raajkumar ka chunaav
raajkumar ka chunaav

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

दुर्गम जंगल एवं पहाड़ियों से घिरा दक्षिण दिशा में एक सुंदर देश राजलोक था। जैसा सुंदर नाम था वैसा ही सुंदर यहां का राजा, राघव राज करता था। राघव के राज से कोई व्यक्ति अप्रसन्न नहीं था। जब भी किसी व्यक्ति से राजा के विषय में पूछा जाता तो वो बस एक ही बात कहता-काश! अगले जन्म में भी इसी देश में जन्म हो तथा मेरे राजा राघव ही हों। बच्चा हो या बूढ़ा, राजा के पास जाता तो उसका आदर-सत्कार होता था। उसकी समस्याएं सुनने के बाद हल करके ही घर पर भेजा जाता था। राजा की उदारता एक मिसाल थी।

राजा राघव की पत्नी रानी कमला भी राजा से कम नहीं थी। जहां राजा हर प्रजा के सुख-दु:ख में भागीदार होता था, उसी प्रकार कमला भी हर इंसान के सुख-दु:ख को बड़ी ही ध्यानपूर्वक सुनती थी। या तो वो स्वयं भी हल कर देती थीं या फिर किसी गंभीर समस्या के सामने आने पर राजा से करवाती थी।

कहते हैं कि जब इंसान गुणी हो तो दुर्भाग्य भी उसका साथ नहीं छोड़ता है। राजा राघव एवं रानी कमला के कोई संतान नहीं थी। न पुत्र ही हुआ और न पुत्री। पुत्र पाने के लिए बहुत तप एवं यज्ञ किया किंतु भाग्य ने उनका साथ ही नहीं दिया। राजा व रानी अब थक चुके थे। उनकी ढलती हुई उम्र भी उन्हें अंदर ही अंदर कचोटने लग गई। कभी भी उनकी जिंदगी की शाम हो सकती थी ऐसे में एक दिन राजा ने पूरी प्रजा को राजमहल में बुलाया। पूरे देश में ऐलान कर दिया और डोंडी पिटवा दी गई कि राजा ने सोमवार को अपने राजमहल में एक सभा आयोजित की है जिसमें प्रत्येक घर से एक-एक सदस्य का पहुंचना जरूरी है। राजा का आदेश सुनकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि आखिरकार राजा की मंशा क्या है?

सोमवार का दिन आ पहुंचा। पूरे ही देश से लोग हुजूम के रूप में आ पहुंचे। राजा के महल के बाहर सभा का आयोजन किया गया। सारे मंत्री एवं महामंत्री सहित रानी भी मौके पर पहुंची। सभी यह जानने के लिए आतुर थे कि आखिरकार यह सभा क्यों बुलाई गई है? राजा ने सभा में खड़े होकर अपनी सारी व्यथा बताई और कहा कि वो अब बूढ़ा हो चला है। प्रजा के हित का दायित्व भी किसी के कंधों पर रखा जाए।…लेकिन राजा के कोई संतान नहीं है-राजा ने जब रोते हुए कहा तो समस्त उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।

राजा ने प्रजा को कहा-मुझे यकीन है कि जिस प्रकार वे प्रजा के हित के लिए सजग हैं, ठीक उसी प्रकार राजा के हित का ध्यान रखने के लिए समस्त प्रजा सजग होगी। प्रजा ने कहा-हम राजा के लिए जान देने को भी तैयार हैं। राजा ने कहा-मुझे किसी की जान नहीं चाहिए अपितु एक शक्तिशाली राजकुमार की जरूरत है जो प्रजा के सुख-दु:ख में उनके बाद भागीदार हो सके। उनके हर कष्ट को अपना कष्ट समझते हुए दूर करें। उनके लिए अगर कुर्बानी भी देनी पड़े तो राजकुमार कुर्बानी देने को तैयार रहे। राजा की बात अब प्रजा की समझ में आ गई थी।

राजा ने कहा कि अब राजकुमार का चुनाव किया जाना है। राजकुमार कोई और नहीं अपितु प्रजा में से ही होगा किंतु राजकुमार का चुनाव सभी के सामने किया जाएगा। राजकुमार बनने के लिए कुछ शर्तें पूर्ण करनी होंगी। जो शर्तों को पूरा कर देगा वो राजकुमार होगा किंतु जो शर्तों को पूरा करने में असमर्थ होगा, उसे राजकुमार नहीं बनाया जाएगा। प्रजा से आवाज आई-महाराज राजकुमार बनने के लिए शर्तें बताने का कष्ट करें?

