दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, चल रहा है उससे हममें से ज्यादा लोग तनावग्रस्त(स्ट्रेस्ड) , चिंतित (अन्सियस) या डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। ऐसा देखा गया है कि कई लोग इन शब्दों का इस्तेमाल एक दूसरे से करते रहते हैं लेकिन इन शब्दों का सही मतलब नहीं जानते हैं। ये तीनो शब्द अलग-अलग होते हैं, इनका अर्थ और लक्षण अलग-अलग होता है। अंतर जानने से आपको इनका सामना करने में मदद मिल सकती है।
स्ट्रेस (तनाव) – जिस तरह से भारी वजन उठाने से आपकी मांसपेशियों पर जोर पड़ता है, उसी तरह बाहरी फैक्टर भी आपके दिमाग पर भी जोर डाल सकते हैं।
एंजाइटी- एंजाइटी आंतरिक तनाव (इंटरनल स्ट्रेस) का परिणाम होता है। यह चिंता या भय की भावना है जो किसी विशिष्ट बाहरी फैक्टर की सीधी प्रतिक्रिया नहीं होती है। आप इस बात से डर सकते हैं कि भविष्य में क्या होगा या एंजाइटी का एक सामान्य एहसास होता रहेगा। क्योंकि इनमें से कोई भी स्थिति वास्तविक, वर्तमान खतरे को प्रस्तुत नहीं करती है, इसलिए आपकी प्रतिक्रियाएं चिंता का उदाहरण होती हैं।
डर- जब कोई बाहरी फैक्टर आपकी सुरक्षा के लिए खतरा होता है, तो आप उसे सोचकर डरते हैं – जैसे आपके भूखे शेर के सामने आने पर आपको जो एहसास होता है वह डर होता है। आज की दुनिया में आपको कोविड19 से संक्रमित होने का डर है।
सभी तीनो फीलिंग ओवरलैप करती हैं और शारीरिक रूप से समान होती हैं। उदाहरण के लिए, आप अपने शरीर में, अपने दिल की धड़कन में, हाई ब्लड प्रेशर या अनिद्रा में स्ट्रेस को फील कर सकते हैं। स्ट्रेस या डर का खतरा जब हट जाता है तो इसका लक्षण भी गायब हो जाता है। एंग्जाइटी हालांकि, लंबे समय तक रह सकती है क्योंकि यह सीधे बाहरी कारणों से जुड़ी नहीं होती है (और जब हम अपनी चिंताजनक प्रतिक्रिया से डरते हैं, तो हम अनजाने में लंबे समय तक अपनी एंग्जाइटी पैदा कर सकते हैं)।
हमारे शरीर में टेंशन, डर और एंग्जाइटी सभी स्ट्रेस से जुड़े होते हैं। कोई भी व्यक्ति इन्हें आराम करके कम कर सकता है। आप श्वास अभ्यास (ब्रीदिंग एक्सरसाइज) सीखने और करने, योग करने, जॉगिंग करने या गर्म स्नान करने से भी मदद पा सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको नींद कम आती हैं, तो थोड़ा सा आराम करने से आपको बहुत फायदा हो सकता है।
स्ट्रेस और डर किस वजह से हो रहा है इसको जानने पर आप इसके खतरों को कम कर सकते हैं। उदाहरण के लिए आपका स्ट्रेस और डर को कम करने का मतलब यह हो सकता है कि आप समाचार के संपर्क में हैं। जब आप अपने तनाव या डर के कारण चीजों को संबोधित करने की अपनी क्षमता में सीमित हो जाते हैं, तो आपको समस्या को कम करने और फिर जीवन में अन्य चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होगी।
जब आपको एंग्जाइटी, टेंशन या डर ज्यादा होता है, तो फीलिंग को एक्सेप्ट करो। वह करो जो आपको दिलासा दे सकता हैं, या अपने आपको कम्फर्ट फील कराने के लिए किसी व्यक्ति की मदद भी लो। फिर इंटेलेक्चुयली एक कदम पीछे लेना मददगार हो सकता है। अपनी सच्ची फीलिंग को एक्सेप्ट करते हुए स्थिति को अधिक उद्देश्य से देखने की कोशिश करें। इससे आपको आगे क्या करना है इसकी जानकारी मिल सकती है। अपनी फीलिंग को प्रभावी ढंग से एड्रेस करके आप अपने तनाव को कम करने, हल्का महसूस करने और अच्छा होने का आनंद लेने में मदद कर सकते हैं।
सबसे पहले अपने डर, स्ट्रेस या एंग्जाइटी को पहचाने। इसे करने के बाद यह देखें कि आप इनसे कैसे प्रभावित हुए हैं। खुद इन्हे टालने के लेवल को देखें , यह आपको कितना दुविधाजनक (डिसफंक्शनल) बना रहा है यह भी देखें, अपने डर का सामना करने के लिए अपने आप को पुश करें, स्ट्रेस से निपटने के लिए सपोर्ट खोजें, ज्यादा खराब होने की उम्मीद न करें, रूटीन एक्टिविटीज के साथ अपने आपको बदलें, अपने डर के अनुसार अपने जीवन को न बदलें … अब भी अगर आपको लगता है कि आप इसे कंट्रोल नहीं कर सकते हैं तो क्लिनिकल साइकेलॉजिस्ट को दिखाएँ। वह आपको संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी(कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी) , बायोफीडबैक थेरेपी के साथ इलाज कर सकता है। अगर जरूरत हुई तो किसी सायकेट्रिस्ट को दिखाएँ, जो आपको इलाज के लिए दोनों मेडिकेशन और थेरेपी का सुझाव देगा।
पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम , क्लिनिकल सायकोलॉजी और सायकोथेरेपी, सीनियर कंसल्टेंट डॉ प्रीती सिंह द्वारा इनपुट
