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 जब मैं छोटी थी, तभी से मुझे गाने सुनने और गुनगुनाने का शौक है, जो आज भी बरकरार है। दादी-अम्मा मान जाओ, बच्चे मन के सच्चे, चुन-चुन करती आई चिडिय़ा जैसे गाने मेरे फेवरेट थे। मम्मी को गाना गाना और गुनगुनाना अच्छा नहीं लगता था। वो अक्सर मुझे डांटती। एक दिन किसी बात पर मेरी दादी पूरे घर के लोगों से नाराज हो गईं। मम्मी-पापा, सबने मना कर देख लिया पर बात नहीं बनी। तभी न जाने मुझे क्या सूझी, ‘दादी-अम्मा दादी-अम्मा मान जाओ वाला गीत जो मुझे पूरा याद था, दादी के आगे गाने लगी। मेरे भोलेपन से गाए गीत ने जादू किया और दादी की नाराजगी दूर हो गई। उन्होंने मुझे प्यार से गले लगाया तो सब मुस्कुरा दिए। मेरी मम्मी ने फिर मुझे कभी नहीं डांटा।