Hindi Motivational Story: बहुत पहले की बात है तब दर्पण की खोज नहीं हुई थी। एक बादशाह के दरबार में दो चित्रकार पहुँचे और नौकरी माँगी। बादशाह ने कहा-“पहले काम देखते हैं।” उसने दोनों को एक ही कमरे की आमने-सामने की एक एक दीवार चित्रकारी के लिए दे दी। बीच में एक पर्दा डाल दिया गया। एक वर्ष बाद अपने दरबारियों के साथ बादशाह दोनों का काम देखने पहुँचा। पहले चित्रकार की कलाकारी देखकर सब लोग दंग रह गए। चित्र का एक-एक हिस्सा इतना जीवंत था कि मानो बात कर रहा हो। दरबारी और ख़ुद बादशाह वाह-वाह कर उठे। एक दरबारी ने तो यहाँ तक कह दिया कि अब दूसरे की चित्रकारी देखने की आवश्यकता नहीं। लेकिन दूसरे चित्रकार की कलाकृति भी देखनी थी और जैसे ही पर्दा हटाया गया, बादशाह और दरबारी आश्चर्यचकित रह गए। सामने की दीवार पर हू-ब-हू वैसा ही चित्र बना था जैसा उन्होंने अभी देखा था। लेकिन, यह देख लोग अवाक रह गए कि इस चित्र में पहले से कहीं अधिक गहराई व चमक थी और ऐसा लगता था मानो वह दीवार के भीतर बना हो। हुआ यह था कि दूसरा चित्रकार अपनी दीवार पर कोई चित्र नहीं बना पाया था। पूरे साल वह कोई ना कोई चीज़ बनाने की कोशिश करता, लेकिन वह संतोषजनक नहीं बन पाता और वह उसे रगड़ कर मिटा देता। पत्थर की लगातार घिसाई के कारण वह दीवार चिकनी, दाग-रहित और दर्पण की तरह चमकदार हो गई थी। जब पर्दा हटा तो उसमें सामने के चित्र का प्रतिबिंब दिखा, लेकिन असली चित्र का जो भद्दापन था वह उसमें छिप गया था। बादशाह और दरबारी बोले-“वाह! इसने तो दीवार के दो हाथ अंदर चित्र बना दिया है। उसे राजचित्रकार बना दिया गया।
कई बार अपनी अयोग्यता की वजह से नहीं, मूल्यांकन करने वालों की अज्ञानता के कारण प्रतिभावान व्यक्ति सम्मान से वंचित रह जाता है। असफलता हमेशा अयोग्यता की सूचक नहीं होती।
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