Foodie: अगर आप अलग-अलग ज़ायकों का स्वाद चखना चाहती हैं, तो आपको किसी खास जगह जाने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकी भारत के हर कोने हर गली और हर नुक्कड़ पर आपको कुछ ऐसा मिलेगा, जिसका स्वाद आप सालों तक नहीं भुला पाएंगी। कई ज़ायकों और स्वाद से भरपूर इस देश में आज भी पकवानों को पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। फिर चाहे वो हैदराबादी बिरयानी हो, बिहार का लिट्टी चोखा या फिर पंजाब का मशहूर सरसों का साग और मक्की की रोटी। हर दिशा खुद में एक अलग स्वाद समेटे बैठी है। तो आइए आज आपको सैर कराते हैं देश की उन खास जगहों की जहां की रेसिपीज़ सैलानियों को बार-बार अपनी ओर खींचती है।
हैदराबाद की बिरयानी कहां पर खाएं

निजामों के शहर हैदराबाद की बात ही निराली है। यहां की इमारतों से लेकर खान-पान तक दुनियाभर में मशहूर है। लज़ीज खाने की बात करें, तो यहां की बिरयानी सबसे प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड में से एक है। चार मीनार से लेकर ताज फलकनुमा पैलेस तक, हर जगह आपको बिरयानी का स्वाद चखने को मिलेगा। दरअसल, हैदराबादी बिरयानी चावल से तैयार किया जाने वाला एक ज़ायकेदार व्यंजन है, जिसे चिकन या मीट के साथ पकाया जाता है और इसमें सटीक मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप खाने के शौकीन है और हैदराबाद घूमने के लिए जा रहे हैं, तो शहर के हर कोने में पाई जाने वाली बिरयानी का स्वाद चखना न भूलें।
इंदौर का पोहा जलेबी

अगर खान पान की बात आए और मध्यप्रदेश का जिक्र आए बगैर खत्म हो जाए, ऐसा मुमकिन नहीं है। जी हां पर्यटन स्थलों के अलावा मध्यप्रदेश का ज़ायका भी सबसे निराला है। यूं तो पोहा सभी जगह उपलब्ध रहता है। मगर इंदौर के पोहा जलेबी का नाश्ता हर तरफ मशहूर है। तली और भुनी मूंगफली, कच्चे प्याज, चटनी, कड़ी पत्ता और सेव डालकर तैयार किए जाने वाले पोहे की बात ही अलग है। इसके अलावा यहां जैसी रस्सेदार जलेबी का स्वाद भी आपको कही नहीं मिल पाएगा। यहां पोहा जलेबी गली-गली में बिकता है। सुबह की पहली किरण के साथ ही यहां पोहे जलेबी के छोटे से छोटे स्टॉल पर भी नाश्ते के लिए लंबी कतारें लगने लगती है। वहीं दूसरी ओर अन्य स्टॉल खाली नज़र आते हैं।
अमृतसरी कुल्चा या अंबरसरी कुल्चा

आध्यात्मिक नगरी अमृतसर के कण-कण में वीरता, पराक्रम और समृद्ध विरासत की खुशबू महकती है। यूं तो यहां की एतिहासिक इमारत और गुरूद्वारे पर्यटन के हिसाब से दुनियाभर में मशहूर है। मगर साथ ही यहां का अमृतसरी कुल्चा भी किसी मायने में कम नहीं है। यहां नाश्ते में आमतौर पर आपको अमृतसरी कुल्चा, मक्खन, प्याज की चटनी, चने की सब्जी और लस्सी का गिलास परोसा जाता है, जो शाम तक आपकी भूख को शांत रखने का काम करता है। कुल्चा मतलब भरवा रोटी, जिसे देसी घी लगाकर तंदूर में तैयार किया जाता है। अमृतसर में आपको कुल्चे की कई किस्में आसानी से मिल जाएंगी जैसे आलू वाला कुल्चा, गोभी वाला कुल्चा, ड्राई फ्रूट वाला कुलचा, पनीर वाला कुलचा मक्खन आदि। वैसे तो आलू का कुलचा देश में ज्यादातर जगहों पर मिलता है, लेकिन जो स्वाद और लज्ज़त अमृतसर में बने कुचले की है, वैसी कहीं और मिल पाना मुमकिन नहीं है।
जौनपुर की इमरती

कहा जाता है कि जौनपुर जैसी इमरती आपको चिराग लेकर ढूढ़ने से भी नहीं मिलेगी। लकड़ी की धीमी आंच पर देसी चीनी, देसी घी व उड़द की दाल की बेस पर विशेष विधि से बनाई जाने वाली इमरती अपने बेमिसाल ज़ायके के लिए हर ओर प्रसिद्ध है। देसी घी की इमरती के ऊपर रबड़ी की परत आपके जायके को और भी बढ़ा देती है। रबड़ी के साथ इस इमरती को खाते ही यह मुंह में घुल जाती है और स्वाद को दोगुना कर देती है। ये इमरती जितनी गर्मागर्म खाने में स्वादिष्ट होती है, उतनी ही ठंडी भी खाने में अच्छी लगती है। जौनपुर के हर बाज़ार में आपको इमरती मिल जाएगी, जिसका स्वाद बेहद निराला है।
बुलंदशहर की चटपटी टिक्की चाट

टिक्की चाट का नाम सुनते ही मुंह में पानी आना लाज़मी है और अगर बात बुलंदशहर की करें, तो क्या कहने। जी हां यहां की ज़ायकेदार टिक्की चाट आलू, ड्राइफ्रूट्स, चने की दाल, मसाले आदि के साथ तैयार की जाती है। बुलंदशहर की ये डिश लोगों को खूब पसंद की जाती है। इसके अलावा स्टाल पर बास्केट चाट, राज कचोड़ी, भल्ला पापड़ी, दही भल्ला और गोल गप्पे भी बेहद स्वादिष्ट होते हैं।
राजस्थान का दाल-बाटी चूरमा

दाल बाटी चूरमा राजस्थान का पारंपरिक व्यंजन है, जोकि पूरे भारत में उसके बढ़िया स्वाद के कारण लोकप्रिय है। तालाबों और सुन्दरतम महलों के इतिहास के अलावा राजस्थान का ज़ायका भी बहुत मशहूर हैं। राजस्थान का दाल बाटी चूरमा खाने पीने की चीजों के बीच अपनी अलग पहचान रखता है। हल्का मीठा चूरमा, तीखी दाल और तली हुई बाटी से भरपूर इस व्यंजन में घी का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा बाटी को गेहूं के आटे, सूजी, घी, बेसन, सौंफ और अजवाईन से तैयार किया जाता है। खासतौर से जोधपुर, जयपुर और जैसलमेर के शहर इस राजस्थानी पकवान के लिए प्रसिद्ध हैं। दाल, बाटी, चूरमा कई मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इस व्यंजन को दोपहर के खाने के तौर पर परोसा जाता है।
बिहारी लिट्टी चोखा

बिहार का जिक्र आते ही लिट्टी चोखे का स्वाद खुद ब खुद जुबां पर आ जाता है। आटे और सत्तू के मिश्रण से तैयार की जाने वाली लिट्टी को घी में डुबोकर बैगन की चटनी यानी चोखे के साथ परोसा जाता है। इसे बनाने में सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसके स्वाद को दोगुना कर देता है। इस पारंपरिक व्यंजन को लोग खूब चाव से खाते हैं।
