Hindi Story: मुसद्दी लाल जैसे ही अपनी बीवी को डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर आये तो वहां के डॉक्टर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि हम लोग दुनिया को समझाते हैं कि बच्चे कम से कम पैदा करो। एक तुम हो कि अस्पताल में काम करते हुए अपनी बीवी को पांचवीं बार डिलीवरी के लिये यहां लेकर आ रहे हो।
मुसद्दी लाल ने अपने तेवर थोड़े टेढ़े करते हुए कहा कि डॉक्टर साहब आए दिन तो आप अस्पताल में कोई न कोई बहाना बना कर हड़ताल कर देते हो। जिस दिन अस्पताल की हड़ताल खुलती है, उस दिन बस वाले हड़ताल कर देते हैं। अब रोज-रोज घर बैठेंगे तो बच्चे तो होंगे ही। आए दिन किसी न किसी विभाग की हड़ताल के बारे में छपी खबरें देख कर ऐसा लगता है कि अंग्रेज लोग हमें आजादी के साथ-साथ बिना किसी ठोस वजह के हड़ताल करने का हक भी मुफ्त में दे गये हैं।
दुनिया के वैज्ञानिकों ने इतनी तरक्की कर ली है बरसों पहले यह अंदाजा लगा कर बता देते हैं कि किस समय देश में आंधी-तूफान या भूचाल आयेगा, देश में कब सूखा पड़ेगा और कब बरसात होगी? लेकिन आज तक कोई भी माई का लाल यह अंदाजा नहीं लगा पाया कि सरकार के किस विभाग में कब हड़ताल हो जायेगी? इसलिये शायद देश में रहने वाले सभी समझदार लोग कहीं भी आने-जाने के लिये समय से पूर्व ही अपनी यात्रा का रिजर्वेशन करवा लेते हैं। इन्हीं बातों के मद्देनजर मुसद्दी लाल जी ने भी इस साल गर्मियों की छुट्टियों का आनंद लेने के लिये सर्दियों में ही अपनी बुकिंग करवा ली। लेकिन वो शायद यह नहीं जानते कि इतना सब कुछ करने के बावजूद हमारे देश में भगवान भी यह गारन्टी नहीं दे सकते कि वो अपना सफर योजना मुताबिक ठीक से पूरा कर पायेंगे या नहीं? मुसद्दी लाल जी के प्लान को भी पहला धक्का उस समय लगा जब सारा सामान पैक करके टैक्सी स्टैंड पर पहुंचे। उन्हें मालूम हुआ कि आज सारे शहर में ऑटो-टैक्सी वाले हड़ताल पर है। कई घंटे परेशान होने के बाद एक टैक्सी वाला कई गुना अधिक पैसे लेकर बड़ी मुश्किल से रेलवे स्टेशन तक छोड़ने को राजी हुआ।
टैक्सी ड्राइवर ने अपनी जन्मों पुरानी प्रथा निभाते हुए आधे रास्ते में पहुंचते ही गाड़ी पेट्रोल पम्प की ओर मोड़ दी। मुसद्दी लाल जी के चेहरे का रंग उस समय पीला पड़ना शुरू हो गया जब उन्होंने सुनसान पड़े पेट्रोल पम्प के सभी कर्मचारियों को वहां क्रिकेट खेलते देखा। टैक्सी ड्राइवर ने भी नौटंकी करते हुए कहा कि मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा कि आज ऑटो-टैक्सी वालों के समर्थन में पेट्रोल पम्प वालों ने भी हड़ताल कर रखी है। इतना सुनते ही मुसद्दी लाल जी अपनी सभी मर्यादाओं को ताक पर रख कर टैक्सी ड्राइवर की मां-बहन को सच्चे दिल से याद करने लगे। बहुत देर तक सड़क के बीचों-बीच पागलों की तरह भटकने के बाद उन्हें अपने पड़ोसी की एक गाड़ी दिखाई दी। सारे परिवार ने उसे देखते ही इतना हो-हल्ला मचाया कि उस गाड़ी के साथ अन्य कई गाड़ियां भी सड़क के बीच में ही रुक गई। मुसद्दी लाल जी ने उस समय राहत की सांस ली, जब उन्हें यह मालूम हुआ कि वो अपने पिता को लेने रेलवे स्टेशन ही जा रहा है। बिना एक पल की देरी किये मुसद्दी लाल ने अपने बच्चों के साथ सारा सामान उसकी कार में ठूंस दिया। अभी मुसद्दी लाल जी का पसीना सूखा भी नहीं था कि सामने चौराहे पर भारी भीड़ को देख उस पड़ोसी को गाड़ी वहीं रोकनी पड़ी।
