बालमन की कहानियां बिहार
Imandari-Balman ki Kahaniyan

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

“पापा आज आपकी भी छुट्टी है और मेरी भी। आज तो खाने पर बाहर चलना ही पडेगा।” गोल जिद पर अड गया।

रमेश बाबू समझाने लगे-“अच्छे बच्चे जिद नहीं करते। बाहर का खाना खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है और तुम्हें तो बड़े होकर सैनिक बनना है न! तो सेहत का…।” आगे वे कुछ बोल पाते, इससे पहले ही गोलू मासूमियत से बोल पड़ा-“पापा एक बात पूछू?”

“हाँ बेटा जरुर पूछो।” पापा ने सिर हिलाते हुए कहा।

“पापा, आप ईमानदारी से मेहनत नहीं करते हो क्या?” गोलू ने सवाल भरी निगाहों से पूछा।

“हाँ करता हूँ, पर तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो?” रमेश बाबू ने चौंकते हुए पूछा।

“पापा, कल मेरे मास्टर जी बता रहे थे कि अगर ईमानदारी से मेहनत करोगे, तो एक दिन बड़े आदमी बनोगे। तुम्हारे पास हर खुशी होगी। उधर बिट्टू के पापा को देख लो, हर संडे को होटल, मॉल कहाँ-कहाँ नहीं ले जाते हैं। शहर के बड़े स्कूल में पढ़ाते भी हैं। जबकि आप भी क्लर्क हैं और उसके पापा भी….।” गोलू ने मासूमियत भरा प्रश्न पूछ लिया था।

रमेश बाबू नि:शब्द हो गये और उस सात साल के बच्चे को समझाने की तरकीब ढूंढने लगे-“बेटा, ईमानदारी से मेहनत करता हूँ, इसीलिए तुम्हें खुश नहीं रख पा रहा हूँ। शहर के बड़े स्कूल में नहीं पढ़ा पा रहा हूँ। अब तुम्हें कैसे समझाऊँ कि बिटू के पापा कितने ईमानदार हैं….!”

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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