1. धनतेरस- पांच त्योहारों की यह श्रृंखला प्रारम्भ होती है धनतेरस से। इसे लोग धन त्रियोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन भगवान धनवंतरि का जन्म दिवस होता है। इस दिन व्यापारी लोग अपना बही- खाता समाप्त कर के नया बही-खाता समाप्त कर के नया बही खाता प्रारम्भ करते हैं तथा उसकी पूजा करते हैं। कई स्थानों पर इस दिन नए बर्तन खरीदने का भी प्रचलन है।
2. छोटी दीवाली- इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था इस कारण से इस दिन को नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन को भी लोग दीपक जलाकर तथा पटाखे छोड़ कर मनाते हैं।
3. दीवाली- छोटी दिवाली के बाद मनाए जाने वाले त्योहार को बड़ी दीवाली या दीपावली के नाम से जाना जाता है। इसे मनाने के पीछे मान्यता यह है कि इसी दिन भगवान श्रीराम रावण का वध कर के अयोघ्या वापस आए थे तथा अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत के लिए घी के दिए जलाए थे तथा इस दिन लक्ष्मी पूजन के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस दिन ही माँ लक्ष्मी समुद्र मंथन द्वारा प्रकट हुई थी तथा इस दिन जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा से माँ की पूजा करता है उसे कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।

4. गोवर्धन पूजा- दीवाली के अगले दिन गोवर्धन मनाई जाती है इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र का घमंड तोडऩे के लिए अपनी कनिष्का उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर उसके नीचे ब्रजवासियों को शरण दी थी। इस दिन चित्रगुप्त महाराज की पूजा भी होती है तथा विश्वकर्मा जयंती भी मनाई जाती है।
5. भाई दूज- यह भाई-बहनों के प्यार को बढ़ाने का त्योहार है। इस दिन सभी बहने अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं व उनके लिए मंगलकामना करती हैं। इस बारे में मान्यता यह है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे यमुना ने यमराज को अपने हाथों से बनाकर उनको भोजन कराया तथा बहुत ही स्नेह से उनकी खातिरदारी की जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने यह वचन दिया कि आज के दिन जो भी भाई अपनी बहन को स्नेह से मिलेगा तथा उसके घर भोजन करेगा वह सदैव यम के भय से मुक्त रहेगा।
