सच्ची, अलबेला दोस्त है यह गधा – नन्ही गोगो के अजीब कारनामेएक दिन गोगो शाम के समय झूला पार्क में घूमने गई। वह पत्थर की काली वाली बेंच पर बैठी थी और आसपास के फूलों-पौधों की सुंदरता देख रही थी। पार्क में हरी-हरी, नरम-नरम घास दूर-दूर तक नजर आ रही थी। जैसे साफ हरी चादर चारों ओर बिछी हो। थोड़ी देर बाद गोगो चप्पलें उतारकर नरम-नरम घास पर चलने लगी, तो उसके पैरों को बड़ी मीठी गुदगुदी-सी महसूस हुई। ऐसी प्यारी-प्यारी गुदगुदी कि उसे अकेले में ही हँसी आ गई।
उस दिन जाने क्या बात थी, गोगो के दोस्तों में से कोई पार्क में नहीं आया था। गोगो अकेली पूरे पार्क का चक्कर लगाती रही। एक-एक फूल को प्यार से देखा। गुलाब के लाल-लाल सुंदर फूलों से तो उसने खूब बातें भी कीं। फिर तेज-तेज दौड़ते हुए पार्क के दो-तीन चक्कर काटे। थोड़ी देर झूला झूला और उसके बाद घर के लिए चल दी।
नन्ही गोगो जब झूला पार्क में चक्कर काट रही थी, तभी उसका ध्यान पार्क के बाहर खड़े एक सीधे-सादे गधे की ओर गया था। वह अपनी ही जगह इतना शांत खड़ा था कि देखकर गोगो को बड़ी हैरानी हुई। जितनी देर गोगो पार्क का चक्कर काटती रही, गधा अपनी जगह शांत खड़ा रहा। एकदम अडोल।
थोड़ी देर बाद गोगो पार्क से चलने लगी तो उसने हँसकर उस सीधे-सादे गधे से कहा, “तुम तो बड़े अच्छे हो जी, चलो हमारे साथ।”
इस पर गधे ने सिर हिलाया, जैसे वह नन्ही गोगो की बात समझ रहा हो।
कुछ देर बाद गोगो घर की ओर चली, तो देखती क्या है, पीछे-पीछे गधा भी चला आ रहा है। गोगो को बड़ा मजा आया। वह पलटकर गई गधे के पास और उसकी गरदन-सिर पर हाथ फेरकर बोली, “वाह प्यारे गधे, तुम तो मेरे दोस्त बन गए। क्यों, ठीक है न मेरी बात!”
गधे ने नन्ही गोगो की बात को बड़े ध्यान से सुना और ऐसा लगा, जैसे वह मुसकराया हो। और फिर नन्ही गोगो कुछ समझ पाती, इससे पहले ही अचानक वह नीचे जमीन पर बैठ गया।
गोगो को लगा, यह सीधा-सादा गधा कह रहा है, “आओ गोगो, बैठो मेरी पीठ पर! सब तो मेरी हँसी उड़ाते हैं, पर तुम इतनी अच्छी और प्यारी लड़की हो कि मुझे इतना प्यार करती हो।”
शुरू में गोगो को थोड़ी झिझक हुई, पर फिर उसे लगा कि गधा कहीं बुरा न मान जाए! चलो इसकी पीठ पर बैठ जाती हूँ।
नन्ही गोगो के बैठते ही गधा उठ खड़ा हुआ और चल दिया।
आसपास के लोग बड़ी हैरानी से गोगो को देख रहे थे। गोगो हमेशा कुछ न कुछ अजीब काम करती थी, पर आज तो उसने कमाल ही कर दिया था। लोग दूर से देख रहे थे और हँस रहे थे। कुछ तो हँसते-हँसते पूछ भी लेते, “क्यों गोगो, कैसी लग रही गधे की सवारी?”
“अच्छी, बहुत अच्छी! मेरा गधा बड़ा सीधा, बड़ा प्यारा है।” नन्ही गोगो भी हँसकर जवाब देती।
कुछ बच्चों ने गोगो को गधे की सवारी करते देखा तो जोरों से हँस पड़े। होते-होते बहुत-से बच्चे इकट्ठे हो गए। उनमें से दो-एक ने तालियाँ बजानी शुरू कर दीं। यह देखकर सबके सब तालियाँ बजाने और नाचने लगे।
होते-होते गोगो के चारों ओर अच्छी-खासी भीड़ जमा हो गई और उसका गधा आगे बढ़ा तो पीछे-पीछे बच्चों का लंबा-चौड़ा हुजूम भी चल पड़ा।
लोगों ने बच्चों का ऐसा प्यारा जुलूस कभी नहीं देखा था। वे आपस में बात करने लगे, “भई, नन्ही गोगो है बड़ी कमाल की लड़की! देखो न, उसके गधे की वजह से सारे बच्चे क्या मौज मना रहे हैं।”
गधे को न जाने कैसे गोगो के घर का पता चल गया था। वह धीरे-धीरे चलता हुआ गोगो के घर के पास जा पहुँचा। इतना लंबा-चौड़ा जुलूस उसके पीछे-पीछे चला आया था कि लोग अपना सारा काम-धाम छोड़कर इस जुलूस को देखने लगे। सब हँस-हँसकर कह रहे थे, “कमाल है यह लड़की गोगो! और भई, कमाल है इस मोहल्ले के बच्चों का, न जाने क्या-क्या अजब-गजब तमाशे करते रहते हैं।”
कोई-कोई कह रहा था, “मगर देखिए भाई साहब, गधा भी कितना प्यारा और समझदार जीव है। कोई और जानवर होता तो बच्ची को गिरा देता। पर यह तो इतने प्यार से गोगो को बिठाए हुए है कि गिरने का सवाल ही नहीं।”
किसी और ने कहा, “कुछ भी कहो, गधा होता बड़ा समझदार है। न जाने कैसे इसे गोगो के घर का पता चला? मैं इतनी देर से देख रहा हूँ, किसी ने कुछ नहीं कहा। मगर यह चुपचाप, अपने आप गोगो को उसके घर ले आया। कहीं इधर-उधर नहीं भटका। है न अनोखी बात!”
