googlenews
कहानी

(समय सुबह दस बजे)

हलो? 

हलो! मैं बोल रही हूं।

हलो! हॉ बोलो? तुम्हारी आवाज ठीक से नहीं आ रही है। बार-बार कट रही है।

तुम्हारी आवाज भी कुछ बदली-बदली सी लग रही है।

शायद, फोन में कुछ गड़बड़ है या लाइन खराब है कैसे खर-खर कर रहा है, कहीं तुम्हें जुखाम तो नहीं?

नहीं, नहीं फोन में ही कुछ गड़बड़ है। हॉ बोलो-सब ठीक तो है ना।

हॉ सब ठीक है। मैं यह कह रही थी कि तुम्हारे उधर नल आये क्या?

हॉ, आये थे आज तो तीन बजे ही नल आ गए थे।

दिन के तीन बजे?

नहीं, रात के तीन बजे।

राते के तीन बजे (दुहराते हुए) फिर पता कैसे चला? उस समय तो सब सोये हुए होंगे। वो क्या है कि हम शाम को नल खुले छोड़ देते हैं। नल खुले होने से जब नल आते हैं तो पानी के गिरने की आवाज से या नल की सूँ-सूँ से नींद खुल जाती है और हम उठ जाते हैं, पानी भरने के बाद फिर सो जाते हैं। वैसे तो रोज नल चार बजे आते हैं।

दिन के चार बजे?

अरे नहीं, राते के चार बजे। अब तो नल के चार बजे आने से, चार बजे उठने की आदत ही पड़ गई है। चार बजे अपने आप नींद खुल जाती है किंतु आज नल रात के तीन बजे आ जाने के कारण आंख नहीं खुली और चालू नल बहते रहे, बहते रहे जब चार बजे रोज की तरह नींद खुली और मैंने पलंग से पांव नीचे रखे कि पांव के नीचे पानी ही पानी भरा था। मैंने लाइट जलाई और देखा तो सारे कमरे तालाब बने हुए थे और चीजें पानी पर तैर रहीं थीं। आनन-फानन में मैंने पहले पीने का पानी भरा और फिर सारे कमरों में भरे पानी को निकाला। इस काम में मुई सुबह हो गई।

किंतु हमारे इधर तो एक बूँदे पानी नहीं आया, सूं-सूं भी नहीं, सभी नल खुले पड़े हैं।

क्या कारण हो सकता है? नल न आने का।

शायद, पादप लाइन फूट गई होगी, जैसा कि हमेशा होता है।

पाइप लाइन फूट जाने के बाद भी नल तो आते हैं भले ही मरे-मरे से आएं..

तो फिर हो सकता है लाइट नहीं हो जिससे टंकी नहीं भरी हो।

हो सकता है किन्तु, पानी का टैंकर भी तो नहीं आया।

टैंकर कैसे आएगा? कोई कम्प्लेंट करेगा तब न। तो फिर पानी का क्या किया?

क्या करती। कल का जो थोड़ा बहुत बचा था, उसी से काम चला रही हूं।
किसी को यहां भेज देती, यहॉ से पानी ले जाता।
देखती हूँ, शायद-ग्यारह बारह बजे नल दे दे यदि तब तक नल नहीं आये तो फिर तुम्हारे यहॉ इनको पीने का पानी लेने भेजॅूंगी । इनके अलावा तो कोई है नहीं।

क्यों ? बच्चे…

वे कहॉ सुनते हैं।

अरे हॉ, याद आया,

हलो, गेहूं में, इंजेक्शन डाल दिए न?

नहीं, इस साल गेहूँ कहां लिए? पिछले साल के पड़े हैं।
किन्तु, चार दिन पहले तो बताया था । कि गेहूं में डालते हैं इन्जेक्शन विन्जेक्शन नहीं। भाई साहब तो ऑफिस गए होंगे।

कैसी बात कर रही हो? इन्हें रिटायर हुए चार साल हो गए।

चार साल (आश्चर्य से) अरे अभी, कुछ दिन पूर्व तो तुम बता रही थी कि भाई साहब के रिटायरमेंट के पॉच साल बचे हैं। कुछ ही दिन में पांच साल भी हो गए, रिटायर भी हो गए और रिटायरमेंट के चार साल भी गए। और बच्चे?

सब अपनी -अपनी घर गृहस्थी संभाल रहे हैं।

हाय, राम। अभी कल तो कॉलेज में पढ़ रहे थे। आज नौकरी भी लग गई शादी भी हो गई और घर गृहस्थी भी संभालने लगे है। यह तुम बहकी-बहकी बात कर रही हो ‘पुष्पा’

क्या? पुष्पा? मेरा नाम ‘‘पुष्पा”नहीं’ मोहिनी है, ‘‘मोहिनी”।

येल्लो । तुमने तो अपना नाम भी बदल लिया।

क्या बात कर रही हो ‘‘रमा” मैंने नाम बदल लिया, मैं नाम क्यों बदलूंगी, मेरा तो जन्म नाम ही ‘‘मोहिनी” है।

यह मुझे (सोचती है) ‘‘रमा” कह रही है, मैं तो ‘‘सविता” हूँ। जरूर कुछ गड़बड़ है। कहीं रांग नम्बर तो नहीं लग गया (फोन पर) तुम ‘‘पुष्पा” नहीं हो?

नहीं, ‘‘ मोहिनी” हूँ।

ये फोन नं. 2354763 नहीं है।

नहीं ये 2357463 है।

ओह, रांग नंबर (फोन रखते हुए)

(समय ग्यारह बजे।)