Overview:फेफड़ों में फाइब्रोसिस
फेफड़ों का फाइब्रोसिस एक गंभीर बीमारी है जो धीरे-धीरे बढ़ती है और मरीज की ज़िंदगी को प्रभावित करती है। समय रहते इसका निदान और इलाज शुरू कर दिया जाए तो जीवन की क्वालिटी बेहतर हो सकती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही दवाइयों, ऑक्सीजन सपोर्ट और लाइफ़स्टाइल मैनेजमेंट से इसे कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
Pulmonary Fibrosis: फेफड़ों में फाइब्रोसिस एक ऐसी लंबी चलने वाली बीमारी है जिसमें फेफड़ों का सामान्य ऊतक (टिश्यू) सूजन के कारण धीरे-धीरे खराब होकर स्कार यानी दाग-धब्बे जैसा बन जाता है। जब फेफड़े सख्त और मोटे हो जाते हैं तो उनमें से खून तक ऑक्सीजन पहुँचाना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और मरीज को कई तरह की दिक्कतें महसूस होती हैं।
फेफड़ों के फाइब्रोसिस के लक्षण
- चलते या मेहनत करते समय सांस फूलना
- लगातार सूखी खाँसी
- जल्दी थकान लगना
- खून में ऑक्सीजन का स्तर गिरना (लो SPO₂)
- वजन कम होना और पैरों में सूजन
- उँगलियों के नाखून गोल-मोटे हो जाना (क्लबिंग)
बीमारी के कारण और रिस्क फैक्टर्स

फेफड़ों के फाइब्रोसिस के करीब 200 प्रकार हैं। कई मामलों में कारण अज्ञात रहते हैं (इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस)। लेकिन कुछ प्रमुख वजहें हैं:
- जोड़ों की बीमारियाँ (रूमेटॉइड आर्थराइटिस, स्जोग्रेन सिंड्रोम, स्क्लेरोडर्मा)
- धूल-मिट्टी, फफूँद, कबूतरों के पंख या बीट से लगातार संपर्क
- कारखाने की धूल (सिलिका, एस्बेस्टस)
- धूम्रपान और प्रदूषण
- कुछ दवाइयाँ और पेट की एसिडिटी (रिफ्लक्स)
लंबे समय के असर
यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और पूरी तरह से ठीक नहीं होती।
- कुछ मरीजों में स्थिति धीरे बिगड़ती है, तो कुछ में अचानक खराब हो जाती है।
- आगे चलकर फेफड़ों में हाई ब्लड प्रेशर और दिल पर असर पड़ सकता है।
- पैरों में ज़्यादा सूजन और दैनिक जीवन में कठिनाइयाँ बढ़ जाती हैं।
इलाज और मैनेजमेंट
- इस बीमारी का पक्का इलाज संभव नहीं है, लेकिन कुछ दवाइयाँ (पिरफेनिडोन, निन्टेडानिब) इसकी प्रगति धीमी कर सकती हैं।
- ऑक्सीजन सपोर्ट और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से मरीज को राहत मिलती है।
- गंभीर मामलों में लंग ट्रांसप्लांट भी एक विकल्प है।
Inputs by: डॉ. विकास मित्तल, डायरेक्टर – पल्मोनोलॉजिस्ट, सीके बिरला अस्पताल®, दिल्ली
