भारत कथा माला
उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़ साधुओं और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं
टीना आज स्कूल से घर लौटी तो माँ ने देखा वह उदास लग रही है, चेहरा मुरझाया-सा लग रहा है। दरवाजे से ही, मम्मी खाना लगा दो, जोर से भूख लगी है, चिल्लाकर घर सिर पर उठाने वाली टीना आज कुछ भी बोली नहीं। बस कपड़े बदलकर चुपचाप लेट गयी।
“क्या हुआ टीना? तबियत तो ठीक है?” माँ ने टीना के माथे पर हाथ रखकर पूछा, “बुखार तो नहीं है! क्या सिर दुख रहा है?”
माँ बाम लाकर टीना के माथे पर लगाती हैं, पर गुस्से में टीना माँ का हाथ हटा देती है लेकिन अब भी वह कुछ नहीं बोलती। टीना की माँ को समझ में नहीं आ रहा था कि टीना को कैसे मनाएँ? माँ ने कुछ देर सोचकर कहा, “हाँ, याद आया; कल गीत-गायन प्रतियोगिता में तुम्हें प्रथम पुरस्कार मिला था न! देखो, कितनी बड़ी ट्राफी है! मुझे तुम पर गर्व है। पार्टी तो बनती है। क्या पिज्जा मँगवाऊँ?”
“नहीं चाहिए मुझे पिज्जा-सिज्जा,” टीना रुआंसी होकर बोली।
“क्या हुआ मेरी प्यारी बेटी को?” माँ ने प्यार से टीना के सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा।
सुनते ही टीना एकाएक उठकर माँ के गले लग जाती है और रो पड़ती है। रोते-रोते हुए वह कहती है, “मम्मी, आप कहती हैं न कोयल का स्वर मधुर है और सबको भाता है।”
“हाँ।”
“कौआ का कर्कश स्वर किसी को नहीं भाता।”
“सही है।”
“नहीं, झूठ है”, टीना ने झल्लाकर कहा, “वह रश्मि तो नकियाती है तो भी उसी के पीछे सब भागती हैं, सब उसी को चाहते हैं।” टीना की माँ को उसकी नाराजगी का कारण पता चल गया।
उन्होंने कहा, “कौन रश्मि?”, वही नयी लड़की है न जिसे हर विषय में तुम्हारे बराबर का अंक मिलता है? गणित में तो उसे इस बार सर्वोच्च अंक मिला था न?”
“हाँ”, टीना थोड़ी झेंप गयी लेकिन रश्मि ने शिकायत करते हुए कहा, “पहले तो मेरी बराबरी का कोई नहीं था। अब वो रश्मि की बच्ची मास्टरनी दीदी बन कर सबको सिखाती है। अब सबको अच्छा अंक मिलता है। हँस-हँसकर मक्खन लगाकर बोलती है। उसने सबको अपनी तरफ कर लिया है।” टीना की कही बातों में की गंध आ रही थी।
माँ सब समझ गयी। ईर्ष्या के वशीभूत होकर टीना कैसी बातें करने लगी है? इसे कैसे समझाऊँ? माँ को चिंता हुई। वह बेटी को प्यार से समझाने लगी, “सुनो बेटी! मधुर स्वर सबको भाता है और कर्कश स्वर किसी को नहीं भाता यह बात सच है। तुम्हारा स्वर मीठा है और तुम अच्छा गाती भी हो, तभी तो तुम्हें प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मिला। लेकिन स्वर और बोली में फर्क है। मीठा स्वर ईश्वर का वरदान है और बोली मनुष्य का व्यवहार का अंग है जिसे बनाने बिगाड़ने में मनुष्य के अपने हाथ में है। सुधरी, सुलझी हुई बोली नम्रता का अंग है जो सबको भाती है। उन्होंने आगे कहा, “तुमने ही कहा न कि रश्मि के आने से पहले सिर्फ तुम्हें सर्वोच्च अंक मिलता था और किसी को अच्छा अंक नहीं मिलता था।
“हाँ माँ, यह सच है।”
टीना की इस बात पर माँ के कहा- अब रश्मि सबकी मदद करती है तो सबको अच्छे अंक मिलते हैं। है न?” इसका मतलब यह है कि तुम अपनी सहपाठी मित्रों की पढ़ाई में मदद नहीं करती हो जबकि रश्मि करती है। इसी कारण वह सबकी प्यारी है। वह नकियाती है जरूर लेकिन उसकी बोली में नम्रता है जो तुम्हारी सोच में मक्खन लगाना है। ऐसी बातें नहीं करते बेटी। अशोभनीय है। ओछी लगती है।
माँ टीना का चेहरा दोनों हथेली में ले लेती है। टीना की आँखों में देखकर कहती हैं- तुम अगर ध्यान से सुनोगी तो कौआ का स्वर भी मधुर लगेगा। वह किसी का कुछ बिगाड़ता नहीं, बस ईश्वर की दी हुई आवाज से अपने साथियों को पुकारता है और उसकी आवाज साथियों को भाती भी है क्योंकि उसकी पुकार में मित्रता का संदेश है, प्यार है।”
अब समझी स्वर और बोली में क्या अंतर है?” टीना की आँखें झुक गई। उसने हाँ में सिर हिला दिया। माँ ने उसे छाती से चिपटा लिया। टीना को अपनी भूल का एहसास हुआ और वह सोचने लगी कि वह कितनी खुदगर्ज है। खुद को सबसे होशियार सिद्ध करने के लिए दोस्तों के कुछ पूछने पर भी वह उनको कुछ नहीं बताती थी और न ही समझने में उनकी मदद करती थी। दोस्तों के पूछने पर “तुम लोग कितने कच्चे दिमाग वाली हो”, यही कहकर उन्हें उलाहना देती थी।”
टीना का रोते-रोते बुरा हाल हो गया, यहाँ तक कि माँ का कुर्ता भीग गया। माँ समझ गयी टीना पछता रही है। उन्होंने टीना को चुप करते हुए कहा, “ना, ना, नहीं रोते।”
“मम्मी, मैं बहुत बुरी हूँ,” लेकिन अब से सबकी मदद करूंगी, शिष्ट बनूँगी”, टीना सिसकते हुए कहा।
“मेरी बहादुर बच्ची”, माँ ने टीना का माथा चूमा और कहा, “किसने कहा तुम बुरी हो? अपनी गलती मान लेना तो बहादुरी है।” माँ खुश होकर मुस्कराती हैं। टीना के मन से सारे बोझ उतर गए। वह मुस्कराकर कहती है- माँ, मुझे बहुत भूख लगी है।
भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’
