मेंशुरेशन साइकिलऔरत की जिंदगी मेंकुछ ऐसे चलती है कि इसकी वजह से परेशानियां तो बहुत होती हैं लेकिन इसके बिना हेल्थ भी बनी नहीं रह सकती है।इसका सीधा रिश्ता औरतों के मां बनने से है। पर फिर एक दिनइसी महावारी के बंद होने का समय आता है।इस वक्त भीशरीर पर कई तरह के लक्षण दिखने लगते हैं। कई बार उतनी ही परेशानियां होती हैं जो महावारी के दौरान होती हैं। इस एक खास समय को मेनोपॉज(Menopause)कहा जाता है और हर औरत की जिंदगी में ये महावारी जितना ही जरूरी समय होता है।इसलिए ये जानना जरूरी है कि इसके आने की दस्तक किन लक्षणों से पता चलती है। ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि ये चुपके से आ जाते हैं। बल्कि इसके आने पर कई सारे शारीरिक बदलाव होते हैं।मेनोपॉजके इन्हीं लक्षणों को जानिए-

कब माना जाता है मेनोपॉज

मेनोपॉज वो समय हैजोमेंशुरेशन साइकिल के खत्म होने की सूचना देता है। ये सूचना तब सही मानी जाती है जब12महीनों तक महावारी आए ही न।मेनोपॉज का ये समय40की उम्र में भी आ सकता है और50की उम्र में भी।

क्या होता है मेनोपॉज

मेनोपॉज के बाद महिलाएं मां नहीं बन सकती हैं। जब शरीर में बनने वाले फॉलिकल्स की संख्या कम होने लगती है तब महिलाओं के शरीर अंडाशय से अंडे रिलीज होने कम हो जाते हैं। पर फिर एक समय के बाद फॉलिकल्स बनना बंद होते हैं और अंडाशय के अंडे भी। महावारी आना बंद हो जाती है।इस वक्त के बाद मां बनने की संभावना खत्म हो जाती है।

मानसिक और शारीरिक

मेनोपॉज होने वाला है,ये कुछ लक्षणों से पता चलता है जो शारीरिक भी होते हैं और मानसिक भी। शारीरिक क्षमताएं तो कम हो ही जाती हैं इसकी वजह से आप खुद को इमोशनल तौर पर कमजोर भी महसूस आकर सकती हैं।

जब पता चले,मेनोपॉज ने दी है दस्तक

  • अनियमित पीरियड्स
  • योनि में सूखापन
  • पूरे शरीर मेंहॉट फ्लैशेज
  • ठंड लगना
  • रात को पसीना आना
  • नींद में परेशानी
  • मूड में बदलाव
  • वजन बढ़ना
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन
  • डिप्रेशन
  • मेटाबॉलिज्म का धीमा होना
  • बालों का पतला और रूखा होना

महिलाओं को इन लक्षणों में भी सबसे ज्यादा बारपूरे शरीर मेंहॉट फ्लैशेजऔरअनियमित पीरियड्स का सामना ही करना पड़ता है।

कब माने जाएगी महावारी अनियमित

-1महीने या कुछ महीने न हो फिर कई महीने नियमित होने लगे।

पीरियड की साइकिल छोटी हो जाए।

प्रेग्नेंसी या दूसरे कारण

प्रेग्नेंसी या दूसरे कारण भी हो सकते हैं। क्योंकि जरूरी नहीं एक निश्चित उम्र आने के बाद पीरियड सिर्फ मेनोपॉज की वजह से ही रुके हों। इसलिए इसकी जांच जरूर करा लें।

पेरीमेनोपॉज क्या है-

मेनोपॉज की तरह ही पेरीमेनोपॉज भी होता है। ये कई महिलाओं को 40 की उम्र से पहले ही हो जाता है। पर ऐसी महिलाओं की संख्या 1 प्रतिशत ही है।

हॉट फ्लैश क्या होता है

मेनोपॉज होने पर हॉट फ्लैश की दिक्कत भी होने लगती है। हॉट फ्लैश होने पर शरीर का तापमान अचानक से बढ़ने या घटने लगता है।खूब पसीना आने लगता है और धड़कने भी बढ़ने लगती है। इस वक्तये समस्या लंबे समय तक भी रहती है। इसका सामना महिला को मेनोपॉज होने के10साल बाद तककरना पड़ सकता है।

 

मेनोपॉजके बाद आएगी ये दिक्कतें-

 बहुत थकावट करेगी परेशान-

याद रखिए मेनोपॉज आने वाले होते हैं तो अचानक से थकावट आपकी जिंदगी में आ जाती है। थकावट ऐसी लगेगी मानो शरीर में ऊर्जा है ही नहीं। ऐसे इसलिए होता है क्योंकि मेनोपॉज के बाद शरीर में बनने वाले हार्मोन में बहुत सारे बदलाव होने लगते हैं।प्रोजेस्टेरोन,एस्ट्रोजन और थाइरॉइडइतनी तेजी से बदलने लगते हैं असर थकावट के रूप में दिखने लगता है। जबकि ऐसेहार्मोन शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं। इसमें सुधार के लिए आपको संतुलित भोजन का सेवन करना होगा तो एक्सरसाइज भी। इसके साथ मन को सकारात्मक रखने की कोशिश भी करें।

हड्डियां हो जाएंगी कमजोर-

मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में कई सारे बदलाव आते हैं। ऐसे ही बदलावों में से एक है हड्डियों का कमजोर हो जाना। दरअसल हड्डियों को मजबूत करने में एस्ट्रोजेन हार्मोन की बड़ी अहमियत होती है। पर मेनोपॉज के बादये हार्मोन बनना कम हो जाता है। इससे हड्डियों कीमजबूती कम होने लगती है। फिर ऑस्टियोपोरोसिस की स्थिति भी आ जाती है।

स्किन से जुड़ी दिक्कतें-

मेनोपॉज के समय महिलाओं को त्वचा से जुड़ी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है। त्वचा का रूखापन और खुजली जैसी दिक्कतें भी होने लगती हैं। इसकी वजह भी एस्ट्रोजन हार्मोन ही बनता है। इसके कम बनने की वजह से त्वचा का नेचुरल ऑयल बनना बंद हो जाता है। कई दफा स्किन बहुत ज्यादा रूखी भी हो जाती है। इस वक्त त्वचा को हाइड्रेट रखने की कोशिश करें।

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