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साइकोपैथ से ग्रसित व्यक्ति से रहें सावधान: Psychopath Disorder
Psychopath Disorder


Psychopath Disorder: इन दिनों श्रद्धा और आफताब केस सुर्खियों में है। डाॅक्टर का मानना है कि आफताब साइकोपैथ बीमारी से ग्रसित है, जिसकी वजह से उसने ऐसा किया। साइकोपैथ लोग आपके आसपास रहते हैं, घूमते रहते हैं। ये देखने में तो सामान्य नजर आते हैं, लेकिन होते नहीं हैं। इसी वजह से आम व्यक्ति उन्हें पहचान नहीं पातें। जब तक उन्हे मौका नहीं मिलता, वो एक्टिव नहीं हो पाते। इसी वजह से आम व्यक्ति उन्हें पहचान नहीं पातें। स्वयं को सही साबित करने के मकसद से या गुस्से की वजह से साइकोपैथ व्यक्ति किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्हें पहचानने की जरूरत है। अगर आपके आसपास इस तरह के लोग हैं, तो उन्हें तुरंत मदद की जरूरत है। अगर आपके परिवार में हैं, तो मदद करिए, वरना उनसे दूरी बनाकर रखना बेहतर है।

साइकोपैथ एक मेंटल डिसऑर्डर क्या है?

वास्तव में साइकोपैथ एक मेंटल डिसऑर्डर है। इसमें मरीज मूलतः चार तरह के डिसऑर्डर से होकर गुजरता है, जो बाद में साइकोपैथ में बदल जाती हैं।

  1. नरसिस्ट पर्सनेलिटी डिसऑर्डर (एनपीडी)– इसमें साइकोपैथ पीड़ित व्यक्ति आत्ममुग्ध होता है, अपने आपको हमेशा सही समझता है। अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करता है। मजबूरी में भले ही उसे स्वीकार करनी पड़ें, लेकिन दिल से स्वीकार नहीं करता है। उसकी कोशिश रहती है कि जो वो चाहता है, वो पूरा हो। आत्ममुग्ध रहता है, परिवार-दोस्तो की बिल्कुल परवाह नहीं करता। अपने पार्टनर को इमोशनली ब्लैकमेल करते हैं कि वो उनके बिना रह नहीं पाएंगे, जान दे देंगे। अगर कहीं यह मौका मिल जाए कि उसका पार्टनर अलग होना चाह रहा है, तो वो उसे शारीरिक-मानसिक रूप से परेशान करने या हिंसा पर भी उतर सकते हैं। अगर पार्टनर उससे दूर जाने की कोशिश करता है, तो साइकोपैथ व्यक्ति अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पाते।
  2. बाॅर्डरलाइन पर्सनेलिटी डिसऑर्डर (बीपीडी)- इसमें साइकोपैथ व्यक्ति हमेशा बाॅर्डरलाइन पर खड़ा होता है। यानी या तो अच्छा है या बुरा है, बीच का कुछ नहीं है। इस डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति जीवन भर दूसरों के साथ नाॅन स्पीकिंग टर्मस रहते हैं। वह जिससे प्यार करता है तो बहुत ज्यादा प्यार करता है या लड़ाई करता है तो हमेशा लड़ता-झगड़ता रहता है। यानी वह दूसरे के लिए या तो बहुत अच्छा होता है, या फिर बहुत खराब होता है। बीच का कोई रास्ता नहीं होता। यह डिसऑर्डर ज्यादातर महिलाओं में होता है।
  3. बाॅयोपोलर डिसऑर्डर – यह डिसऑर्डर महिलाओं में ज्यादा होती है। बाॅयोपोलर के मरीज बाद में साइकोपैथ में कंवर्ट हो जाते हैं। ऐसे मरीज हमेशा दुखी रहता है और दुखी रहने के उपाय खुद ही खोजता रहता है। खुद की बनाई चीजों में दुखी रहना या हर चीज में नेगेटिविटी ढूंढता है। ऐसे नेगेटिव विचारों वाले व्यक्तियों के घर में हमेशा झगड़ा होता है, कहीं बाहर जाने की इच्छा नहीं होती, दुखी रहने की वजह से उनके निजी संबंध भी खराब रहते हैं। बाॅयोपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति हमेशा सोचता है कि पार्टनर उसका ध्यान नही रखता है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता।
  4. सिजोफ्रेनिया डिसऑर्डर – इससे ग्रसित मरीज को हमेशा अजीबोंगरीब खतरे का अहसास रहता है, जबकि असल में कोई खतरा नहीं होता है। जैसे- बाहर कोई खड़ा है, उसे मार देगा, उसका कोई पीछा कर रहा है, उसे मार देगा या उसका टेलीफोन सुन रहा है। हालांकि यह डिसऑर्डर बहुत कम लोगों को होता है लेकिन उन्हें काफी परेशान करता है।
Psychopath Disorder
People with psychopaths are actually dual personalities

साइकोपैथ के क्या है लक्षण?