राजा ने सभा में खड़े होकर ऐलान किया कि जो भी युवा सुंदर वन में अकेले तीन दिन बिताकर आएगा, साथ में सुंदर झील का जल बोतल में लाएगा। दुर्गम पहाड़ी की चोटी पर स्थित अमूल्य जड़ी बूटी लाएगा तथा प्रजा के बीच मलयुद्ध द्वंद्व में विजयी होगा, उसे ही राजकुमार घोषित कर दिया जाएगा।

राजा ने कहा- मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि इन शर्तों में मिलने वाले जोखिम को ध्यान में रखें। जान को बहुत बड़ा खतरा है। पहली शर्त सुंदर वन में शेर, चीता एवं जंगली जीवों का पहरा है, जहां तीन दिन तो दूर, तीन मिनट भी बिता पाना सरल कार्य नहीं है। अगर तीन दिन बिता दिए तो सुंदर वन की झील से जल लाना अति जोखिम भरा है। यदि किसी प्रकार पहली शर्त पूरी कर दी जाएगी तो दूसरी शर्त अनुसार, उसे दुर्गम पहाड़ी के ऊपर जाकर अमूल्य जड़ी-बूटी लाना उससे भी दुष्कर काम था। पहाड़ी की अधिक ऊंचाई, तीखी पहाड़ी एवं उसकी चोटी से जड़ी बूटी ढूंढ पाना कठिन काम है। दूसरी शर्त पूरी कर दी जाए तो सभी दो शर्त पूर्ण करने वाले जन आपस में मलयुद्ध करेंगे और जो मलयुद्ध में विजयी होगा, उसे ही राजकुमार घोषित किया जाएगा। इन तीनों शर्तों को सुनकर महिला, बालक, वृद्ध तो स्पर्धा से बाहर हो गए। युवा वर्ग आगे आया किंतु जब तीनों शर्त सुनी तो एक के बाद एक पीछे हटता चला गया। जो भी शर्तों को सुनता, बस यही कहता- राजकुमार बनना अति कठिन है। राजा के राजकुमार का चयन असंभव है।

जान को कदम-कदम पर जोखिम देखकर युवा वर्ग भी पीछे हटता चला गया। एक ग्वाला रामू जीवन में कई सालों से गायों को जंगल में चराता आ रहा था। वह पहाड़ी पर भी ऊंचाई तक गया था। सुंदर वन में शेरों से कई बार मुकाबला करके आया था। कई बार शेरों को मार भगाया था। उसने अपने पिता एवं माता से कहा-अगर आप मुझे आदेश करें तो मैं भविष्य में राजकुमार बन जाऊंगा। उसके माता-पिता रमन एवं रमनी ने अपने पुत्र रामू से कहा-बेटा, तुम अकेले हो। अगर जिंदगी खत्म हो गई तो हम किसके सहारे जिंदगी काटेंगे? रही बात अगर किसी तरीके से राजकुमार बन भी जाओगे तो हमें भूल जाओगे और हम जिंदगी और मौत के बीच बसर करते तड़पते हुए भगवान को प्यारे हो जाएंगे।

रामू ने कहा- मैं कभी अपने माता-पिता को भुला नहीं सकता। मुझे आपका आशीर्वाद सदा ही मिलता रहा है जिसके चलते मैंने जीवन के हर कठिन से कठिन काम को पूर्ण करके दिखाया है। रही मलयुद्ध की बात तो वो गायों का दूध पी-पीकर बलिष्ठ बना हुआ हूं। आप भी परिचित हो कि कई बार धुरंधर पहलवानों को मैंने हराया है। पहले तो रमन एवं रमनी नहीं माने किंतु बार-बार रामू की जिद करने से उन्होंने रामू को तीनों शर्त पूर्ण करने व राजकुमार बनने का आशीर्वाद दे दिया।

