जीवन में माता-पिता, भाई बहन जैसे अधिकांश रिश्ते व्यक्ति को जन्म के साथ मिल जाते हैं, वहीं जीवनसाथी और ससुराल पक्ष भी घर-परिवार और रिश्तेदारों के द्वारा ढूंढ़ दिया जाता है। सिर्फ एक ऐसा रिश्ता है, जो व्यक्ति स्वयं बनाता है वो ही मित्रता का और महत्वपूर्ण बात ये है कि इस रिश्ते पर काफी हद तक व्यक्ति का जीवन और सफलता निर्धारित होती है। अगर व्यक्ति को अच्छे और सच्चे मित्र मिल जाए तो जीवन आसान और खुशहाल हो जाता है। लेकिन सवाल ये है कि सच्चे मित्र की पहचान कैसे की जाए? तो इसके लिए चाणक्य की नीति आपके बेहद काम आ सकती है।
दरअसल, चाणक्य प्राचीन भारत के महान विद्वान और राजनीतिज्ञ थें, जिन्होने अपनी नीतियों के जरिए राजा से लेकर आम जनता का मार्गदर्शन किया। चाणक्य ने व्यक्ति के दैनिक जीवन से लेकर उसके आचार-विचार हर चीज के लिए आदर्श प्रस्तुत किया है। चाणक्य की ये नीतियां आज के समय में भी पुरूष और महिला दोनों के लिए बेहद उपयोगी है, अगर इनका पालन किया जाए तो दुनियादारी की समस्याओं से बच सकते हैं। जैसे कि चाणक्य ने आदर्श मित्र की पहचान बताते हुए है… आपत्सु स्नेहसंयुक्तं मित्रम्।
यानि कि विपत्ति के समय में भी स्नेह भाव रखने वाला व्यक्ति ही सच्चा मित्र होता है। चाणक्य का कहना है कि सच्चे मित्र की पहचान मुश्किल समय में ही होती है और ये बात आज के समय काफी हद तक लागू होती है। क्योंकि आजकल जब तक आपके हालात ठीक रहते हैं, लोग साथ रहते हैं और जैसे ही आप किसी मुश्किल परिस्थिति में आते हैं, लोग आपका साथ छोड़ देते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को कभी मित्र न बनाए जो परिस्थितयों को देख मित्रता जैसे सम्बंध बनाते है और मुश्किल में साथ नहीं निभाते हैं और जो व्यक्ति मुश्किल में साथ निभाते हो, उसका साथ खुद कभी न छोड़े।
