lakshmi
lakshmi

Summary: धनतेरस पूजन गाइड: मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की कृपा पाने का सही तरीका

धनतेरस सिर्फ खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि लक्ष्मी-कुबेर पूजन से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने का शुभ अवसर है। सही मंत्र, भाव और पूजन विधि से यह दिन आपके जीवन में स्थायी शुभता का संदेश लाता है।

Dhanteras Lakshmi Kuber Puja: धनतेरस दीपावली पर्व की शुरुआत का पहला दिन होता है एक ऐसा दिन जब मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा से घर में धन, समृद्धि और शुभ ऊर्जा का आगमन होता है। ‘धन’ का अर्थ सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि जीवन की सम्पन्नता, सुख और सकारात्मकता भी है। लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि पूजन के दौरान क्या बोलें और क्या करें, जिससे पूजा अधिक फलदायी हो सके।

धनतेरस की शाम को सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में पूजा की जाती है। इससे पहले कुछ जरूरी तैयारी करें

घर की सफाई करें और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं।

पूजन स्थल को उत्तर या पूर्व दिशा में स्थापित करें।

लक्ष्मी-कुबेर की मूर्तियाँ या चित्र को एक साफ चौकी पर लाल कपड़े पर रखें।

घी या तेल का दीप जलाएं।

पास में चांदी या तांबे के बर्तन में जल, फूल, चावल, सुपारी, मिठाई और नए सिक्के रखें।

पूजा का मूल भाव होता है श्रद्धा और कृतज्ञता। मंत्र उच्चारण करते समय मन को एकाग्र रखें और ईमानदारी से प्रार्थना करें।

मां लक्ष्मी का आह्वान मंत्र:

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
यह मंत्र समृद्धि, सौभाग्य और धनवृद्धि का प्रतीक है। इसे दीप जलाने से पहले तीन बार बोलें।

भगवान कुबेर का मंत्र:

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनं मे देहि दापय स्वाहा।
यह मंत्र घर में स्थायी धन और स्थिरता का आशीर्वाद लाता है।

लक्ष्मी-कुबेर संयुक्त स्तुति:

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्मीकुबेराभ्यां नमः।
इसे 11 या 21 बार जपने से घर में समृद्धि का संचार होता है।

पूजन के समय “हे मां लक्ष्मी, हे धनपति कुबेर, हमारे घर में धन, स्वास्थ्य और शांति बनाए रखें” जैसी सकारात्मक प्रार्थना भी करें।

लक्ष्मी-कुबेर पूजन आरंभ करने से पहले सबसे पहले दीप प्रज्वलित करें और भगवान गणेश का आह्वान करें, क्योंकि बिना गणेश जी की पूजा के कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं माना जाता।

lakshmi-Ganesh ji
lakshmi-Ganesh ji

इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्तियों को स्वच्छ जल से स्नान कराएं और फिर चंदन, फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। कुबेर देवता को धन के प्रतीक के रूप में चांदी के सिक्के या रुपये अर्पित करना शुभ माना जाता है।

अब मां लक्ष्मी के चरणों में कमल का फूल या गुलाबी फूल अर्पित करें, जो समृद्धि और सौंदर्य का प्रतीक है। इसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य समर्पित करें। अंत में आरती करें  पहले गणेश जी की, फिर मां लक्ष्मी की और फिर भगवान कुबेर की। आरती के बाद शंख बजाना और परिवार सहित लक्ष्मी-कुबेर मंत्रों का उच्चारण करना पूजन को पूर्णता प्रदान करता है।

क्या करें:

  • पूजन के समय मन को शांत रखें, जल्दबाज़ी न करें।
  • “ओम” या मंत्रों के साथ धीरे-धीरे दीपक घुमाएं।
  • घर के सभी सदस्यों को पूजा में शामिल करें, खासकर बच्चों को भी।
  • पूजा के बाद थोड़ी मिठाई और प्रसाद बांटें।
  • पूजा खत्म होने के बाद नए सिक्के या नोट अपनी तिजोरी या पर्स में रखें।

क्या न करें:

  • झगड़ा, नकारात्मक बातें या ऊँची आवाज़ में बोलना।
  • पुराने टूटे हुए दीये या मूर्तियों का इस्तेमाल।
  • पूजा के तुरंत बाद घर से बाहर जाना।
  • धन का अपव्यय या दिखावा।

लक्ष्मी-कुबेर पूजन के बाद कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कर्म समृद्धि को स्थायी बनाए रखते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद दीपक को घर के मुख्य द्वार पर रखें, ताकि मां लक्ष्मी का प्रवेश घर में निरंतर बना रहे।

deepak
deepak

तिजोरी या धन स्थान में एक पान का पत्ता और चांदी का सिक्का रखना शुभ माना जाता है, यह धनवृद्धि और स्थिरता का प्रतीक है।

अगले दिन सुबह पूजा में जलाए गए दीपक का बचा हुआ तेल या घी घर के पौधों में डाल दें, इससे घर का सकारात्मक ऊर्जा चक्र बना रहता है। इसके साथ ही, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना न भूलें, क्योंकि सच्ची समृद्धि केवल पाने में नहीं, बल्कि देने में है। यही कर्म लक्ष्मी कृपा को स्थायी बनाते हैं और जीवन में संतुलन लाते हैं।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...