  • साइकोपैथ ग्रसित व्यक्ति असल में दोहरे व्यक्तित्व के होते हैं। अगर आपको किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिख रहे हैं, तो आपको उससे सावधान रहना चाहिए।
  • सबसे पहली पहचान होती है कि साइकोपैथ ग्रसित व्यक्ति हमेशा कमजोर, दुबला-पतला होता है।
  • व्यक्ति हमेशा दुखी या पीड़ित होेने का विक्टम कार्ड खेलता है। सबको बताता है कि वह बहुत परेशानी और समस्याओं से गुजर रहा है। इसके जरिये वह आपकी सहानुभूति अर्जित करने में सफल होगा।
  • मरीज गुस्सैल स्वभाव वाला होता है जिसकी वजह से वह अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाता। कभी दूसरा व्यक्ति उसकी दुखती नब्ज पर हाथ रख दे, तो वह अपने गुस्से को कंट्रोल में नहीं रख पाते हैं।
  • वह दूसरे से न जीत पाए तो रोने-धोने का नाटक करना शुरू कर देता है। अगर वह जीत जाता है तो दूसरे व्यक्ति से मजाक उड़ाने का बदला लेकर ही रहता है।
  • साइकोपैथ मरीज को कानून का डर नहीं होता, उन्हें यह उम्मीद नहीं होती कि कानून की पहुंच तक आ सकता है।
  • वह हमेशा छोटी गलती से शुरू करता है। जब वह कानून की पकड़ से बच जाता है, तो अपराध धीरे-धीरे बढ़ाता जाता है।
  • ऐसा मरीज अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे की भावनाओं या तकलीफों की कद्र नहीं करता। अगर दूसरा व्यक्ति अपनी भावनाओं या तकलीफ की बात करता भी है, तो वह उन पर ध्यान नहीं देता।
  • उसे ज्यादातर ख्याल अपना और अपनी जरूरतों को पूरा करने का होता है। हालांकि वो दूसरे व्यक्ति के आसपास रहता है, उसका ध्यान अपने ऊपर ही होता है। अपनी जरूरत को पूरा करवाने के लिए वह रोने-धोने, चीखने-चिल्लाने से भी पीछे नहीं रहता।
  • साइकोपैथ मरीज में झूठ बोलने का भी पैटर्न होता है। वो बेवजह झूठ बोलता है, अपनी बढ़ाई करने या दूसरे से वाहवाही पाने के लिए भी बड़ी आसानी से झूठ बोल देेते हैं। अपने झूठ को सच मानते हैं। यह उनकी मानसिक समस्या होती है।
  • अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और उस पर विश्वास भी करते हैं। भले ही जरा सी उपलब्धि होगी, उसे बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और उस पर विश्वास भी करते हैं।
  • अपने लक्ष्य पर डटे रहते हैं। अगर उसकी बात नहीं मानी जा रही हो, तो वो मौके का इंतजार में रहते हैं। अगर वो अपने दुश्मन या दूसरे व्यक्ति से जीत नहीं पा रहा हो, तो वो छुपाकर उसका नुकसान करने की कोशिश करता है।
  • साइकोपैथ ग्रसित व्यक्ति लगातार बातें बनाने और दूसरे को अपनी बात मनवाने में भी सक्षम होते हैं।

कब जाएं डाॅक्टर के पास?

Psychopath Disorder
These traits come in him because of the parents or family

कोई भी व्यक्ति साइकोपैथ डिसऑर्डर के लक्षणों को लेकर पैदा नहीं होता है। उसमें ये लक्षण मां-बाप या परिवार की वजह से आते हैं। घर की स्थितियां व्यक्ति को मेंटल डिसऑर्डर की तरफ ले जातीे है। बच्चों या किसी व्यक्ति को साइकोपैथ डिसऑर्डर की चपेट में आने से बचाने के लिए जरूरी है कि अगर ऐसे लक्षण हैं, तुरंत मनोवैज्ञानिक को तुरंत कंसल्ट करें।

क्या है इलाज?

हालांकि साइकोपैथ मेंटल डिसऑर्डर का सटीक इलाज संभव नहीं है। फिर भी मनोवैज्ञानिक मरीज की केस हिस्ट्री जानकर समुचित इलाज करते हैं और इसे कंट्रोल करने में मरीज की मदद करते हैं। मरीज को नियमित तौर पर मेडिटेशन करने के लिए कहा जाता है। दवाइयां दी जाती हैं जिससे मरीज की सोचने की क्षमता थोड़ी-सी कम होती है। उससे बीमारी कंट्रोल हो सकती है।

(डाॅ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक, स्वास्तिक क्लीनिक, दिल्ली)

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