Dizziness in Women: अक्सर महिलाओं में सिरदर्द, कमजोरी और चक्कर आने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है, इसके कई कारण हैं। उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या बढ़ जाती है। यदि आपको भी बार-बार चक्कर आना और कमजोरी महसूस होती है तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर को दिखाएं।
सुबह उठते ही सिर दर्द होना, नीचे झुकने पर चक् कर आना, हमेशा थका हुआ महसूस
करना जैसे लक्षणों का अधिकांश महिलाएं सामना करती हैं। हालांकि चक् कर आना कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन कई बार ये किसी बड़ी बीमारी के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं। चक्कर को कई बार पोषक तत्वों की कमी, प्रेग्नेंसी, सर्वाइकल, एनीमिया और स्ट्रैस जैसे कारणों से भी जोड़ा जाता है। लेकिन यदि ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका सही उपचार कराना बेहद जरूरी होता है। कई बार चक्कर आना बेहोशी का भी कारण बन सकता है। तो चलिए जानते हैं कि महिलाओं को चक्कर आने के पीछे क्या कारण जिम्मेदार हो सकते हैं साथ ही जानते हैं इस स्थिति से निपटने के तरीकों के बारे में।
किन कारणों से आते हैं चक्कर पोस्टुरल हाइपोटेंशन
पोस् टुरल हाइपोटेंशन को ऑर्थोस् टैटिक हाइपोटेंशन के रूप में भी जाना जाता है। ये अस् थायी चक् कर है जो बैठने और खड़े होने पर महसूस हो सकते हैं। इसका मुख् य कारण ब् लड प्रेशर का अचानक कम या बढ़ना हो सकता है। ये स्थिति मेनोपॉज और पीरियड के दौरान ट्रिगर कर सकती है।
सर्कुलेटरी प्रॉब्लम
ऐसी स्थितियां जो शरीर में रक्त प्रवाह या हृदय को प्रभावित करती हैं वो चक् कर आने के लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसके सामान्य कारणों में अनीमिया, हार्मोनल चेंजेज, डिहाइड्रेशन और खून के थक्के शामिल हैं। ये समस्या अधिकतर महिलाओं को मेनोपॉज की स्थिति में होती है।
तनाव और घबराहट
स्ट्रैस और एंग्जाइटी दो ऐसे शब्द हैं जो हर किसी की जिंदगी का हिस् सा हैं लेकिन महिलाएं इसका अधिक शिकार होती हैं। तनाव और घबराहट का हमारे मस्तिष् क पर गहरा प्रभाव पड़ता है जिस वजह से चक्कर आना, पैनिक अटैक, तनाव व डिप्रेशन जैसे विभिन्न लक्षण महसूस हो सकते हैं। इन कारणों को आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है लेकिन कुछ मामलों में ये लक्षण खतरनाक भी हो सकते हैं।
सर्वाइकल की समस्या
सर्वाइकल के अलावा मोच, खिंचाव, चोट और डिस्क डिजीज की समस् या आपके जोड़ों, मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम को बाधित कर सकती है। इन लक्षणों के परिणामस्वरूप आपको चक्कर महसूस हो सकते हैं। सर्विकोजेनिक चक्कर सूजन, अर्थराइटिस, ब्रेन डिसऑर्डर और क्रॉनिक नेक पेन की वजह से हो सकता है। इस स्थिति में फिजियोथैरेपी अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकती है।
प्रेग्नेंसी में चक्कर आना
प्रेग्नेंसी के दौरान चक्कर आना एक आम समस्या है, जिसका अधिकांश महिलाएं सामना करती हैं। इस दौरान महिलाओं को चक्कर और बेहोशी महसूस हो सकती है। प्रेग् नेंसी में शरीर में होने वाले शारीरिक बदलाव, हाई बीपी, हार्ट रेट का बढ़ना, वजन बढ़ना या किसी दवा के साइड इफेक्ट की वजह से चक्कर आ सकते हैं। कई महिलाओं को चक् कर के साथ मितली और उल्टी भी आ सकती है।
हीमोग्लोबिन की कमी
भारत में अधिकांश युवतियां या महिलाएं हीमोग्लोबिन या एनीमिया से जूझ रही हैं। शरीर में हीमोग् लोबिन की कमी चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षणों को बढ़ावा देती है। पोषक तत्वों की कमी, प्रेग् नेंसी और हैवी पीरियड्स की वजह से महिलाओं का हीमोग् लोबिन पुरुषों की अपेक्षा काफी कम होता है। हीमोग्लोबिन कम होने पर सिरदर्द, थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
