वरुथिनी एकादशी का महत्व सालभर में पड़ने वाली सभी एकादशियों से बढ़कर है। सुख और सौभाग्य का प्रतीक यह एकादशी व्रत 12 अप्रैल को है। कहा जाता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने वालों को कन्या दान और अन्न दान के बराबर फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई अभागिनी स्त्री इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करे तो उसको सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

 

व्रत की पूरी विधि

शास्त्रों के अनुसार उपवासक को दशमी तिथि से ही एकादशी व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। एकादशी से एक दिन पहले इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए-

 

  • खाने में मटर, उड़द व लाल मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए।
  • धातु की प्लेट पर खाना नहीं कहना चाहिए।
  • शहद का सेवन ना करें।
  • किसी अन्य व्यक्ति के घर में खाना नहीं खाना चाहिए।
  • एक बार से अधिक खाने से बचे।
  • मांस का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • चना नहीं खाना चाहिए।
  • किसी भी तरह की सेक्स क्रियाएं ना करें।

 

क्या करें व क्या न करें व्रत के दिन

वरुथिनी एकादशी करने वाले व्यक्ति को उस दिन शयन के लिये जमीन का और दातुन का प्रयोग करना चाहिए। सुबह उठकर, नित्य क्रियाओं से मुक्त होकर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन क्रोध, परनिंदा और असत्य बोलने से बचना चाहिए। इसके आलावा व्रत में तेल युक्त भोजन भी नहीं करना चाहिए।

 

विशेष फल के लिए ये करें

  • सुख प्राप्ति के लिए श्री नाराय़ण के चित्र पर सिंदूर चढ़ाएं।
  • धन प्राप्ति के लिए श्री भगवान मधुसूदन के चित्र पर कमल गट्टे चढ़ाएं।
  • पराक्रम बढ़ाने के लिए श्री हरि के चित्र पर तुलसी पत्र चढ़ाएं।
  • व्यवसायिक सफलता के लिए श्री कृष्ण भगवान पर नीले फूल चढ़ाएं।
  • गृह क्लेश से मुक्ति पाने के लिए श्री बाल गोपाल को दही का भोग लगाएं।
  • रोग मुक्ति के लिए श्री हरि पर मूंग चढ़ाएं।
  • हानि से बचने के लिए भगवान विष्णु के चित्र पर पीले रंग के फूल चढ़ाएं।
  • प्रेम में सफलता के लिए श्री राधा-कृष्ण पर रोली चढ़ाएं।
  • सुखी दांपत्य जीवन के लिए लक्ष्मी-नारायण भगवान पर अबीर चढ़ाएं।
  • सौभाग्य प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु के चित्र पर हल्दी चढ़ाएं।
  • लाभ प्रप्ति के लिए श्री नारायण पर लोबान से धूप करें।
  • दुर्घटनाओं से बचने के लिए भगवान बांके बिहारी पर लाल चंदन चढ़ाएं।