purana sathi
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एक कार्यकर्ता जमनालाल बजाज के मुनीम के भाई थे। लगभग 50 वर्ष से उनके परिवार से संबंध रहा होगा। जमनालालजी की वजह से ही सामाजिक व राष्ट्रीय कार्य में वह आगे बढ़े और वर्षों तक उनके नेतृत्व में काम करते रहे। जब उनके जीवन में कुछ विकृति आई तो वह उनके खिलाफ हुए और खुले आम बुरा भला कहने लगे। उन्होंने जमनालालजी के खिलाफ एक किताब लिखी थी।

उसको छपाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। इसका उन्हें क्लेश था। उनका स्वास्थ्य खराब था। जमनालालजी उनसे मिलने गये तो वह सज्जन हमेशा की तरह रोष में ही मिले पर जमनालालजी के यह पूछने पर कि आपने अपना स्वास्थ्य ऐसा क्यों कर रखा है और उसकी देखभाल क्यों नहीं करते, तो उन्होंने कहा कि मैंने आपके खिलाफ एक किताब लिखी है। पैसों की कमी की वजह से उसे छपा नहीं सका, इसका मुझे क्लेश है। जब तक उस चिंता से मैं मुक्त नहीं हो जाता, मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं हो सकता।

जमनालाल बजाज ने उस किताब को छपाने की व्यवस्था करा दी और कहा कि निश्चिन्त होकर अपना स्वास्थ्य ठीक करो, इतनी छोटी-सी बात के लिए अपने-आपको इतनी तकलीफ में क्यों डाल लिया?

वह किताब छपी और जमनालालजी को इस बात से संतोष ही मिला कि उन्होंने अपने एक पुराने साथी के दिल का दर्द दूर करने में मदद की।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)