रामू सीधा-सादा युवक किंतु आत्मबलशाली था। उसने राजा की घोषणा के बाद दृढ़ निश्चय कर लिया था कि बेशक जान चली जाए किंतु एक बार राजकुमार जरूर बनूंगा। अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर जंगल की ओर चल दिया। कितने ही युवक साहस बटोरकर सुंदर वन की ओर चले किंतु कुछ तो वन को देखकर वापस आ गए तो कुछ जंगल में घुस नहीं सके। अगर घुस भी गए तो जंगली शेरों के भय के आगे टिक नहीं पाए। केवल रामू ही ऐसा साहसिक युवक था जो जंगल में बिना किसी भय के आगे बढ़ा जा रहा था। वह सीधा सुंदर वन के अंदर सुंदर झील की ओर बढ़ता ही जा रहा था। उसके हाथ में तलवार थी तथा ढाल थी। कहीं वो शेरों को मार देता तो कहीं उसका सामना जंगली जीवों से हुआ। कहीं उसकी बुद्धि तो कहीं उसकी ढाल काम आई। सुंदर झील तक पहुंचते-पहुंचते वो बुरी तरह से घायल हो चुका था किंतु जंगली औषधियों को ज्ञान होने के कारण सुंदर वन में जड़ी-बूटी लगाकर ठीक हो गया। शुरू हुआ उसका पहला दिन। वो शेरों के साथ दोस्ती से पेश आने लगा। पहले तो शेरों ने हमला बोला फिर उसे डराने लगे फिर उसको देखकर कुछ नहीं बोले। कुछ ही समय में शेरों से दोस्ती हो गई और तीन रात व दिन पेड़ों पर बैठकर पूरे कर लिए। आखिरकार सुंदर झील का पानी अपने साथ लाई बोतल में भर लिया और वापस राजमहल की ओर चल दिया। सबसे पहले अपने माता-पिता के पास गया और उनको सारी कहानी बताई। उसके पिता एवं माता ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राजा की दूसरी शर्त को पूरा करने का आशीर्वाद दे दिया। सीधा राजमहल गया और सुंदर झील के जल की बोतल राजा समक्ष रख प्रणाम करते हुए दूसरी शर्त को पूरा करने के लिए चल दिया।

दूसरी शर्त कुछ पहले से आसान थी किंतु दुर्गम पहाड़ी की चोटी पर चढ़ना अति दुष्कर था। जब वह गायों को चराता था तो भी पहाड़ी पर कई बार गया था। ऊपर जाने में सांस की तकलीफ बढ़ गई किंतु वो आगे बढ़ता ही गया। कहीं पैर फिसलते-फिसलते बचा तो कहीं उसने जान को जोखिम में डालकर एक पत्थर से दूसरे पत्थर तक कदम बढ़ाए। कई दिनों तक आराम करते-कराते आखिरकार पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गया। जहां का मनभावन वातावरण देखकर रामू अति प्रसन्न हुआ और थका-हारा होने के कारण उसने दो दिन आराम किया। फिर उसने अमूल्य जड़ी-बूटी की तलाश की। जंगल की अच्छी जानकारी होने के कारण अमूल्य जड़ी-बूटी को आसानी से पहचान लिया और उसे उखाड़कर धीरे-धीरे राजमहल की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया। अति प्रसन्न होकर अपने माता-पिता के पास गया और उन्हें प्रणाम करने के बाद राजमहल जाकर राजा को अमूल्य जड़ी-बूटी देते हुए कहा- राजन, मैंने दोनों शर्त पूर्ण कर दी है। अब तीसरी व अंतिम शर्त पूरी करने को वो तैयार है। राजा ने कहा-अभी जो भी युवक दोनों शर्त पूर्ण कर पाएंगे, उनके बीच मलयुद्ध होना है। सोमवार का दिन मुकर्रर कर दिया गया। अब तक केवल दो ही युवक दोनों शर्त पूर्ण करके मलयुद्ध के मैदान में उतरे थे।

दोनों युवकों का मलयुद्ध देखने के लिए अपार भीड़ जमा हो गई। रमन एवं रमनी ने अपने पुत्र रामू को विजयी होने का आशीर्वाद दे दिया। रामू को विश्वास था कि वो मलयुद्ध जरूर जीत जाएगा क्योंकि वह गायों का जमकर दूध पीता था। वह कईं पहलवानों को पछाड़ चुका था। मलयुद्ध को देखने के लिए राजा स्वयं उपस्थित हुआ। रामू राजा को प्रणाम करते हुए मलयुद्ध मैदान में उतर आया। उधर राजू भी मलयुद्ध के लिए मैदान में आ गया। जमकर मलयुद्ध चला जिसमें कभी लगता राजू तो कभी रामू जीतेगा। आखिरकार, जय श्रीकृष्ण का उद्घोष करते हुए रामू ने राजू को जोर की पटकनी लगाई और मलयुद्ध जीत गया। चारों ओर ढोल एवं नगाड़े बजने लगे। राजू के माता-पिता अति प्रसन्न हुए। कहीं उन्हें फूल मालाएं तो कहीं उन पर धन वर्षा करके जयकारे लगाए जा रहे थे।

राजा ने आज स्वयं घोषणा की कि रामू तीनों शर्त पूर्ण करके आया है, उसे राजकुमार घोषित किया जाता है। राजकुमार को गद्दी पर बैठाया गया और राजतिलक किया गया। राजा स्वयं सन्यास लेकर जंगल की ओर चल दिया।