“भई, है तो अजूबा!” किसी और ने कहा। और वहाँ मौजूद सारे के सारे लोग हँसते हुए सिर हिलाने लगे।
थोड़ी देर बाद गोगो के मम्मी-पापा बाहर निकलकर आए तो गधे पर बैठी हँसती-मुस्कराती गोगो और उसके साथ हँसते-गाते, तालियाँ बजाते और नाचते बच्चों का लंबा-चौड़ा हुजूम देखकर उन्हें जोर की हँसी आ गई।
इस बीच गोगो के नीलू भैया भी आ गए। वे झटपट अपना कैमरा उठा लाए और नन्ही गोगो और बच्चों के जुलूस की एक से एक मजेदार तसवीरें खींचने लगे। नन्ही गोगो हँस रही थी। बच्चे हँस रहे थे। सारा का सारा मोहल्ला हँस रहा था। नन्ही गोगो के मम्मी-पापा भी हँस रहे थे। नीलू भैया और सान्या दीदी भी हँस रही थी। और शायद गधा भी हँस रहा था।
नन्ही गोगो के भैया के कैमरे में ये सारे के सारे हँसते-मुसकराते हुए चित्र समा गए।
फिर नीलू भैया और सान्या दीदी ने आगे बढ़कर नन्ही गोगो को उतारा। मम्मी ने आगे बढ़कर उसे गोदी में ले लिया। बोलीं, “तूने तो यह बहुत अच्छी सवारी ढूँढ़ ली गोगो। कहाँ मिला यह सीधा-सादा गधा?”
“मम्मी, यह पार्क के पास ही था। और मुझे इतना अच्छा लगा कि क्या कहूँ! मुझे देखकर यह बैठ गया, जैसे कह रहा हो, ‘ओ गोगो, मेरी पीठ पर बैठ जाओ!’ मैं बैठी तो मजे में चल पड़ा। और देखो, कितने सारे बच्चे इकट्ठे हो गए।” कहकर गोगो हँसने लगी। फिर बोली, “मम्मी-मम्मी, गधा भूखा होगा। इसे भी कुछ खिला दो न प्लीज!”
मम्मी ने रसोई में जाकर नरम-नरम रोटियाँ बनाईं और बड़े प्यार से गधे को खिलाईं।
गधा वापस गया, तो बार-बार पीछे मुड़कर ऐसे देख रहा था, जैसे याद कर रहा हो कि…कहीं मैं गोगो और उसके घर को भूल न जाऊँ!
मगर न गधा गोगो को भूला और न गोगो उसे। और लोग तो भला भूलते ही कैसे!
कुछ दिन बाद होली थी। सब होली पर एक-दूसरे को लाल-पीले रंगो से रँग रहे थे। किसी ने कहा, “गोगो, आज अगर तेरा दोस्त गधा आ जाता और तू उस पर सवारी करके घूमती तो कितना मजा आ जाता! फिर तो हम उस गधे को भी रंग लगा देते और सारे शहर में जुलूस निकालते।”
अभी उसकी यह बात पूरी हुई ही थी कि गोगो को गधा आता दिखाई दिया। वह झट पहचान गई, “हाँ-हाँ, यही है मेरा प्यारा दोस्त गधा!”
और गधे ने तो गोगो को झट से पहचान ही लिया था। गोगो को देखते ही वह बैठ गया। और गोगो ने उस पर सवारी की तो वह इतना खुश हुआ, जैसे मन ही मन हँस रहा हो। फिर गोगो और उसके दोस्तों ने उस पर इतना रंग डाला कि वह सात रंग का अलबेला इंद्रधनुषी गधा बन गया।
पूरे शहर में उसका जुलूस निकला, जिसमें हर कोई हँस रहा था और ठहाके लगा रहा था। तब गधे पर सवारी करती गोगो ने खुद-ब-खुद यह अलबेली कविता बना ली—
यह अलबेला दोस्त है गधा
हाँ जी, गधा है गधा
मगर कितना सधा!
गोगो को घुमा रहा है ऐसे,
गोगो हो परियों की राजकुमारी जैसे!
तभी तो गधे के चारों ओर लगा है मेला
रंगों का मेला, खुशियों का मेला
मेले में सतरंगा गधा अलबेला
चल रहा अकेला…!
जिसने भी गोगो की यह नायाब कविता सुनी, खूब तालियाँ बजाकर दाद दी।
एक ने गोगो के सिर पर प्यारी-सी जोकरनुमा कैप लगा दी थी, जिस पर लिखा—‘यह है गोगो, अपने प्यारे दोस्त गधे के साथ!’
देखकर सब तालियाँ बजाकर हँसते, तो साथ-साथ गोगो भी हँसती। होली का आनंद इससे दुगना हो गया था।
बड़े दिनों तक लोग गोगो के प्यारे गधे के साथ उस मजेदार होली को भी याद करते रहे। सचमुच काॅलोनी के बच्चों की वह यादगार होली थी।
ये उपन्यास ‘बच्चों के 7 रोचक उपन्यास’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ke Saat Rochak Upanyaas (बच्चों के 7 रोचक उपन्यास)
