Tattoo Risks and Side Effects
Tattoo Risks and Side Effects

Tattoo Risks and Effects: टैटू बनवाना किसी के लिए भी एक अनोखा अनुभव होता है। आजकल टैटू बनवाना ना सिर्फ आम बात हो गई है बल्कि ये एक फैशन हो गया है। ये एक ऐसी कला है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व को दिखाती है। कुछ लोग इसका उपयोग अपने विचारों और भावनाओं को प्रदर्शित करने के लिए करते हैं, जबकि दूसरे लोग सिर्फ सुंदरता, फैशन, शौक और दिखावे के लिए करते हैं। लेकिन, एक बार जब आप एक स्थायी टैटू बनवाते हैं, तो इसका प्रभाव आपके जीवन में हमेशा के लिए बना रहता है। क्या आपको पता है कि किसी भी परमानेंट टैटू के साथ कुछ जोखिम और साइड इफेक्ट्स भी होते हैं? अगर आपके मन में भी टैटू बनवाने का ख्याल है तो चलिए, जानते हैं टैटू से आपको क्या कुछ हो सकता है।

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परमानेंट टैटू बनवाने के जोखिम

Tattoo Risks and Effects
Risk of Tattoo

त्वचा संक्रमण

परमानेंट टैटू बनवाने से कुछ रिस्क हो सकते हैं, जिनका आपको खास ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहला खतरा है त्वचा संक्रमण का। जब भी किसी टैटू पार्लर में टैटू बनवाने जाते हैं, तो आपको ये सुनिश्चित करना चाहिए कि पर्यावरण हमेशा सुरक्षित और साफ हो। अगर साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा गया तो त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही अपने त्वचा विशेषज्ञ से जान लें कि आपकी त्वचा पर टैटू बनवाना सुरक्षित है या नहीं। दरअसल, संवेदनशील त्वचा पर टैटू बनवाने से त्वचा संक्रमण अधिक होता है। इसके अलावा संक्रमण दूषित स्याही या उपकरण के कारण भी हो सकता है। ऐसे स्टूडियो में टैटू बनवाना जहां अच्छे सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया हो, त्वचा संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।

एलर्जिक रिएक्शन

यदि आपको पहले से ही कोई त्वचा एलर्जी हो तो आपको टैटू बनवाने से एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। जैसे टैटू वाली जगह पर खुजलीदार दाने। ऐसा टैटू बनवाने के सालों बाद भी हो सकता है। वहीं कुछ लोगों को टैटू की स्याही से या टैटू के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री या उपकरण से एलर्जी हो सकती है। अन्य टैटू स्याही रंगों की तुलना में लाल स्याही से एलर्जी होने का खतरा अधिक होता है, इसमें मरकरी सल्फाइड होता है। ये एलर्जी समय के साथ बढ़ भी सकती है और कई बार त्वचा पर चकत्ते या जलन का कारण भी बन सकती है।

सूजन वाली एलर्जी, जिसमें टैटू वाली जगह पर त्वचा लाल हो जाती है, थोड़ी सूजन हो जाती है। यह मुख्य रूप से टैटू की स्याही और टैटू सुई से होने वाली जलन के कारण होता है। लाइकेनॉइड एलर्जी , जो यह काफी दुर्लभ है लेकिन काफी हद तक लाल स्याही से जुड़ी हुई है। फोटोफोबिया भी एक एलर्जी है जो टैटू तुरंत सूर्य की किरणों के संपर्क में आते हैं, वे भी एलर्जी प्रतिक्रिया का कारण बन सकते हैं। विशेष रूप से वे जिनमें पीली स्याही होती है। पीले और कुछ लाल रंगों में कैडमियम सल्फाइड होता है, जिसके सूर्य के संपर्क में आने पर एलर्जी की प्रतिक्रिया हो सकती है।स्यूडोलिम्फोमेटस एलर्जी प्रतिक्रिया, टैटू स्याही में एक विशेष घटक के प्रति संवेदनशीलता के कारण ऐसा होता है, लेकिन ये एलर्जी तुरंत नहीं होती। परमानेंट टैटू बनवाने से सेप्टिक भी हो सकता है।

