जम्मू और दिल्ली में पली बढ़ी रेनु कौल वर्मा ने अपने करियर की शुरूआत एक जर्नलिस्ट के तौर पर की थी। इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दुस्तान टाइम्स जैसे समूहों के साथ काम करने के बाद लाइफ में एक ऐसा समय आया जब उन्होंने कुछ अलग करने की सोची। ये समय था जब उनकी लाइफ में मातृत्व का सुख दूसरी बार आ रहा था और इस बार वो दोनों बच्चों के साथ इन पलों को एंजॉय करना चाहती थीं। तो उन्होंने घर पर ही रहते हुए कुछ करने का मन बनाया और यही से हुई वितस्ता की शुरूआत। 
 
रेनु बताती हैं कि अपनी पब्लिशिंग ग्रुप का नाम उन्होंने वितस्ता इसलिए रखा क्योंकि ये उन्हें उनके बचपन की याद दिलाता है। वितस्ता झेलम नदी का नाम है और कश्मीर की बेटियों को वितस्ता की बेटी भी कहा जाता है। 
 
हिम्मत और हौसले के साथ बढ़ाए कदम
अपनी शुरूआत के बारे में बात करते हुए रेनु बताती हैं कि लेखक गिरिजा कुमार की किताब ‘ब्रह्मचर्य गांधी एंड हिज़ विमेन असोसिएट्स’ को कोई पब्लिशर लेना नहीं चाहता था। लेकिन वितस्ता अपने पंख फैलाने के लिए आतुर था और रेनु ने इसी किताब से वितस्ता को उड़ने का हौसला दिया। अब ये किताब देश के बेस्ट सेलर्स में से एक है। आज इस ग्रुप ने कई संवेदनशील मुद्दों को छूती किताबों को पब्लिश किया है और इन्हें रीडर्स खूब पसंद भी कर रहे हैं। 
 

 

समाज के बदलते स्वरूप पर रेनु का नज़रिया
रेनु कहती हैं कि एक तरह से देखिए तो समाज पहले से काफी बदला है और आगे भी बदलेगा, लेकिन मुझे इस बात की भी चिंता है कि बदलते समय के साथ एक तरफ हम जहां बेटियों को खूब आगे बढ़ा रहे हैं, स्ट्रॉन्ग बना रहे हैं, वहीं हमने ये जरूरी नहीं समझा है कि हम लड़कों को भी बदलते समय के साथ तैयार करें। मुझे डर है कि आने वाली पीढी में फिर कहीं कंफ्यूज़न ना रह जाए। बेटियों को तो हमने बहुत प्रगतिशील बनने का प्रोत्साहन दिया है, लेकिन हम लड़कों को क्या सही सीख दे रहे हैं कि वो समाज के इस बदलते स्वरुप को कैसे असानी से अपना लें।
 
महिलाओं को देती हैं ये सलाह
रेनु का मानना है कि आगे बढ़ने के लिए हमेशा ईमानदारी का रास्ता चुनना चाहिए। वो कहती हैं कि ये सच है कि महिलाओं की लाइफ में कई ऐसे मौके आते हैं जब लगता हे कि करियर और घर में कोई एक ही चल पाएगा, मगर फिर भी हमें ऐसे समय में भी जॉब करते रहना चाहिए। वो कहती हैं कि हमें अपने हक के लिए खुद ही लड़ना पड़ेगा।
 
रेनु की नज़र में खुशी
अपने काम को अच्छी तरह करना ही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है।
 
 

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