एक धनी व्यापारी था। उसका एक युवा पुत्र था। बहुत ही प्रतिभाशाली। वह बहुत अच्छे चित्र बनाता था। उसकी शादी की उम्र निकली जा रही थी, लेकिन वह शादी के लिए तैयार ही नहीं होता था। जो भी लड़की व्यापारी उसके लिए पसंद करता, वह उसमें कोई न कोई नुक्स निकाल देता था। एक दिन व्यापारी ने अपने एक मित्र से समस्या बताई। वह बोला कि मैं तुम्हारी मदद करूंगा।
अगले दिन वह व्यापारी पुत्र के पास गया और बोला कि मैंने तुम्हारी बहुत प्रशंसा सुनी है। मैं तुमसे अपनी मृत पत्नी का चित्र बनवाना चाहता हूँ आशा है कि तुम मुझे निराश नहीं करोगे। युवक तैयार हो गया। पिता के मित्र के बताए वर्णन के अनुसार उसने एक सप्ताह में उसे उसकी पत्नी का चित्र बनाकर दे दिया। उसने चित्र देखकर कहा कि चित्र तो अच्छा बना है, लेकिन मेरी पत्नी की आंखें थोड़ी छोटी थीं।
इन्हें ठीक कर दो। युवक ने उसे अगले दिन आने को कहा। अगले दिन उसने चित्र के निचले होंठ को थोड़ा बड़ा करने को कहा। इस प्रकार आठ-दस दिन बीत गए और वह चित्र में कुछ न कुछ बदलवाता रहा। अंतिम दिन वह युवक से बोला कि यह तुमने क्या बना दिया। यह तो कोई और ही स्त्री है। युवक का धैर्य जवाब दे गया और वह बोला कि आपकी अपेक्षाएं बहुत अव्यवहारिक हैं, मैं उन्हें पूरा नहीं कर सकता। इस पर पिता के मित्र ने उसे समझाया कि यही समस्या तुम्हारे साथ भी है। तुम्हारे पिता तुम्हारे लिए लड़कियां चुनते हैं और तुम उन्हें कोई न कोई कारण बताकर नापसंद कर देते हो। युवक को अपनी भूल समझ में आ गई।
सारः कल्पनाओं का सौंदर्य वास्तविक जीवन में मिलना काफी दुर्लभ होता है।
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