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सफल गृहिणी... तेरा छिपा खजाना
Stories of Grihalakshmi

गृहलक्ष्मी की कहानियां – सफल गृहिणी… तेरा छिपा खजाना – आज हालात बड़े तूफान के गुजर जाने बाद जैसे हैं, एकदम शांत… यदि अमीरों और कालाबाजारी करने वालों के अलावा कोई बेचैन है तो वो है देश की नारीशक्ति, जिसकी सारी शक्ति मुई इस खबर ने छीन डाली… देश की गृहणी… कैसे बताएं उस काली रात की दास्तान, जिसने उसकी नींद, भूख और चैन सब लूट लिया है।ट

उस दिन भी रोज की तरह श्रीमतीजी ने अपना फेवरेट सीरियल देखने के लिए जैसे ही टीवी ऑन किया कि गलती से न्यूज चैनल लग गया। लगा, मानो बड़ा भूकंप आ गया हो, भूकंप के आफ्टर शॉक के असर में श्रीमतीजी सुन्न सी हो रही थी कि किट्टी सहेलियों के फोन आने लगे, ‘अरे नम्मो, टीवी देखा तुमने। अरे पागल हो गया है ये प्रधानमंत्री’, नम्मो चिल्ला पड़ी। क्या होगा अब मैंने पति से छिपाकर इतने नोट रखे हैं पोती के लिए सोना खरीदने के लिए, अब क्या होगा, सारे नोट बेकार हो गए ना? सारी सहेलियां परेशान थी, जबाब किसी के पास नहीं… कभी इतना दिमाग लगाने की जरूरत ही नहीं समझी और आज आंखों के सामने तिलुले नाच रहे थे।

श्रीमतीजी सोच रही हैं, हमारी सालों की मेहनत बेकार हो गई आज, कितनी सफाई से घर खर्च में से पाई-पाई बचाकर ये रुपये जोड़े थे, कितनी मेहनत से हमने हिसाब किताब में हेर-फेर की थी, पति के कैसे-कैसे प्रश्नों का हिम्मत से डटकर सामना किया था इन नोटों को बचाने के लिए। ये वही नोट हैं जिनके लिए हमने पति से झूठ बोला था। उन्होंने प्यार से पूछा था, ‘जान कुछ पैसे हैं क्या?’ और हमने कितनी सफाई से उनके प्यार को धोखा दिया था, ‘कहां, इतने त्योहार गए हैं, धोबी, कामवाली, सबको पैसे देकर हम तो ठन-ठन गोपाल हो गए हैं।’
ये वही नोट हैं, जिन्हें हमने सबकी नजर से ऐसे बचाया, जैसे कोई अपनी खूबसूरत पत्नी को बचा रहा हो। ये वही नोट हैं, जिन्हें हमने जगह कभी चावल के डिब्बे में तो मेकअप बॉक्स में ऐसे छिपाया जैसे किडनेपर किडनेप किये हुए बच्चे को छिपाता है। और आज हमारी सारी मेहनत, सारे जतन पर पानी फिर गया है।

हमें तो ये भी नहीं समझ नहीं आ रहा कि जो नोट जादू से एक रात में ही कागज हो गए हैं, वो कौन से मंतर से वापस नोट बनेंगे, और लोगों को चुटकुले सूझ रहे हैं। बताये देते हैं हमारा पैसा कालाधन बिलकुल भी नहीं है। ये वो धन है जो हम नहीं बचाते तो आज अपने घर में ना बैठे होते। ये कालाधन नहीं, वो इमरजेंसी द्वार है, जब सारे द्वार बंद हो जाते हैं तब खुलता है। सब पतियों को पता होता है कि पत्नी जी के पास माल यानी कुच्चा है। हां कितना है, ये भले ही ना पता हो। वो गृहिणी सफल गृहिणी नहीं मानी जाती जो अपना सीक्रेट धन न जोड़े।

सब बात अपनी जगह ठीक पर श्रीमतीजी आज सचमुच तनाव में हैं। पतिदेव ने ऑफिस से आते ही लटके हुए चेहरे पर नजर डाली, मन ही मन हंसे और ह्रश्वयार से बोले क्या हुआ डाॄलग? परेशान नजर आ रही हो, सब ठीक है ना? श्रीमतीजी खाना परोसने में लग गई, पर बोलने की हिम्मत नहीं कर पाई, छुपाये धन को अब भी छुपा रखना चाहती थी पर मजबूर थी। जब सोने के लिए बिस्तर पर गए तो पतिदेव से धीरे से बोली, ‘सुनोजी, पतिदेव की आंखों में चमक सी आई, इतने प्यार से जो बोल रही थी। बोलो ना, पतिदेव भी रोमेंटिक अंदाज में बोले।

ये नोट सचमुच नहीं चलेंगे क्या अब? पत्नी जी ने हिम्मत करके पूछा। पतिदेव के अरमानों पर पानी भले ही फिर गया हो, पर मन में खुशी का गुब्बारा फूल रहा था। संभल कर बोले, हां बेकार हो गए। सब कागज हैं अब, वैसे तुम्हारे पास तो हैं ही नहीं, तुम क्यों चिंता करती हो? हैं जी, पत्नी धीरे से बोली, अच्छा कितने हैं? पतिदेव की आंखें हैलोजन सी चमकी, लाओ हम बैंक से बदल देंगे, उन्होंने हाथ बढ़ाया। पत्नी जी ने कांपते हाथों और बेमन से हिम्मत जुटा अपनी गाढ़ी कमाई के नोटों की गड्डी पतिदेव को सौंपी और पूछा, आप वापस तो कर देंगे ना?

विश्वास नहीं है हम पर तो रख लो भूजा खाना। पतिदेव ने बनावटी गुस्सा दिखाया, पर पत्नी जी की रोनी सूरत देख हंसे और बोले, जरूर मिल जाएंगे, लेकिन 25′ काटकर। यही रेट चल रहा है। अब श्रीमतीजी अपने उस नुकसान के बारे में सोच रही हैं जो किसी को समझ नहीं आ रहा, सिवाय नारियों के।