Jataka Story in Hindi : पुराने जंगल में एक भैंस रहती थी। वह बड़ी दयालु थी। कभी किसी का मन नहीं दुखाती। वहीं पास ही पेड़ पर एक दुष्ट बंदर रहता था। जब भी वह देखता कि भैंस सो रही है तो वह पेड़ से उसकी पीठ पर छलाँगें लगाता। कभी-कभी भैंस की पूँछ पकड़ कर हवा में घुमा देता। हालांकि इससे भैंस को दर्द भी होता था, पर वह बंदर से कुछ न कहती, उसे उसकी गलतियों के लिए माफ कर देती।
पेड़ पर रहने वाले यक्ष से यह सहा नहीं गया तो उसने भैंस से कहा – ‘‘तुम बंदर को उसकी दुष्टता के लिए सजा क्यों नहीं देतीं? तुम कितनी बड़ी और मजबूत हो। आसानी से उसे सबक सिखा सकती हो। भैंस ने उत्तर दिया- हे दिव्य आत्मा! मैं किसी को तकलीफ देना पसंद नहीं करती। भगवान खुद उसे उसके किए की सजा देंगे।’’


एक दिन वह भैंस कहीं गई हुई थी। तभी एक जंगली भैंस वहाँ आई और उसी पेड़ के नीचे बैठ गई। दुष्ट बंदर को पता नहीं था कि वह जगली भैंस है। हमेशा की तरह वह धड़ाम से भैंस की पीठ पर कूदा। जंगली भैंस तो सदमा खा गई।


वह गुस्से के मारे पगला गई थी। उसने बंदर पर हमला कर दिया और अपने लंबे नुकीले सींगों से उसकी जान ले ली। दुष्ट बंदर का बहुत बुरा अंत हुआ।
शिक्षा:- दूसरों को प्यार, खुशी और आदर दो, तुम दूसरों को जो दोगे, बदले में वही पाओगे

