nani ka janmadin
nani ka janmadin

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

नन्नू मुन्नू करीब दो साल बाद मामा जी के घर गए थे। इससे पहले दोनों ही बहुत छोटे थे, मुन्नू सिर्फ दो साल का और नन्नू चार साल की थी। नाना जी के तीन और भाई थे। उनका परिवार भी दोनों तरफ सटे घरों में अलग-अलग रहते थे, पर सब का मुख्य द्वार एक ही था। समय के साथ बच्चों की एक बड़ी फौज जो तैयार हो गई थी। दाएँ घर में याची और सानू, बाएँ घर में अभि और रुचि उनके साथ मामा जी की दो बेटियाँ कानू एवं अति।

दिन भर बाहर चौबारे में 8-10 बच्चों का मेला-सा लगा रहता। भला और क्या चाहिए था उन्हें? सब लोग दिनभर अलग-अलग खेल खेलते, स्कूल की लंबी छुट्टियां जो चल रही थी। इसी बीच कुछ बच्चों का जन्मदिन भी पड़ा, जो बारी-बारी से उस चारदीवारी में उत्सव की तरह था। दिन भर अपने-अपने तरीके से सजावट करना, खाना बनाना एवं सब मिलकर खाना, उनके खेल का हिस्सा थे। दिन भर की थकान के बाद नानी के बिस्तर में लेटना और सो जाना, यह उनका दिनभर का काम था।

एक शाम मुन्नू के मन में एक विचार आया एवं नानी को पूछा, “नानी, क्या आपने मेरी मम्मी का जन्मदिन कभी मनाया?” नानी ने कहा- हाँ मनाया; मगर उन दिनों केक और मोमबत्ती का रिवाज नहीं था। हम लोग घर या मंदिर में पूजा करते थे और घर में पकवान बनाते थे। “वाह! कितना मजा आता होगा नानी”, मुन्नू की आँखों में चमक-सी आ गई। उसने फिर पछा- नानी. आपका जन्मदिन कब है? नानी ने बात को टालने की कोशिश की। मगर मुन्न बार-बार पूछता रहा। वह चाहता था कि नानी का जन्मदिन भी हम यहीं मनाकर ही यहाँ से जाएँ। नानी के झुर्रियों से भरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। बात टालती हुई बोली- रात बहुत हो गई है, चलो, सो जाओ। नन्नू अपनी जिद पर अड़ा रहा। उसने फिर पूछा- बताओ ना नानी, आपका बर्थडे कब है? अंत में नानी ने शरमाते हुए कहा, “मेरी माँ कहती थी कि मैं सावन के माह में एकादशी को रात को 9:00 बजे पैदा हुई, मगर मुझे संवत (साल) याद नहीं है।”

नन्नू इतने कठिन सवाल का जवाब पाकर बहुत खुश हुआ और सो गया। दिन भर के खेलकूद से नींद जो आ रही थी। मगर सुबह उठते ही फिर वही सवाल क्योंकि छोटा नन्नू रात की बात भूल गया। वह नानी से लिपटकर बोला- आपका जन्मदिन मैं भूल गया। दोबारा बताओ ना नानी। इस बार मुन्नू ने तुरंत वह पेंसिल से एक कागज के टुकड़े पर लिख लिया। कैलेंडर में ढूंढने पर पता चला कि उनका जन्मदिन सिर्फ दो दिन बाद है। मुन्नू ने नन्नू को अपनी बात बताई। दोनों ने सोचा कि नानी को भी सरप्राइज दें जैसा उन्होंने याची को दिया था। सारी मित्र मंडली ने नानी का जन्मदिन मनाने की चुपचाप योजना बनाई।

मुन्नू ने कहा- किसी को यह बात पता नहीं चलनी चाहिए। याची ने कहा, “कैसे?” तभी नन्नू ने बताया कि हम कुछ चंदा इकट्ठा कर सकते हैं मगर किसके लिए यह किसी को नहीं बताना है। नन्नू ने सबसे पहले मामी से 50 रुपये माँगे। भला ननिहाल में आए बच्चों से कौन पूछने वाला था? सभी ने हँसते-हँसते उन्हें बहुत सारे रुपए दे दिए। रुपए तो मिल गए मगर बाजार कौन जाए? केक और सजावट का सामान कौन लाए? तभी कानू ने बताया कि उनके पड़ोस में एक दुकान है, वहाँ जन्मदिन का सामान और केक मिलता है। बस फिर क्या था? सबने एक दिन पहले से ही सजावट की तैयारियां शुरू कर दी। सब ने सोचा बच्चे हैं, कुछ खेल खेल रहे हैं।

अगली सुबह पॉपकॉर्न खरीदने का बहाना करके सब दुकान की तरफ निकल पड़े। वहाँ रखे केक को ध्यान से देखते हुए याची ने लपक कर सबसे बड़े केक पर अपनी उंगली जमाई और पूछा, “यह कितने का है?” दुकानदार ने अधिक दाम होने के कारण बच्चों की बातों को अनसुना कर दिया। बारी-बारी से सभी ने उसी केक का दाम पूछा। अंत में दुकानदार ने झुंझलाकर जवाब दिया कि यह केक 250 रुपये का है। अपने पापा को लेने भेज दो। तुम लोगों के पास इतने पैसे नहीं होंगे। उसी समय नन्नू ने केक पैक करने के लिए कहा और कैरी बैग से 250 रुपये निकालकर दुकानदार को दिया। पहले तो दुकानदार को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ, पर बाद में उसने 250 गिन कर ले लिए।

केक लेने के बाद सभी सजाए हुए चौपाल के कमरे में पहुँचकर नानी को बुलाने के लिए बहाना बनाते हैं और कहते हैं कि आपको कोई मिलने आया है। नानी अपनी छड़ी के सहारे धीरे-धीरे उतर कर कमरे की तरफ बढ़ती है। तभी नन्नू के इशारे पर सभी गाना शुरू करते हैं- “हैप्पी बर्थडे टू यू , हैप्पी बर्थडे टू यू नानी, हैप्पी बर्थडे टू यू दादी, हैप्पी बर्थडे टू यू।” नानी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। तभी नन्नू ने नानी को चाकू पकड़ाकर केक काटने को कहा। नानी ने अपने काँपते हाथों से केक के कई टुकड़े कर दिए। तभी पुनः आवाज आई “गॉड ब्लेस यू, गॉड ब्लेस यू नानी, गॉड ब्लेस यू, मे गॉड ब्लेस यू नानी।” नानी ने पूछा,” बच्चों, यह सब क्या है?”

सभी ने जवाब दिया- हम सब आपका जन्मदिन मना रहे हैं। आज ही आपका जन्मदिन है।” नानी यह सुनकर हक्की-बक्की रह गई क्योंकि उन्होंने सोचा न था कि उनका भी जन्मदिन कभी मनाया जाएगा। नन्नू ने उछलते हुए कहा, “नानी कैसा लगा हमारा उपहार?” नानी की आँखें नम हो गईं और उन्होंने सब बच्चों को गले से लगा लिया। वे खुशी से बच्चों के साथ में काँपते हुए नाचने लगी।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’