Hindi Love Story: हिमांशु एक समझदार और गंभीर स्वभाव का लड़का था। उसने जीवन का हर एक फैसला सोच-समझकर किया था , जैसे करियर, दोस्ती , परिवार और जीवन से जुड़े कई फैसले। शादी के लिए उसका मानना था ये ऐसा प्यारा बंधन होना चाहिए जिसमें दिल और आत्मा दोनों मिल पाएं। इसलिए वह हमेशा लव मैरिज का का ही पक्ष लेता था। लेकिन उसके जीवन की विडंबना यह थी कि उसकी जिंदगी में कभी कोई लड़की आई ही नहीं। वह सोचता रहा कि शायद किसी मोड़ पर कोई उसकी जिंदगी में आएगी, उससे प्यार भरी बातें करेगी, और फिर एक दिन ऐसा आएगा जब वो दोनों हमेशा के लिए एक दूसरे के हो जाएंगे। लेकिन वक़्त बीतता गया। अब उसके घर वालों को चिंता होने लगी थी ।
जब एक दिन उसकी मां ने एक लड़की की तस्वीर दिखाते हुए कहा, “प्रियाा है, बहुत प्यारी है, टीचर है, और हमें बहुत पसंद आई,” तो हिमांशु कुछ ना कह सका और चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया और दोनों की शादी हो गई। प्रिया जैसी सच्ची और सरल लड़की बहुत कम ही होती है। वो हमेशा रिश्ते निभाने में विशवास रखती थी, और हिमांशु के साथ एक अच्छा जीवन बिताने की उम्मीद लेकर ससुराल आई थी। शुरू में तो सब ठीक था। लेकिन धीरे-धीरे प्रिया ; को ऐसा लगने लगा था कि हिमांशु उससे हमेशा एक दूरी बनाकर रखता है। वह कभी लड़ता नहीं, ताने नहीं देता, पर उससे अपने दिल की बात भी कभी शेयर नहीं करता था।

बेशक वो प्रिया का बहुत ख्याल रखता था। समय पर दोनों साथ में खाना खाते ,जब भी प्रिया की तबियत ख़राब होती तो हमेशा हिमांशु ही उसकी दवा का ख्याल रखता था। ठंड लगने पर चादर उड़ाता देता था, लेकिन ये सब खामोशी में लिपटा होता। प्रेम के इज़हार जैसी कोई बात उन दोनों के बीच ना होती। प्रिया की आंखों में सवाल तैरते थे , लेकिन उसने हिमांशु से कभी कुछ पूछा नहीं। बस सोचती रही, “क्या मैं उसके दिल के करीब नहीं आ पाई। क्या मुझमे कोई कमी है, या मेरी किसी बात का हिमांशु को बुरा तो नहीं लग गया।
एक दिन सफाई करते हुए प्रिया को अलमारी में एक डायरी मिली। उसने डायरी को जैसे ही अलग रखना चाहा उसके पन्ने खुद ही पलट गए। उसमें लिखा था – मैं जानता हूं, मैं खुलकर नहीं कह पाता कि मैं क्या महसूस करता हूं। पर प्रिया के आने के बाद मेरी दुनिया में एक अजीब सी शांति आ गई है। उसके चुपचाप बैठे रहने पर भी, घर में रौनक महसूस होती है। मैं उसे पसंद करने लगा हूँ और शायद प्यार भी करता हूं, पर डरता हूं कि कहीं मेरे जज़्बात उसे अजीब न लगें।
प्रियाा की आंखें नाम हो गई। पहली बार उसने महसूस किया कि हिमांशु की खामोशी में प्यार भरी गहराई है। अब उसे समझ आ गया था कि उसे कैसे इस रिश्ते में जान डालनी है।
उसने कुछ बदलने की कोशिश नहीं करी , बस थोड़ा-सा और मुस्कुराने लगी, कभी-कभी हल्के-फुल्के मज़ाक करने लगी, वो हर दिन हिमांशु से थोड़ी देर बैठकर कुछ ना कुछ बातें जरूर करती। धीरे-धीरे हिमांशु भी खुलने लगा था । एक दिन जब उसने प्रियाा के लिए गुलाब लाकर कहा, “मुझे नहीं पता ये कैसे देना है। तुम्हारे लिए लेने का मन किया तो ले आया, तो प्रियाा की आंखों में चमक आ गई। अब वो दोनों हर शाम साथ में चाय पीते, कभी किताबों और कहानियों पर बातें करते, तो कभी बिना कहे ही एक-दूसरे की भावनाओं को महसूस करते।

एक शाम हिमांशु ने कहा “मैं सोचता था कि प्यार ढूंढ़ना पड़ता है… पर तुमने मुझे प्यार करना सिखा दिया। प्रिया मुस्कुराई और बोली, “शादी चाहे अरेंज हो या लव, अगर दिल में प्यार हो सामने वाले को अपना बनाने कीभावना हो , तो ऐसी साधारण सी कहानी भी अपने आप में प्रेम कहानी बन जाती है।
और इसी खामोश मोहब्बत में, दो अजनबी अब अजनबी ना रह कर एक दूसरे के लिए ख़ास हो गए थे। लव मैरिज का सपना अरेंज मैरिज में ही इतनी खूबसूरती से पूरा हो सकेगा हिमांशु ने कभी सोचा भी नहीं था।
