googlenews
प्रदोष व्रत कब से शुरू करें

भगवान शिव को यह व्रत परम प्रिय है इसलिये इस व्रत में शिवजी की उपासना की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष के समय महादेव जी कैलाश पर्वत के रजत भवन में इस समय नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं। प्रदोष व्रत को करने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है।

क्या है  प्रदोष व्रत?

प्रदोष काल में किये जाने वाले नियम, व्रत एवं अनुष्ठान को प्रदोष व्रत या अनुष्ठान कहा गया है। व्रतराज नामक ग्रन्थ में सूर्यास्त से तीन घंटे पूर्व के समय को प्रदोष का समय माना गया है। अर्थात् सूर्यास्त से सवा घण्टा पूर्व के समय को प्रदोष काल कहा गया है। इसका मतलब सायंकालीन त्रयोदशी तिथि को किया जाने वाला व्रत प्रदोष व्रत कहलाता है।

प्रदोष व्रत की महिमा

प्रदोष व्रत रखना बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है एवं मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत रखने और दो गायों का दान करने से भी यही सिद्धी प्राप्त होती है। उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। इस प्रदोष व्रत को करने के लिए व्यक्ति के लिए त्रयोदशी के दिन सूर्य उदय से पूर्व उठना चाहिए। 

कैसे रखें व्रत?

इस व्रत में व्रती को निर्जल रहकर व्रत रखना होता है। पूजन स्थल को गंगाजल और गाय के गोबर से लीपकर मंडप तैयार करना चाहिए। इस मंडप पर पांच रंगों से रंगोली बनानी चाहिए। पूजा करने के कुश के आसन का प्रयोग करना चाहिए। प्रात: काल स्नान करके भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल अक्षत धूप दीप सहित पूजा करें। संध्या काल में पुन: स्नान करके इसी प्रकार से शिव जी की पूजा करनी चाहिए। इस प्रकार प्रदोष व्रत करने से व्रती को पुण्य मिलता है। यह व्रत अति कल्याणकारी है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति होगी।

व्रत से मिलने वाले लाभ

  • रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत से आयु वृद्धि तथा अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है। 
  • सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर किया जाने वाला व्रत आरोग्य प्रदान करता है और इंसान की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। 
  • मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत हो तो उस दिन के व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। 
  • बुधवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो, उपासक की सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। 
  • गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़े तो इस दिन के व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है। 
  • शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है।
  • शनिवार संतान प्राप्ति की कामना हो तो शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए।
  • अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किए जाते हैं तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृद्घि होती है।  

यह भी पढ़ें –आम की गुठली के इतने हेल्थ बेनेफिट्स कि जानकर आप चौंक जाएंगे

धर्म -अध्यात्म सम्बन्धी यह आलेख आपको कैसा लगा ?  अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही  धर्म -अध्यात्म से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें-editor@grehlakshmi.com