सार्थकता- गृहलक्ष्मी की कहानियां: Hindi Kahani
Sarthakta

Hindi Kahani: फिरोजाबाद के गांव दौलतपुर निवासी शैलेन्द्र शाम को जब घर आते तो परिवार के लिए कुछ ना कुछ खरीद साथ लेकर आते।

एक दिन शैलेन्द्र  दो किलो आम  लाए और पत्नी प्रतिमा से बोले , सबको दीजिए एक एक आम ।

शैलेन्द्र का दो भाईयों का बड़ा परिवार है । 

प्रतिमा ने अपने बेटे को दो आम दिए और बाकी को एक एक आम।

शैलेन्द्र ने प्रतिमा को बुलाया और पूछा , आपको अपने बेटे को महामानव बनाना है या राक्षस?

प्रतिमा ने पूछा ,आप यह क्यों पूछ रहे हो?यह क्या बात हुई ?

तब शैलेन्द्र ने कहा ,जब मैं  पर्याप्त मात्रा में आम  खरीद कर लाया और कहा कि सभी को एक एक आम दिया जाएं,तो आपने अपने बेटे को दो आम देकर उसे क्या बनाया ?उसकी मां ही चोरी कर रही है, पक्षपात कर रही है, तो फिर उसका क्या होगा? एक अतिरिक्त आम ज्ञान बढ़ा देगा क्या , उसके पुण्य को बढ़ा देगा क्या,बेटे को पहलवान बना देगा या उसका भाग्य बना देगा क्या ? आपकी यह पक्षपाती बुध्दि, आपकी वह चोरी की बुद्धि आपकी धृतराष्ट्र वाली बुध्दि है जो आपके बेटे को राक्षस बना देगी।

शैलेन्द्र ने अपनी पत्नी को ऐसे झकझोरा कि दोबारा वह कभी पक्षपात न कर सकी।

आज उनके दोनों बेटे जीवन में सबके लिए जैसे काम कर रहे हैं,वह अनुकरणीय है।

निश्चित रूप से यह शैलेन्द्र की शिक्षा का प्रभाव है।

परिपालन की रामजी की पद्धति है।

 इसके माध्यम से शैलेन्द्र बताना चाहते है कि प्रारंभ से ही बहुत बड़ी दृष्टि वाला होकर जीवन के उपयोग को,जीवन की सार्थकता को, जीवन के बड़प्पन को साबित करने का संकल्प लेना चाहिए कि सदैव बांटकर खाना है।