स्नेहिल स्पर्श-पूज्यनीय सास
Snehial Sparsh

Short Story: परिधि वृंदा जी की इकलौती बहू थी ।नये दौर की नयी पीढ़ी ..और वही पीढ़ियों के बीच विचारों के मतभेद ।और इसी मतभेद होने के कारण अक्सर सास -बहू की छोटी -छोटी नोंक -झोंक हो जाती थी ,किंतु वृंदा जी परिधि पर अपार ममता भरा स्नेह रखती थीं ।दोनों अकसर अपने -अपने दायरे
में सिमटी रहती ।एक बार परिधि को तेज बुखार हो गया ।शारीरिक पीड़ा और अचेतन सी अवस्था में वो “ माँ -माँ “ बोलते हुए अपनी स्वर्गवासी माँ को याद कर रही थी ।तभी उसे अपने माथे पर ममता से भरे एक स्नेहिल स्पर्श का एहसास हुआ ।उसने देखा कि उसकी सास उसके माथे पर ममत्व भरे स्पर्श के साथ ठंडी पट्टियां रख रही हैं ।उसे ऐसे देखते हुए वृंदा जी बड़े स्नेह और ममत्व के साथ बोलीं   “ बेटा … तुम्हारी एक माँ नहीं है तो क्या हुआ .. तुम्हारी दूसरी माँ तो हैं ।छोटी -मोटी नोक -झोंक हमारे रिश्ते को कमजोर नही बना सकती ।” उनकी बात सुनते ही परिधि “ माँ “ कह कर नम आँखों से उनके गले लग गई ।

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