pagalpan fenk raha hun
pagalpan fenk raha hun

अमेरिका का एक बहुत बड़ा धनाढ्ड्ढ व्यक्ति कार से जा रहा था। कार की डिक्की नोटों से भरी थी। वह व्यक्ति मुट्टी भर-भर नोट निकाल रहा था और उन्हें सड़क पर फेंक रहा था। लोगों ने देखा और सोचा कि आदमी पागल है। पुलिसमैन ने भी यह घटना देखी।

उसने कार रोककर भीतर बैठे व्यक्ति से कहा- “भाई! यह क्या तमाशा कर रहे हो? ये सौ-सौ और हजार-हजार के नोट क्यों फेंक रहे हो?” कार में बैठा व्यक्ति न सहमा, न घबराया।

उसने शान्त भाव से कहा-“मैं नोट नहीं फेंक रहा हूँ, अपना पागलपन फेंक रहा हूँ।” पुलिसमैन कुछ समझा नहीं तो उस व्यक्ति ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा- “मैंने नोटों का इतना संग्रह किया कि पागल हो गया। मुझे इनके सिवाय कुछ दिखाई नहीं देता है। आज मैं इनके माध्यम से पागलपन बाहर फेंक रहा हूँ।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)