Baidyanath Jyotirlinga: ज्योतिर्लिंग ज्योति और लिंग शब्दों से मिलकर बना एक पवित्र शब्द है। यह शब्द भगवान विष्णु के स्वयंभू रूप को दर्शाता है, जो स्वयं प्रकाश के स्तंभ के रूप में प्रकट हुए हैं। हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंगों को सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पापों का नाश हो जाता है। ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के सर्वोच्च स्वरूपों में से एक माने जाते हैं और भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
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बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है बैघनाथ ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के अखंड और ज्योतिर्मय स्वरूप का प्रतीक है। यह पवित्र तीर्थ स्थल झारखंड के देवघर में स्थित है। बैघनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक बेहद रोचक कथा प्रसिद्ध है। रावण और भगवान शिव के बीच का संबंध इस कथा से जुड़ा हुआ है। यह ज्योतिर्लिंग भारत की समृद्ध संस्कृति और धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र भी है। चलिए इस लेख में बैघनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में विस्तार से जानते हैं।
बैद्यनाथ धाम
भारत के झारखंड राज्य में स्थित देवघर शहर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है बाबा बैघनाथ धाम के कारण यह विश्व भर में प्रसिद्ध है। खासतौर पर श्रावण मास में यहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। बाबा बैघनाथ धाम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बल्कि यह भारत की समृद्धि सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। यहां की भव्य वास्तुकला और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के परम भक्त रावण ने कैलाश पर्वत पर घोर तपस्या की थी। रावण चाहता था कि भगवान शिव कैलाश छोड़कर लंका में रहे। रावण अपनी इस तपस्या के दौरान एक-एक कर अपने सर शिवलिंग पर चढ़ाने लगा। जैसे ही वह अपना दसवां सर काटने चला भगवान प्रकट हो गए और वरदान मांगने का मौका रावण को दिया। जब रावण ने भगवान शिव को लंका चलने की इच्छा जताई। भगवान शिव ने रावण की इस मनोकामना को स्वीकार किया लेकिन एक शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि अगर तुमने शिवलिंग को कहीं रास्ते में रख दिया तो तुम उसे दोबारा उठा नहीं पाओगे। शिवजी की इस बात को सुनकर सभी देवी देवता चौंक गए और चिंतित हो गए।
भगवान विष्णु ने कैसे रची बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की लीला
अपनी समस्या को लेकर सभी भगवान भगवान विष्णु के पास पहुंचे। इसके बाद भगवान विष्णु ने समस्या का समाधान ढूंढने के लिए एक लीला रची। भगवान विष्णु ने वरुण देव को आदेश दिया कि वह रावण के पेट में जाकर उसे लघु शंका की आवश्यकता महसूस कराएं। जब रावण को ऐसा महसूस हुआ तो उसने रास्ते में बैजू नाम के ग्वाले को शिवलिंग पकड़ा दिया और लघुशंका के लिए चला गया। भगवान विष्णु ने बैजू रूप धारण कर शिवलिंग को वहीं स्थापित कर दिया जो आज बाबा बैघ नाथ के रूप में प्रसिद्ध है। यह स्थान विशेष इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान है जिससे उसे शक्तिपीठ और हृदय पीठ भी कहा जाता है। जो भी भक्त यहां दर्शन के लिए जाते हैं उन्हें शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व और आस्था
इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यह माना जाता है कि यहां दर्शन मात्र से ही सभी पाप धुल जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बाबा बैजनाथ को रोग नाशक और मोक्ष डाटा भी माना जाता है। इसके अलावा यह ज्योतिर्लिंग ग्रहों की शांति और अखंड सौभाग्य के लिए भी पूजा जाता है वैवाहिक जीवन में सुख समृद्धि के लिए यहां भक्ति आस्था के साथ आते हैं।
