amrit varsha

 

पूर्णिमा यूं तो हर महीने आती है लेकिन अश्विन मास में आने वाली शरद पूर्णिमा का महत्व इन सभी से कई ज्यादा है। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है। कहते हैं इस दिन चंद्रमा से अमृत वर्षा होती है और यही नहीं उस दिन खुले आसमान के नीचे रखी गई खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में खाने से शरीर निरोग रहता है। साथ ही लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होकर धन-दौलत के भंडार का आशीर्वाद देती हैं। इस बार शरद पूर्णिमा 5 अक्टूबर को पड़ रही है।

 
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं,’पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।’
अर्थात रसस्वरूप अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं। 
 
 
इस दिन से होता है मौसम में बदलाव –
 
शरद पूर्णिमा की रात से मौसम में बदलाव आने लगता है। इस समय से शीत ऋतु का आगमन होता हैं। मौसम गर्मी से ठंडी की तरफ बढ़ जाता है इसीलिए खीर खायी जाती हैं। 

 
अगले दिन करें खीर का सेवन –
 
शरद पूर्णिमा को देसी गाय के दूध में चीनी चावल डालकर पकाएं और खीर बना लेंI खीर में ऊपर से शहद और तुलसी पत्र मिला दें, साथ ही मेवा भी। अब इस खीर को तांबे के साफ बर्तन में रात भर पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे ऊपर से जालीनुमा ढक्कन से ढक कर छोड़ दें और अपने घर की छत पर बैठ कर चंद्रमा को अर्घ देकर,अब इस खीर को रात्रि जागरण कर प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में प्रसाद के रूप में ग्रहण करें I 
 
वैज्ञानिकों की नजर से –
 
वैज्ञानिक भी मानना हैं की शरद पूर्णिमा की रात स्वास्थ्य व सकारात्मकता देने वाली मानी जाती है क्योंकि चंद्रमा धरती के बहुत समीप होता है। चन्द्रमा की किरणों में खास तरह के लवण व विटामिन आ जाते हैं। पृथ्वी के पास होने पर इसकी किरणें सीधे जब खाद्य पदार्थों पर पड़ती हैं तो तो वो लाभदायक औषधी बन जाती है। माना जाता है की इससे रोग मुक्त‌ि होती है और उम्र लंबी होती है। 
 
धर्म ग्रंथों के अनुसार – 
 
माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन श्री कृष्ण गोपियों के साथ रास लीला भी करते है। साथ ही माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात के समय भ्रमण में निकलती है यह जानने के लिए कि कौन जाग रहा है और कौन सो रहा है। उसी के अनुसार मां लक्ष्मी उनके घर पर ठहरती है। इसीलिए इस दिन सभी लोग जगते है । जिससे कि मां की कृपा उनपर बरसे और उनके घर से कभी भी लक्ष्मी न जाएं। 

 

 

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