AI may read your mind
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Summary: MIT के भारतीय वैज्ञानिक का कमाल — दिमाग के विचार सीधे स्क्रीन पर!

अमेरिका के बोस्टन स्थित कंपनी AlterEgo ने ऐसा AI डिवाइस बनाया है जो इंसान के विचारों को सीधे कंप्यूटर पर लिख सकता है, बिना बोले या टाइप किए।

Mind Reading AI Device: अमेरिका के बोस्टन स्थित कंपनी AlterEgo ने एक ऐसा AI डिवाइस तैयार किया है जो आपके दिमाग में चल रहे विचारों को सीधे कंप्यूटर पर लिख सकता है। इसका मतलब है कि अगर आप किसी ऐसी जगह हैं जहां बोलना संभव नहीं, तो अब सिर्फ सोचने भर से आपकी बात स्क्रीन पर दिखाई देगी। यह तकनीक न सिर्फ संवाद का एक नया तरीका पेश करती है, बल्कि उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जिन्होंने किसी कारणवश अपनी आवाज़ खो दी है।

भारतीय वैज्ञानिक अर्णव कपूर का कमाल

इस अद्भुत डिवाइस के पीछे हैं भारतीय मूल के वैज्ञानिक अर्णव कपूर, जिन्होंने दुनिया को यह दिखाया कि “सोच” अब संवाद बन सकती है। अर्णव ने 2018 में MIT (Massachusetts Institute of Technology) में रहते हुए एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने कल्पना की थी कि ऐसा उपकरण बनाया जा सकता है जो बिना दिमाग में सेंसर लगाए, मनुष्य के ब्रेन सिग्नल्स को पढ़ सके। उन्होंने सवाल उठाया, “क्यों न हम अपनी सोच को सीधे मशीन तक पहुंचाएं, बिना बोले?” इस विचार पर उन्होंने लगातार मेहनत की, और 2019 में TED Talk के मंच पर इसका पहला प्रोटोटाइप पेश किया। वहां मौजूद लोग हैरान रह गए क्योंकि बिना आवाज़ निकले, केवल सोचने भर से स्क्रीन पर शब्द टाइप हो रहे थे।

आज 2025 में अर्णव कपूर की यह सोच हकीकत बन चुकी है। वे अब बोस्टन की कंपनी AlterEgo के CEO हैं और उनका AI डिवाइस सोशल मीडिया पर सनसनी बना हुआ है। हाल ही में उनका एक वीडियो एक्स (Twitter) पर वायरल हुआ, जिसमें यह तकनीक काम करती दिख रही थी।

Delhi-born MIT student Arnav Kapur developed a device helps you speak without words
Delhi-born MIT student Arnav Kapur developed a device helps you speak without words

कैसे दिखता है यह डिवाइस और कैसे काम करता है?

AlterEgo का यह AI डिवाइस दिखने में एक हल्का हेडसेट जैसा है, जिसे कान के पास पहना जाता है। इसे “Near-Telepathic Wearable Device” कहा जाता है — यानी एक ऐसा उपकरण जो लगभग टेलीपैथी जैसा काम करता है।

  • यह डिवाइस दिमाग में कुछ नहीं डालता।
  • यह चेहरे और गले की सूक्ष्म मांसपेशियों से निकलने वाले सिग्नल्स को पढ़ता है।
  • जब आप मन ही मन कोई शब्द सोचते हैं या बोलने की कोशिश करते हैं, तो चेहरे की मांसपेशियाँ हल्के-से हिलती हैं।
  • ये माइक्रो मूवमेंट्स Electromyography (EMG) तकनीक से कैप्चर किए जाते हैं।
  • फिर AI उन सिग्नल्स को डिकोड करके टेक्स्ट या कंप्यूटर कमांड में बदल देता है।

अर्णव कपूर का कहना है कि यह डिवाइस विचारों को उसी स्पीड पर लिखता है, जिस तेजी से आप टाइपिंग करते हैं। इससे आप बिना बोले नोट्स लिख सकते हैं, AI से सवाल पूछ सकते हैं या किसी दोस्त को संदेश भेज सकते हैं।

जिनकी आवाज खो गई, उनके लिए नयी उम्मीद

यह तकनीक उन लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं, जिन्होंने बीमारी या दुर्घटना के कारण बोलने की क्षमता खो दी है। अब वे केवल सोचकर अपनी बात कंप्यूटर पर टाइप कर सकेंगे, अपने परिवार या डॉक्टर से संवाद कर पाएंगे।

यह डिवाइस न केवल मेडिकल उपयोग के लिए, बल्कि उन पेशेवर परिस्थितियों में भी बेहद उपयोगी है जहाँ शोरगुल या आवाज़ की सीमाएँ होती हैं जैसे मीटिंग्स, प्रयोगशालाएं या कंट्रोल रूम।

बोस्टन के वैज्ञानिक अर्णव कपूर का यह AI डिवाइस न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि इंसान और मशीन के रिश्ते में एक नई क्रांति है।

अभिलाषा सक्सेना चक्रवर्ती पिछले 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में दक्षता रखने वाली अभिलाषा ने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान टाइम्स, भोपाल से की थी। डीएनए, नईदुनिया, फर्स्ट इंडिया,...