पड़ सकते हैं त्वचा पर निशान

परमानेंट टैटू बनवाने से केलॉइड बनने का खतरा भी रहता है। केलोइड्स एक प्रकार के निशान होते हैं जो त्वचा पर उभर आते है। ये खास उन लोगों में देखा गया है जो पहले से ही केलॉइड प्रोन होते हैं। दरअसल, टैटू बनवाते समय डर्माब्रेशन या लेसिक सर्जरी की जरूरत होती है, तो त्वचा पर छोटे-छोटे निशान बन जाते हैं। केलोइड्स का उपचार करना मुश्किल होता है और ये अक्सर परमानेंट हो जाते हैं। साथ ही कभी-कभी टैटू की स्याही के त्वचा के आसपास सूजन आ सकती है। इसे ग्रैनुलोमा कहा जाता है।

अन्य गंभीर बीमारियां

यदि टैटू बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण पर संक्रमित रक्त लगा है, तो आपको ऐसी बीमारियां हो सकती हैं जो रक्त के माध्यम से फैलती हैं। इनमें मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस ऑरियस, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी शामिल हैं। अपने जोखिम को कम करने के लिए, टैटू बनवाने से पहले हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।

हाइपर या हाइपो पिगमेंटेशन

यह समस्या आमतौर पर त्वचा पर टैटू बनवाने के तुरंत बाद नहीं दिखती बल्कि छह से नौ महीने के भीतर ये त्वचा पर उभरने लगती है। परमानेंट टैटू से त्वचा पर जलने, निशान पड़ने और त्वचा की बनावट में बदलाव भी दिखने लगते हैं। कभी-कभी टैटू के आसपास की त्वचा का रंग बदल सकता है, जिसका कारण टैटू का डिजाइन खराब दिखने लगता है। परमानेंट टैटू के कारण होने वाले हाइपरपिग्मेंटेशन के प्रभावों से बचने के लिए, त्वचा विशेषज्ञ या कॉस्मेटिक सर्जन से मिलकर इसके उपचार के बारे में जानना चाहिए।

छिप जाते हैं त्वचा कैंसर जैसे लक्षण

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Symptoms like skin cancer get hidden

टैटू बनवाने का एक और जोखिम ये है कि यदि आपको त्वचा कैंसर या किसी अन्य कोई त्वचा की समस्या है तो उसके संभावित लक्षण छिप सकते हैं। इनमें तिल, लाल धब्बे और अन्य संकेत शामिल हैं जो किसी त्वचा संबंधी समस्या से जुड़े हो सकते हैं जिनका पता समय पर नहीं चल पाता है।

एमआरआई करवाने में आती है समस्याएं

यदि आपका डॉक्टर किसी कारण से एमआरआई स्कैन करवाने की सलाह देता है, तो इसकी थोड़ी संभावना है कि परीक्षण आपके टैटू के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है। कुछ दुष्प्रभावों में, एमआरआई स्कैन के बाद त्वचा में सूजन और खुजली भी हो सकती है, लेकिन कुछ समय बाद वे अपने आप ठीक हो जाते हैं। यदि आपका टैटू निम्न-गुणवत्ता वाली स्याही से बना है या यदि टैटू पुराना है, तो ऐसी प्रतिक्रियाओं का जोखिम अधिक हो सकता है। हालांकि यह प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत दुर्लभ होती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

अब आप समझ गए होंगे कि टैटू बनवाने खासतौर पर परमानेंट टैटू बनवाने से पहले बहुत सावधानी बरतनी आवश्यक है। लेकिन इसके साथ ही आपको कुछ बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। जैसे-

  • सुरक्षित और साफ टैटू पार्लर चुनें।
  • टैटू बनवाने से पहले पार्लर की साफ-सफाई की जांच करें।
  • त्वचा को टैटू के बाद अच्छे से देखें और संक्रमण का ध्यान रखें।
  • सूरज के तेज किरणों से बचने के लिए टैटू को ढक कर रखें।
  • टैटू बनवाने का फैसला जल्दबाजी में न करें।
  • प्राकृतिक टैटू स्याही का उपयोग ही करें, क्योंकि इससे एलर्जी का खतरा कम होता है।
  • टैटू बनवाने के बाद जल्दी स्विमिंग ना करें, ताकी त्वचा संक्रमण से बच सकें।

एक परमानेंट टैटू बनवाने से पहले, समय निकाल कर सभी जोखिम और साइड इफेक्ट्स के बारे में जानना जरूरी है। अगर आपको लगता है कि आप इसमें सहज हैं तभी आगे बढ़ने का निर्णय लें। हमेशा याद रखें कि एक परमानेंट टैटू आपके जीवन का हिस्सा बन जाता है, इसलिए फैसला लेने से पहले अच्छे से विचार करें।