मुसद्दी लाल जी ने जैसे ही थोड़ी जांच-पड़ताल की तो मालूम हुआ कि फिल्म- इन्डस्ट्री के सभी खलनायकों ने देश के नेताओं द्वारा रोजी-रोटी छीनने के विरोध में हड़ताल की हुई है। मुसद्दी लाल ने एक मोटी-सी गाली का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यह लोग लाखों-करोड़ों रुपये कमाने के साथ दुनिया भर की रंगरेलियां मनाते हैं, फिर इन्हें हड़ताल करने की क्या जरूरत आन पड़ी। उनके पड़ोसी ने ठंडे दिमाग से बताते हुए कहा कि आज सुबह ही मैंने इन लोगों की हड़ताल के बारे में समाचार पत्र में पढ़ा था। इनकी मांग यही है कि जो कुछ गुंडागर्दी के काम यह लोग फिल्मों में करते थे, वो सभी हमारे प्रिय नेताओं ने करने शुरू कर दिये हैं। मुसद्दी लाल जी ने कहा कि मैं तुम्हारी बात ठीक से समझा नहीं कि तुम कहना क्या
चाहते हो?
पड़ोसी ने समझाते हुए कहा कि हमारी फिल्मों में खलनायक का मुख्य काम होता है चोरी, डकैती, लूट-पाट, लड़कियों को छेड़ना आदि। अब यह सारे काम हमारे नेता खुल्लमखुल्ला कर रहे हैं। ऐसे में जनता पैसे खर्च करके यही सब कुछ देखने थियेटर में क्यूं जायेगी? इन्हीं सब कारणों से इनके रोजगार को भारी धक्का लगा है। कुछ बड़े-बड़े गब्बर सिंह जैसे खलनायक जो इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पायें वो तो पतली गली से होकर अल्ला मियां के घर निकल लिये बाकी सभी हड़ताल कर रहे हैं। खैर आप चिंता मत करो, मैं दूसरे रास्ते से आपको रेलवे स्टेशन पहुंचा दूंगा। भीड़भाड़ से भरी तंग गलियों से होकर जब मुसद्दी लाल रेलवे स्टेशन पहुंचे तो उनकी पत्नी ने भगवान का शुक्रिया करने की बजाए पड़ोसी का कोटि-कोटि धन्यवाद किया। जैसे ही पड़ोसी गाड़ी लेकर मुड़ा तो मुसद्दी लाल जी की नजर सामने आ रही लाल झंडे उठाये और नारे लगाते हुई भीड़ पर पड़ी। यह लोग बिना किसी वजह के सड़क पर आने-जाने वाली गाड़ियों को पत्थर मार-मार कर तोड़ रहे थे। एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि रेलवे के एक कर्मचारी के साथ यात्री द्वारा मारपीट के कारण सभी गाड़ियां रद्द कर दी गई है।
यह सब कुछ देख मुसद्दी लाल जी ने पूरे देश की व्यवस्था को कोसना शुरू कर दिया। उनकी पत्नी जो अभी तक बिल्कुल चुप बैठी थी, उसने कहा कि क्या आपने कभी सोचा है कि पिछले एक साल में आप लोगों ने कितनी बार हड़ताल की है? उस समय कभी आपके मन में यह ख्याल आया है कि आम जनता को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें हैरान, परेशान और मजबूर करना कहां तक उचित है। एक बार कभी सच्चे मन से अपने दिल में झांकने का प्रयास करो तो तुम्हें अपनी आत्मा की असली परछाई दिखाई देगी। पूज्य बापू ने एक हड़ताल तथा धरने का जो सबक अंग्रेजों के कुशासन के खिलाफ दिया था, वो ही आज हमारे लिये अभिशाप बन गया है। यह सुनते ही जौली अंकल के मन से यही आवाज निकली कि जब योग्यता, ईमानदारी और धैर्य से हर समस्या का हल निकल सकता है तो फिर बार-बार हड़ताल करने से क्या फायदा?कामयाब होने के लिये एक बात सदा याद रखो कि कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
