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कथा-कहानी

समय परिवर्तन – वह अपनी दोनों बड़ी बेटियों के साथ दो साल की परी को खेल खिलाने में मशगूल थी। अंदर से हंसने व खिलखिलाने की आवाज आ रही थी पर बाहर नन्हा दीपक आस लगाए खड़ा था कि अब दरवाजा खुले तब दरवाजा खुले। दीपा यह सब देखकर उसे घसीटते हुए अंदर खींच लाई व गले लगाते हुए बोली आजा मेरे राजा बेटा मैं तेरे साथ खेलूंगी। परन्तु दीपक उनसे अपने आप को लगभग छुड़ाते हुए बोला नहीं मम्मी मुझे परी के साथ खेलना है।तब दीपा ने उसे दो-तीन चांटे लगाए और डांटते हुए बोली  जब वह लोग दरवाजा नहीं खोल रहे तो तू कब तक धूप में खड़ा रहेगा। बीमार पड़ जाएगा। दीपक चांटे खाकर रोता-रोता सो गया।हर दो-तीन बाद इसी समस्या से दीपा को रूबरू होना पड़ता था। आने दो प्रकाश को आज उनसे बात करती हूं मन ही मन दीपा कुछ बुदबुदाने लगी। प्रकाश के आने पर दीपा ने बेटे के अकेलेपन के बारे में बताया। अपनी पड़ोसन कभी उसे आने देती है कभी नहीं। बच्चा बिचारा सिर पीट कर रह जाता है।मै सोच रही थी इसका भाई या बहन आ गया तो यह समस्या खत्म हो जाएगी। प्रकाश ने भी उसका समर्थन किया। दिन बीते, दीपा ने एक कन्या रूपी रत्न को जन्म दिया। दीपक उसे पाकर बहुत खुश हुआ।मम्मी मैं इसका नाम  एंजेल रखूंगा, भगवान जी ने इसे मेरे लिए भेजा है।अब मैं इसके साथ खेला करूंगा। हां बेटा सही कहा तुमने अब तुम्हें कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दीपक की आंखों में एक अनोखी सी खुशी की चमक थी। धीरे-धीरे समय बीता और ऐंजल डेढ़ साल की हो गई व दीपक के साथ खेल खेलने लायक हो गई थी। दीपक उसे अपने छोटे-मोटे खिलौने के साथ खिलाता रहता  और खुश रहता।इसके उलट परी अब अपने घर में अकेलापन अनुभव करने लगी क्योंकि उसकी बहनों पर पढ़ाई का दबाव आ गया था। वह दीपक के घर दरवाजा खटखटाने लगी। दीपक और एंजेल साथ -साथ खेल रहे थे। दीपक दरवाजा खोल, दरवाजा खोल की आवाज सुनकर दीपक चौंका। आज उसने भी अनसुना करना चाहा परंतु दीपा दरवाजा खोलने को उठी। तुरंत दीपक बोला ,’मां दरवाजा मत खोलो ‘पहले परी भी तो मेरे लिए दरवाजा नहीं खोलती थी ।यह सुनकर एक बार तो दीपा के पैर रुक गए पर उसने तुरंत यह विचार किया ऐसा करना ठीक नहीं है ,बच्चे के मन में गलत संस्कार पड़ेंगे।उसने दीपक को समझाया नहीं बेटा यह गलत बात है परी तुम्हारी दोस्त है उसे तुम दोनों के साथ की आवश्यकता है साथ- साथ खेलने से बच्चों का विकास होता है।दीपक ज्यादा कुछ तो नहीं समझ पाया मां की बातों का अर्थ पर यह समझ गया कि वह ऐसा करके  ठीक नहीं कर रहा था। बदला लेना गलत बात है। दीपा ने जाकर दरवाजा खोला तो परी वापस जाने के लिए मुड़ चुकी थी। दीपा ने परी को आवाज देकर बुलाया ।परी खुशी-खुशी वापस लौट आई। तीनों बच्चे मिलकर खेलने लगे। दीपा भी तीनों बच्चों को साथ खेलते हुए देखकर मंद- मंद मुस्कुरा कर अपने काम में लग गई।