स्कूल-कॉलेज बंद होने से बच्चों की पढ़ाई पर, ऑफिस-उद्योग बंद होने से देश की प्रगति पर, फेरीवालों से लेकर दुकानदारों तक सभी को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है । बेशक अब धीरे-धीरे ज़िंदगी सामान्य हो रही है, सभी अपनी सुरक्षा अपने हाथ वाले फॉर्मूले को अपना कर खुद को व्यवस्थित करने का प्रयत्न कर रहे हैं ।
कोरोना के असर से विवाह भी अछूते नहीं रहे हैं । इन दिनों में जिन घरों में विवाह होने निश्चित हुए हैं, उन्हें आर्थिक नुक्सान के इलावा और कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । सब को पता है कि जब भी विवाह निश्चित होता है तो उसके लिए बुकिंग पहले ही करवानी पड़ती है फिर वो चाहे होटल हो या वेडिंग प्लानर, हलवाई हो या कैटरिंग और फिर धनराशि भी एडवांस में ही देनी पड़ती है । कोरोना के आने से चाहे हमारे लिए बुरा हुआ हो, लेकिन अच्छी बात यह हुई कि हमने पिछले दिनों में ये जाना है कि हम विपरीत परिस्तिथियों में लड़ने में सक्षम हैं । इस महामारी के चलते होने वाली शादियों को लेकर हमारी सरकार ने नए नियम बना दिए हैं लेकिन हमें भी कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए ।
• अक्सर संयुक्त परिवारों में विवाह समारोह होने पर हर कोई चाहता है कि वो इस शादी का हिस्सा बने लेकिन यह भी सच है कि कुछ रस्मों को निभाने के लिए दो-चार रिश्तेदारों कि ज़रूरत होती ही है । कोशिश करें कि कुल मिलाकर १०-१२ से अधिक नज़दीकी रिश्तेदार ना हो । अपने रिश्तेदारों से प्यार से निवेदन करें कि कोरोना के कारण उनकी सुरक्षा हेतु आप उन्हें निमंत्रित करने में असमर्थ हैं । विवाह-स्थल पर कम-से-कम ३-४ फुट कि दूरी बनाकर रखें । अगर गाड़ी में जा रहें हैं तो साफ़-सफाई करवाने के पश्चात ही सफर करें । ध्यान रखें कि अधिकतम संख्या ४ लोग हो और सभी के लिए मास्क पहना होना अनिवार्य है ।
• शादी में खाने-पीने का प्रबंध सबसे महत्वपूर्ण है, ऐसे में घर में ही कुक या हलवाई को बुला लें और उसी से बारात के लिए ज़रूरत के अनुसार एक वक़्त का खाना व थोड़ी सी मिठाई बनवा लें । जब खाना परोसें तब भी नियमित दूरी बनाकर रखें ।
• विवाह चाहे घर में हो या धार्मिक स्थल पर, सादगी से सभी रस्मों का निर्वाह करें । दूल्हा-दुलहन भी अपने पहरावे को सादा रखें । इस दिन को लेकर दूल्हा-दुल्हन ने कई सपने बुने होते हैं लेकिन परिस्थितियों को मद्देनज़र रखते हुए फैसले करने पड़ते हैं ।
• यह बहुत ज़रूरी होगा कि समय के अनुसार सभी रस्में निभाई जाएं । सभी समय पर ही विवाह में आएं और प्रस्थान भी करें । अगर आवश्यकता ना हो तो रात्रि निवास करने से परहेज़ करें ।
फायदे और नुक्सान
इस समय में हमें कईं तरह कि शादियां देखने को मिलीं जो बड़े अलग ढंग से सम्पन्न हुईं । सादगी से शादी करने के फायदे अधिक और नुक्सान कम हुए हैं । सबसे बड़ा फायदा हुआ व्यर्थ के खर्चों और दिखावे से बचाव जिससे समय और धन दोनों कि बचत हुई । यही धनराशि भविष्य में उपयोग में लायी जा सकती है । सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मेहमानों द्वारा किये जाने वाले नखरों और व्यर्थ विवादों से दूर रहेंगे । नुक्सान ये हुआ कि शादी धूमधाम से मनाने को नहीं मिलेगी और रिश्तेदारों को ना बुलाने से उनकी नाराज़गी का सामना करना पड़ सकता है । आप चाहे तो ४-५ पारिवारिक सदस्यों के साथ दुल्हन को चुनरी चढ़ा कर भी ला सकते हैं जो कि समाज के लिए एक मिसाल बन सकती है ।
कुछ भी हो, वक़्त हमें सीखा रहा है कि हम अनजाने में या जान-बूझकर अनावश्यक चीज़ों के गुलाम बन रहें हैं अतः ज़रूरी है कि हम सादगी से अपना जीवन जीते हुए आगे बढ़ें ।
