मैं अपनी दीदी, जीजाजी, उनके देवर व ननद के साथ पिकनिक मनाने गई। वहां सब मस्ती कर रहे थे। तभी जीजाजी, दीदी और उनके देवर जल्दी से पहाड़ पर चढ़ गए। मैं भी चढ़ गई, बस उनके पास पहुंचने ही वाली थी कि मेरा पैर फिसलने लगा। उसी वक्त मैंने अपनी दीदी के देवर से, जो कि अविवाहित थे,कहा, देखते क्या हो, मेरा हाथ क्यों नहीं थाम लेते?

इतना सुनते ही सब लोग हंसने लगे और दीदी के देवर ने दीदी से कहा, देखो, आपकी बहन क्या कह रही हैं। अपनी कही बात का अर्थ समझी तो मैं शर्म से लाल हो गई और पिकनिक से लौटने तक उससे आंखे चुराती रही।

  march 2008