्राप मुक्त कर दिया और स्वयं जालंधर के मृत शरीर के साथ सती हो गई। तुलसी देवी की राख से एक पौधा निकला जिसे श्रीहरि ने वृंदा नाम दिया। भगवान विष्णु ने उस पौधे को आशीर्वाद दिया कि इसके बिना मेरी पूजा अधूरी मानी जाएगी। भविष्य में इस पत्थर की शिला में भी मेरा अंश रहेगा। तुलसी देवी के दूसरे जन्म में उनका विवाह विष्णु जी के शालिग्राम रूप से हुआ। इसी कारण आज भी कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को तुलसी- शालिग्राम जी का विवाह करवाया जाता है।
नारायणी नदी में मिलता है शालिग्राम पत्थर

विष्णु जी का शालिग्राम रूपी पत्थर नेपाल के दामोदर कुंड से निकलने वाली नारायणी (गण्डकी) नदी में मिलता है। इसी कारण शालिग्राम जी को गंडकी नंदन भी कहते हैं। नेपाल के मुक्तेश्वर में सालग्राम नाम के गांव में विष्णु जी के शालिग्राम रूप का एकमात्र मंदिर है। इस मंदिर में हिंदू धर्म के लोग पूरी भक्ति और विश्वास के साथ रोज शालिग्राम जी की पूजा करते हैं।
शालिग्राम पत्थर की विशेषताएं

पुराणों में 33 तरह के शालिग्राम पत्थरों की व्याख्या की गई है, जिनमें से 24 शालिग्राम पत्थरों को भगवान विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है। यह काले रंग के चिकने और सुंदर पत्थर होते हैं। यदि शालिग्राम पत्थर गोल है तो वह विष्णु जी का गोपाल रूप है। मछली के आकार का लंबा शालिग्राम पत्थर विष्णु जी का मत्स्य अवतार होता है। जबकि, कछुए के आकार के शालिग्राम पत्थर को विष्णु जी का कूर्म अवतार माना जाता है।
शालिग्राम जी की पूजा करने के लाभ

शास्त्रों में बताया गया है कि श्रीहरि का आशीर्वाद पाने के लिए शालिग्राम जी की पूजा करते समय हमेशा तुलसी पत्ते का उपयोग करना चाहिए। तुलसी और शालिग्राम की पूजा साथ में करने से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। शालिग्राम की पूजा करने से घर में मां लक्ष्मी निवास करती हैं। इसके साथ ही कार्तिक महीने की देवउठनी एकादशी को तुलसी-शालिग्राम जी का विवाह करवाने से व्यक्ति को सभी तरह के रोगों और दुखों से मुक्ति मिलती है। घर में शालिग्राम जी की स्थापना करने से घर से वास्तुदोष खत्म हो जाते हैं। शालिग्राम जी के अभिषेक किए हुए जल को स्वयं पर छिड़कने से तीर्थों के स्नान जैसा पुण्य मिलता है।
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