jaadoo vaalee rab moral story
jaadoo vaalee rab moral story

चुनमुन के पास थी एक सुंदर सी रबर। मुलायम-मुलायम। देखने में लगती थी हँसते हुए शेर जैसी। पर थी वह रबर। खूब मिटाती थी साफ-साफ।

चुनमुन अपने दोस्तों से कहता, ”देखो-देखो, मेरी रबर तो जादू वाली है। कितना साफ-साफ मिटाती है! और देखने में भी कितनी प्यारी है! मेरे मामा जी लाए थे दिल्ली से।”

सुनकर चुनमुन के दोस्त हँसते थे। फिर कहते, ”चुनमुन, अगर जादू वाली है रबर तो इससे कहो, लिखते समय जो भी गलत हो जाए, उसे यह अपने आप मिटाती जाए। उसकी जगह सही-सही लिख दे। फिर तो तुम्हारे गणित और अंग्रेजी में भी पूरे में से पूरे नंबर आएँगे।”

चुनमुन को बात जँच गई। उसी दिन वह घर पर होमवर्क कर रहा था, तो गणित का सवाल हल करते-करते उससे गलती हो गई। पहले तो उसने सोचा कि रबर हाथ में लेकर गलत अंक मिटा दे। फिर उसके मन में आया, ”मैं रबर से ही क्यों न कहूँ? आखिर जादू वाली है मेरी रबर!’

चुनमुन ने रबर से कहा, तो सचमुच जादू हो गया। उसने जो-जो गलत लिखा था, सब मिट गया और वहाँ सही अंक आ गए। बस, चुनमुन तो उछल पड़ा!

अगले दिन मैडम ने देखा तो खूब शाबाशी दी। बोलीं, ”वाह, चुनमन, तू तो बड़ा होशियार हो गया है।”

अब तो सारी क्लास में चुनमुन के नंबर सबसे ज्यादा आने लगे।

फिर एक दिन की बात, चुनमुन का क्लास टेस्ट था, लेकिन वह अपनी रबर घर पर ही भूल गया। उस दिन उससे बड़ी गलतियाँ हुईं। वह सही जवाब ढूँढऩे की कोशिश करता, पर उसे कुछ याद ही नहीं आता था। इधर जादू की रबर की वजह से वह लापरवाह भी बहुत हो गया था। ढंग से पढ़ना-लिखना तक छूट गया था।

मैडम ने चुनमुन की गणित की कॉपी जाँची, तो इतनी गलतियाँ देखकर चकरा गईं। बोलीं, ”तू तो इतना होशियार है चुनमुन! फिर यह पेपर में क्या गड़बड़ हो गया?”

चुनमुन समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या जवाब दे। क्या वह मैडम को सारी बात साफ-साफ बता दे? आखिर उसके मुँह से निकला, ”मैडम, आगे यह नहीं होगा—कभी नहीं। प्रॉमिस मैडम, क्योंकि अब मैं जादू से नहीं, मेहनत से सारे सवालों के जवाब तैयार करूँगा।”

मैडम कुछ समझ नहीं पाईं। बस, हैरानी से चुनमुन का चेहरा देखती रह गईं।

घर आकर चुनमुन ने अचरज से देखा, जादू वाली रबर गायब हो चुकी थी। पर इस बात से उलटे उसे खुशी हुई। उसके पास एक पुरानी रबर थी, वही उसने काम करने के लिए निकाल ली। फिर वह गणित का होमवर्क करने में जुट गया। पहले तो उसे मुश्किल आई, फिर लगा, ”अरे वाह! सारे सवालों के जवाब तो खुद-ब-खुद मिलते जा रहे हैं।’

जादू वाली रबर खो गई थी, पर उसे जरा भी अफसोस नहीं था, क्योंकि अब उसे और बड़ा जादू मिल गया था। मेहनत का जादू, जो एक बार आने के बाद कभी जाता नहीं है। कभी उसके खोने का भी खतरा नहीं है!

चुनमुन ने ठान लिया था कि अब तो वह सचमुच गणित के पेपर में सौ में से पूरे सौ नंबर लाकर दिखा देगा। और फिर मैडम को सुनाएगा जादू वाली रबर के मिलने और खोने की कहानी!

‘तब वे किस कदर ताज्जुब में पड़ जाएँगी!’ सोचकर होमवर्क करता हुआ चुनमुन मन ही मन मुसकरा रहा था।