ग्रीक और रोमन पुराण में भी भारत की पुराण कथाओं के समान नौ देवियों की मान्यता है। ये नौ देवियां, सहित्य, संस्कृति एवं कला की प्रेरणा एवं प्रोत्साहन देने वाली देवियां मानी जाती है। शताब्दियों तक मौखिक काव्य संवाद एवं पुराण कथाओं को अपने ज्ञान कोष में संकलित रखने का कार्य इन्हीं देवियों का रहा है।
वास्तव में ये नौ देवियां ज्ञान और कला मानवीकरण विशेषकर साहित्य, नृत्य और संगीत का मानवीयकरण है। इन्हें जेयस और नेमोसाइज की पुत्री माना जाता है। जेयस आकाश, रौशनी, तूफान, कानून एवं व्यवस्था तथा न्याय का ग्रीक का देवता है। जबकि नेमोसाइन स्मृति की ग्रीक देवी है।
इन नौ देवियों के नाम इस प्रकार हैं-
क्लीओ, थालिया, इरेटो, यूटेरपी पोलिन्मिआं, कैलिओपी, टर्पसीकोर, येरेनिया, ओर मेल पोमेनी । इनमें से प्रत्येक देवी कला विज्ञान एवं संगीत के विशिष्ट रूप की संरक्षक मानी जाती है। इनका विस्तार इस प्रकार है-
1. क्लीओ-
इतिहास एवं लेखन की देवी। इन्हें पुरातन कथायें सुनाने में आनन्द मिलता है। ग्रीक संदर्भो में इतिहास का अर्थ है। वीरता के कार्यों का विवरण। प्राचीन ग्रीक-ड्रामा में तीन प्रकार के प्ले होते थे सुखान्त, दुखान्त और व्यंग्यप्रधान। ये किम्बन्दन्तियों एवं वास्तविक इतिहास प्रसिद्ध नायकों पर आधारित होते थे। इनका प्रतीक (लपेटी चरखी) था।
2. थालिया-
वह देवी थी जो हास्य एवं चरवाहों की प्रतीक कविताओं की संरक्षक मानी गयी। इनका प्रतीक चिन्ह मुखौटा था।
3. इरेटो-
इरेटो एक सुन्दर, प्यार करने वाली और वासना प्रधान स्वभाव की देवी थी जो प्रेम गीतों और कविताअें की संरक्षक मानी गयी है। अक्सर उसे इरोज देवता (काम का प्रतीक) के साथ दिखाया गया इनका प्रतीक सिथारा नामक प्राचीन ग्रीक वाद्ययंत्र था।
4. यूटेरपी-
संगीत की संरक्षक देवी मानी गयी इनका प्रतीक आलोस नामक प्राचीन वाद्य यंत्र था।
5. कैलिओपी-
महाकाव्य की संरक्षक देवी मानी गयी। उसे सभी अन्य देवियों की तुलना में अधिक प्रतिभाशाली और बुद्धिमान तथा प्रसिद्ध रचनाकर होमर की प्रेरणा माना गया है। इनका प्रतीक लिखने की मेज थी।
6. टर्पसीकोर-
यह एक बेहद खूबसूरत देवी थी यह देवी नृत्य संगीत एवं कला के लिए प्रसिद्ध थीं.
7. यूरेनियां-
इसे दार्शनिक देवी की संज्ञा दी गई। ये खगोल शास्त्र तथा तारामंडल समूह की सरंक्षक माना गया। इनका प्रतीक ग्लोब एवं कम्पास था।
8. मेलपोमेनी-
वह देवी थी जिसने सबसे पहले गीत का प्रतिनिधित्व किया और बाद में टे्र्जडी (दुखान्त) की सरंक्षक बन गयी थी इनका प्रतीक दुःख प्रकट करता मुखौटा था।
9. पोलनियां–
पोलिनियां एक गम्भीर देवी थी, जो धार्मिक गीत, प्रार्थनाएं एवं पवित्र नृत्यों की संरक्षक थी। ग्रीक विश्वासों के अनुसार इन देवियों की प्रार्थना एवं इन्हें जाग्रत करने की परम्परा भी थी। अपनी कला संगीत एवं नृत्य के उन्नयन हेतु रहते थे।
इन नौ देवियों के सम्मान में हर 5 वर्ष में एक बार एक प्राचीन उत्सव मनाने की परम्परा भी थी। इस उत्सव को मौसिया उत्सव कहा जाता था। इस उत्सव में खेल एवं संगीत की विभिन्न प्रतियोगितायें आयोजित करने एवं सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत करने की परम्परा भी थी।
