sahi praarthana
sahi praarthana

एक बालक ने किशोरावस्था में प्रार्थना करनी शुरू की – ‘या खुदा! मुझे शक्ति दो। मैं दुनिया को बदलना चाहता हूँ। मैं लोगों के दिल पर राज करना चाहता हूँ।’ कई वर्ष बीत गये। वह युवावस्था में पहुँच गया, परंतु प्रार्थना स्वीकृत नहीं हुई। उसने सोचा, क्यों न प्रार्थना के बोल बदलूं। अब वह प्रार्थना करने लगा- ‘या खुदा! मुझे शक्ति दो। मैं अपने सम्पर्क में आने वाले लोगों को बदल दूं’ कई वर्ष बीत गये किंतु प्रार्थना स्वीकृत नहीं हुई।

युवक ने सोचा- मेरी प्रार्थना में ही कोई कमी है। गम्भीर चिंतन के साथ अब वह प्रार्थना करने लगा- “या खुदा! मैंने दुनिया को बदलने का सपना देखा, नहीं बदल सका। मैंने आसपास के वातावरण को बदलने का सपना देखा, सफल नहीं हुआ। अब मेरी कोई विशेष इच्छा नहीं है। तुम मुझे ऐसी शक्ति दो कि मैं अपने आपको बदल सकूं।” उसकी प्रार्थना एक दिन में ही फलीभूत हो गयी। खुदा ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। वह खुद बदल गया- उसके आसपास का वातावरण बदल गया। उसने देखा कि सारी दुनिया उसके विचारों को महत्त्व दे रही है। जिस रूप में बदलना चाहता था, उस रूप में दुनिया बदल रही है।

ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंAnmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)