सोते समय चक्कर आना
कई महिलाओं को बिस्तर पर लेटते या सोते समय चक्कर आने लगते हैं। इस समस् या को बीपीपीवी कहा जाता है, जिसमें करवट बदलने के साथ ही चक्कर आने शुरू हो जाते हैं। बीपीपीवी की समस्या मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों को होती है जो सिर पर चोट, कान में इंफेक् शन या अधिक आराम करने की वजह से हो सकती है।
पोषक तत्वों की कमी
महिलाएं शुरू से ही अपने वजन और लुक को लेकर सजग रहती हैं। यही कारण है कि वे डाइट और फास् िटंग का सहारा लेती हैं। हालांकि डाइट और इंटरमिटेंट फास िटंग वेट कम करने का अच् छा ऑह्रश्व शन है लेकिन कई बार डाइटिंग के चक्कर में शरीर को पोषक तत् वों से वंचित रहना पड़ जाता है। शरीर को पर्याह्रश्व त मात्रा में पौष्टिक चीजें न मिलने पर कमजोरी, चक् कर और चिड़चिड़ेपन की समस्या हो सकती है। खासकर शरीर में विटामिन बी-12 की कमी के कारण थकान, कब् ज की समस् या और चक्कर आ सकते हैं।
महिलाएं चक्करों से कैसे पाएं निजात
कई बार हल्के चक्कर अपने आप ही ठीक हो जाते हैं लेकिन चक् कर यदि लंबे समय तक या हफ्तों तक आपको परेशान कर रहे हैं तो आपको इसका सही कारण और ट्रीटमेंट करना जरूरी है। सामान् य चक्कर आने पर आप घरेलू चीजों का उपयोग करके चक् करों से निजात पा सकते हैं।
विटामिन सी
यदि आपको वर्टिगो की समस्या है तो विटामिन सी का सेवन चक्कर की समस्या से निजात दिला सकता है। विटामिन सी में मौजूद एंटी-ऑक् सीडेंट्स कमजोरी और थकान को दूर करने में मदद करता है। विटामिन सी की पूर्ति के लिए आप अपनी डाइट में संतरा, स्ट्रॉबेरीज, बेल और नींबू को शामिल कर सकते हैं।
डाइट में शामिल करें आयरन
एनीमिया की समस्या होने पर भी चक्कर महसूस हो सकते हैं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए अपनी डाइट में रेड मीट, अंडा, बीन्स, ग्रीन वेजिटेबल, अनार और सेब जैसी हेल् दी चीजों को शामिल करें। एनीमिया की समस्या कम होने पर चक् कर अपने आप ही कम हो जाएंगे। इसके अलावा डाइट में विटामिन ई और डी को भी शामिल करें।
अधिक पानी का सेवन

डिहाइड्रेशन चक्कर आने का एक सामान्य कारण हो सकता है। यदि आप अधिक देर तक पानी नहीं पीते तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। इस समस्या से बचने के लिए पर्याह्रश्व त मात्रा में पानी का सेवन करें। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। पानी पीने से सिरदर्द की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है। चक्कर आने पर महिलाएं बरतें ये सावधानियां
1.चक्कर आने पर कुछ देर के लिए हो सके तो लेट जाएं।
2.कमजोरी की वजह से भी चक्कर आ सकते हैं इसलिए इस स्थिति से बचने के लिए पानी का अधिक सेवन करें।
3.चक्कर आने पर अल्कोहल और तंबाकू का सेवन न करें।
4.नींद की कमी के कारण भी चक्कर आ सकते हैं इसलिए 6-7 घंटे की क्वालिटी स्लीप लें।
5.जिस समय आपको चक्कर महसूस हो उस वक्त आप अपनी आंख बंद कर लें और बैठ जाएं।?
6.कई बार लो बीपी और डायबिटीज के कारण चक्कर आ सकते हैं। इस स्थिति में चीनीयुक्त कॉफी का सेवन करें, चक्कर आने कम हो जाएंगे।
7.कान में किसी प्रकार की समस् या होने पर भी चक्कर की समस्या हो सकती है। इस स्थिति में ईएनटी को अवश्य अपनी समस्याएं बताएं।
8.अधिक चक्कर आने पर चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें।
माइग्रेन का दर्द

महिलाओं में माइग्रेन की समस्या अधिक देखने को मिलती है। सिर में तेज दर्द होने की वजह से चक्कर, उल्टी और मितली जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। माइग्रेन कई कारणों की वजह से ट्रिगर कर सकता है। महिलाओं में माइग्रेन की समस्या मुख्यता हार्मोनल चेंजेज की वजह से होती है। कई बार स्ट्रैस और एंग्जाइटी भी इसे बढ़ावा दे सकता है।
