स्वामी रामतीर्थ लन्दन में प्रवचन कर ही रहे थे कि वहाँ पंडाल में एकत्रित लोगों ने प्रवचन के दौरान टोकते हुए कहा- “क्या यही भारतीय संस्कृति है कि आपके भगवान कृष्ण की बंशी की आवाज सुनकर गोपियाँ अपनी सुधि भुलाकर बाल-बच्चों, बड़े-छोटे परिजनों का त्यागकर उन तक पहुँच जाती हैं? क्या वे अपनी मर्यादा नहीं खो देतीं?” स्वामी रामतीर्थं कुछ न बोले और चुपचाप अपने आवास को चले गये। दूसरे दिन पंडाल में लोग इस उत्सुकता से एकत्रित हुए कि स्वामीजी कुछ-न-कुछ तो पूछे गये प्रश्न का उत्तर देंगे ही। जब श्रोता तन्मय होकर मंत्र मुग्ध हुए सुन रहे थे कि प्रवचन करते-करते स्वामी रामतीर्थ एकाएक मंच से उठकर जाने लगे। श्रोताओं ने उनका पीछा कर लिया। श्रोताओं ने उन्हें घेरकर यकायक मंच से उठकर जाने का कारण पूछा।
स्वामीजी ने उनसे अपने पीछे-पीछे चलने का कारण पूछा, “मुझमें ऐसी कौन-सी शक्ति है, जो आप लोग मेरा पीछा करते आ रहे हैं?”
‘आप का प्रवचन!’ श्रोताओं ने कहा ही था कि स्वामी रामतीर्थं ने कहा- “मैं तो अदना-सा आदमी हूँ… मैं तो भगवान कृष्ण की लीलाओं का गुणानुवाद कर रहा था- जब आप लोगों को मेरे प्रवचन में इतनी अनुरक्ति है तो भला उन गोपियों की स्वयं भगवान कृष्ण द्वारा बजायी गयी बंशी की आवाज सुनने के लिए कितनी अनुरक्ति जगी होगी…?”
एक फकीर ने एक सम्राट के द्वार पर दस्तक दी। सुबह का वक्त था और सम्राट बगीचे में घूमने निकला था। संयोग की बात थी कि सामने ही सम्राट मिल गया। फकीर ने अपना पात्र उसके सामने कर दिया। सम्राट ने कहा, “क्या चाहते हो?”
फकीर ने कहा, “कुछ भी दे दो। शर्त एक है कि मेरा पात्र पूरा भर जाए। मैं थक गया हूँ। अब भिक्षा माँगने की इच्छा नहीं होती और यह पात्र भरता ही नहीं है।”
सम्राट हँसने लगा और कहा, “तुम पागल मालूम होते हो। इस छोटे से पात्र को भरने में ऐसी क्या समस्या है?” सम्राट ने अपने सेवकों से कहा, “लाओ, अशर्फियों से भर दो, इस फकीर का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दो।”
फकीर ने कहा, “मैं फिर याद दिला रहा हूँ, अभी भी रुक सकते हैं। अगर आप इसे भरना शुरू करते हैं तो यह शर्त है कि जब तक यह पात्र भरेगा नहीं, आप रुकेंगे नहीं।”
सम्राट ने हंसते हुए कहा, “तू घबरा मत। मेरे कहे पर संशय कैसा? इसे सोने, हीरे-जवाहरात से भर देंगे।”
ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–Anmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)
