Agumbe 3 Day Travel Itinerary
Agumbe 3 Day Travel Itinerary

अगुम्बे की ख़ास बात

यह छोटा-सा गांव पश्चिमी घाटों में बसा है और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। घने जंगल, झरने और दुर्लभ वन्यजीव इसे प्रकृति प्रेमियों और साहसिक यात्रियों के लिए स्वर्ग बनाते हैं।

Agumbe Itinerary: कर्नाटका के शिमोगा जिले में स्थित अगुम्बे अपनी हरियाली और भारी वर्षा के लिए प्रसिद्ध है। इसे अक्सर दक्षिण भारत का चेरापूंजी कहा जाता है क्योंकि यहाँ साल भर में बहुत अधिक बारिश होती है। यह छोटा-सा गांव पश्चिमी घाटों में बसा है और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। घने जंगल, झरने और दुर्लभ वन्यजीव इसे प्रकृति प्रेमियों और साहसिक यात्रियों के लिए स्वर्ग बनाते हैं। आइए जानते हैं कि अगुम्बे को तीन दिन में कैसे घूमा जाए और यह जगह क्यों ख़ास है।

अगुम्बे न केवल अपनी बारिश और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है बल्कि यह जैव विविधता की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ के घने वर्षावन में दुर्लभ औषधीय पौधे और सर्पों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। पर्यावरण संरक्षण और रिसर्च का यहाँ गहरा रिश्ता है जो इसे बाकी पर्यटन स्थलों से अलग बनाता है। अगुम्बे की शांति, हरियाली और विविधता यात्रियों को सुकून और रोमांच दोनों का अनुभव कराती है।

Day 1: Nature and Waterfalls tour
Day 1: Nature and Waterfalls tour

अगुम्बे पहुँचने के बाद पहला दिन यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती में डूबने के लिए सबसे अच्छा है। आप अपनी यात्रा की शुरुआत अगुम्बे व्यू पॉइंट से कर सकते हैं जहाँ से सूरज ढलते समय का दृश्य अत्यंत मनोरम होता है। यहाँ से अरब सागर और पश्चिमी घाटों का अद्भुत नज़ारा दिखता है। इसके बाद आप ओनाके अब्बी वॉटरफॉल और जोगिगुंडी वॉटरफॉल जा सकते हैं। ये झरने मानसून के समय अपनी पूरी रौनक में होते हैं और यहाँ ट्रेकिंग करते हुए आप प्रकृति के और करीब आ जाते हैं। शाम को आप अगुम्बे के शांत वातावरण में विश्राम कर सकते हैं।

Day 2: Rainforest experience
Day 2: Rainforest experience

अगुम्बे हेरपेटोलॉजी रिसर्च स्टेशन भी यहाँ का एक प्रमुख आकर्षण है। यह स्टेशन सर्प विशेषज्ञ रोमुलस व्हिटेकर द्वारा स्थापित किया गया था और खासतौर पर किंग कोबरा की शोध के लिए प्रसिद्ध है। आप यहाँ जाकर सर्पों और अन्य वन्यजीवों के बारे में रोचक जानकारियाँ पा सकते हैं। इसके बाद आप कुडलु तीर्थ वॉटरफॉल की ओर रुख कर सकते हैं जो अगुम्बे से थोड़ी दूरी पर स्थित है लेकिन बेहद खूबसूरत है। यहाँ का रास्ता थोड़ा कठिन है लेकिन जो लोग ट्रेकिंग पसंद करते हैं उनके लिए यह एक यादगार अनुभव होगा।

तीसरा दिन: सांस्कृतिक और पारंपरिक अनुभव

Cultural and traditional
Day 3: Cultural and traditional experiences

तीसरे दिन आप अगुम्बे के स्थानीय जीवन और संस्कृति को करीब से देख सकते हैं। यहाँ की पारंपरिक मालगुडी डेज़ लोकेशन भी दर्शनीय है क्योंकि प्रसिद्ध लेखक आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित इस सीरियल की शूटिंग यहीं हुई थी। आप आसपास के गाँवों में जाकर स्थानीय व्यंजन जैसे रागी बॉल्स और कोकोनट करी का स्वाद ले सकते हैं। इसके अलावा अगुम्बे में मसाले और जड़ी-बूटियाँ खरीदना भी अच्छा विकल्प है। अगर समय हो तो आप श्रृंगेरी मंदिर भी घूम सकते हैं जो यहाँ से करीब 28 किमी दूर है और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...