‘‘पिछले सप्ताह मैं अपना पर्स घर पर भूल गई; आज तो मुझे इतनी खास मीटिंग भी याद नहीं रही। मैं अपना दिमाग फोकस नहीं कर पा रही, लगता है मेरा दिमाग खराब हो गया है।”

अक्सर कई गर्भवती महिलाओं को लगता है कि उनकी भूलने की आदत बढ़ती जा रही है। अपनी संगठनात्मक शक्ति पर भरोसा करने वाली महिलाएँ भी जटिल हालात से घबराने लगती हैं। वे अपना सामान भूलने के अलावा अपना आपा भी खोने लगती हैं। अध्ययनों से पता चला है कि गर्भवती महिलाओं के दिमाग की कोशिकाओं की मात्रा में कमी आती है कहते हैं कि बेटे को जन्म देने वाली मांओं के मुकाबले लड़कियों की माएँ ज्यादा भुलक्कड़ हो जाती हैं। अच्छी बात यह है कि यह सब कुछ अस्थायी तौर पर होता है।

डिलीवरी के कुछ ही महीनों में दिमाग पूरी फूर्ति से काम करने लगता है। यह भी हार्मोन बदलावों की वजह से ही होता है। नींद पूरी न होने से भी ऊर्जा घटती है और दिमाग केंद्रित नहीं रह पाता। भावी मां का पूरा दिमाग नन्हें शिशु के कपड़ों के रंग व नाम चुनने में ही व्यस्त रहने लगता है। अगर आप इस आदत को लेकर तनाव पाल लेंगी तो मामला और बिगड़ जाएगा। थोड़े हंसी-मजाक से बात बन जाएगी। आप स्वयं बेहतर महसूस करेंगी।

दरअसल इस समय आप शिशु बनाने के जरूरी काम में जुटी हैं इसलिए पहले जैसी योग्यता कहाँ से आ सकती है? घर में किए जाने वाले कामों की सूची बनाकर रखें। घर की चाबियाँ रखने की एक जगह बनाएँ। इस आदत से छुटकारा पाने के लिए किसी भी तरह की दवा न लें। धीरे-धीरे आपको इसी तरह काम करने की आदत पड़ जाएगी। शिशु के आने के बाद दिमाग की चुस्ती-फूर्ति फिर से लौट आएगी क्योंकि तब आप भरपूर नींद भी ले पाएँगी।

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