Hindi Social Story: कमरे में चारों तरफ हल्की नीली रोशनी छाई हुई थी और वहाँ जो म्यूजिक बज रहा था, उसे सुनने के बाद कोई पागल भी यह अंदाजा लगा सकता था कि वह म्यूजिक किसी के भी तन बदन में आग लगा देने के लिए काफी था।
सामने जो शानदार बेड पड़ा हुआ था,उस पर एक ऐसी शानदार और तौबा शिकन नौजवान लड़की पीठ के बल लेटी हुई थी। जिसका दूधिया बदन वहाँ की हल्की रोशनी में भी हीरे की तरह चमक रहा था। वह उस समय सिर्फ टू पीस में मौजूद थी। उसी के सामने मौजूद था वह नौजवान, जो उस लड़की के जिस्म को एकटक निहार रहा था।
वह युवक अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए उस लड़की पर झपट पड़ने के लिए एकदम तैयार था और उसकी उस इच्छा को बेड पर मौजूद उस लड़की ने पूरी तरह से भांप लिया था। तभी तो वह अपनी खिल खिलाती आवाज में बोल उठी-
“तुम तो मुझे ठीक ऐसे देख रहे हो जैसे बाज़ माँस के टुकड़े को देखता है।”
युवक बोला-: “बात यही है स्वीटहार्ट लेकिन…”
“अच्छा, एक बात बताओ! तुमने कभी माँस खाया है?”
खेल खिलाती हुई उसे तौबा चिकन हसीना में युवक की बात बीच में ही काटते हुए कहा तो युवक जल्दी से बोला-: “हाँ, क्यों नहीं? मैं तो पक्का मांसाहारी हूँ!”
“मैं उस गोश्त की बात नहीं कर रही। मैं गरम गोश्त की बात कर रही हूँ। क्या तुमने कभी गरम गोश्त का स्वाद चखा है?”
“मैं समझा नहीं!” युवक ने संशय से पूछा तो युवती फिर खिलखिलाई- “ऐसे नहीं समझोगे, तुम आगे बढ़ो और गरम गोश्त का स्वाद चखो!”
युवक -: “ओह! अब समझा।”
युवती का इशारा समझते ही वह नौजवान ठीक वैसे ही उस युवती पर झपटा जैसे वह सचमुच का बाज़ हो और बेड पर पड़ी वह हसीना,कोई माँस का टुकड़ा उसने अपने दाँत उस युवती की मखमली पीठ के मांस गड़ा दिए।
“आssह!”-एक चीख सी उस युवती के कंठ से निकली लेकिन उस चीख में दर्द कहीं भी नहीं था। वह चीख तो मस्ती से भरी हुई थी। उस मस्ती से जो तब आती है जब किसी की मनचाही मुराद पूरी हो जाती है। नौजवान ने एक बार फिर अपने दाँत उसकी पीठ पर गड़ाये तो वह मस्ती के आलम में लगभग तिलमिलाती हुई बोली-
लड़की – “रुको! हमारे बीच अभी कपड़ों की दीवार है। अगर तुम भरपूर एंजॉय चाहते हो तो तुम्हें मेरी तरह नेक्ड होना पड़ेगा।”
लड़की की बात सुनकर नौजवान ठिठक गया लेकिन दूसरे ही पल उसने एक एक करके अपने जिस्म से सारे कपड़े उतार फेंके और फिर उसने अपने फड़फड़ाते हुए होंठों से बेड पर पड़ी हुई लड़की की दूध जैसी गोरी जाँघो पर जमा दिये।
“उफ्फ आहहहह च्च।”
और इसी के साथ उस यूवती की एक बहुत कामुक सिसकारी कमरे में गूँज उठी। नौजवान धीरे-धीरे अपने होठों से उसकी जाँघों को चूमता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ने लगा।
“आह उफ्फ! अब तो तुम पक्के खिलाड़ी बन गए हो।”
उसके हाथ अब लड़की के पूरे जिस्म पर फिसलने शुरू हो चुके थे। लड़की का दूध जैसा संगमरमरी बदन उसे जैसे पागल बनाए जा रहा था। आखिर उसने उस लड़की की अंगवस्त्रो को अपने हाथ से पकड़कर नीचे की तरफ खींचता हुआ बोला- “तुमने सही कहा हमारे बीच कपड़े की दीवार नहीं होनी चाहिए कहीं भी नहीं होनी चाहिए।”
और इसी के साथ वह एक झटके से लगभग पूरा उसे युवती पर छा गया । अब वह लड़की के ऊपर पूरी तरह से सवार था।
लड़की कामुक अंदाज में हँसकर बोली- “कहने को तुम पूरे माँसाहारी हो लेकिन तुम्हें माँस खाना नहीं आता।”
कहते हुए लड़की ने उस जवान को बुरी तरह से अपनी बाहों में जकड़ लिया और मद-मस्त आवाज में बोली
– “प्लीज खाकर दिखाओ ना उस ढंग से जैसे मैं चाहती हूं “
यूवती की बात सुनकर वह नौजवान अचंभित रह गया। उसने हैरानी से लड़की की तरफ देखा लेकिन उसे समझ नहीं आया कि आखिर वह कहना क्या चाहती थी। फिर भी वह दोबारा उसे बुरी तरह से चूमने चाटने लगा। वह रह रहकर अपने दाँतों को भी उस युवती के जिस्म में गड़ा रहा था और यही कारण था कि उस यूवती की मस्ती सातवें आसमान पर पहुंचती जा रही थी-
“उफ्फ आह! और…और जोर से काटो, कैसे माँसाहारी हो तुम! तुम्हें तो माँस खाना भी नहीं आता।”
मस्ती में पागल होते हुए उस लड़की ने बोला तो,नौजवान भी पागलों की तरह उस पर दाँत जमाने लगा। ऐसा करने पर वह लड़की बुरी तरह से तड़पने छटपटाने लगी। नौजवान अपनी पोजीशन बदल बदलकर उसके साथ खेल रहा था वह खेल जिसे सारी दुनिया प्यार के खेल के नाम से जानती हैं । आखिर में उसने अपने जलते हुए होंठ लड़की के होठों पर जमा दिए और देर तक लिप लॉक करता रहा। कुछ पल ऐसे ही बीते और फिर… और फिर जो हुआ वह एकदम अप्रत्याशित था, अचानक उसे युवक के कंठ से एक तेज चीख निकल पड़ी और जैसे ही ऐसा हुआ वैसे ही उस लड़की के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान नृत्य करने लगी जो उस समय आती है जब किसी का सोचा हुआ पूरा हो जाता है।
पल भी नहीं बीता था कि वह युवक बेड पर ठीक वैसे ही छटपटा रहा था जैसे जल बिन मछली छटपटाती है।
इधर उस लड़की ने अपने होठों पर चिपकी एक पतली सी झिल्ली को उतारा और बोली-” मेरे होठों को पीने के चक्कर में तू वह जहर पी गया जिसका नाम पोटेशियम साइनाइड है, वह पोटेशियम साइनाइड जो कांट्रैक्ट किलर सानिया का सबसे बड़ा हथियार है, तुझे मरने के 50 लाख रुपए की सुपारी ली थी मैंने, और मैंने अपना काम बखूबी कर दिया है।”- कहते हुए सानिया नाम की उस हसीना ने अपने कपड़े पहने और अपने चेहरे पर विजय मुस्कान पहनकर बाहर की तरफ निकल गई।
